बेरोजगारी का दौर और एक अहम सुझाव
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के शिकारपुरा इलाके में रहने वाले कासम खान की जिंदगी एक समय बेहद मुश्किलों भरी थी। आठवीं कक्षा तक पढ़ाई के बाद पढ़ाई-लिखाई में मन न लगने के कारण उन्होंने स्कूल छोड़ दिया। इसके बाद लंबे समय तक कोई काम नहीं मिला, आमदनी का कोई जरिया नहीं था।
इसी मुश्किल दौर में उनकी सास ने सब्जी-भाजी का व्यवसाय करने का सुझाव दिया। सुनने में यह एक साधारण-सी बात लगती थी, लेकिन कासम खान के लिए यह एक जिंदगी बदलने वाला मोड़ बन गई।
₹4000 की उधारी से हुई कारोबार की शुरुआत
कासम खान ने अपने भाई-बहनों से ₹4000 उधार लिए और जो थोड़ी-बहुत रकम खुद के पास थी, वह भी इसमें जोड़ी। इस छोटी पूंजी के दम पर 19 साल पहले उन्होंने सब्जी का कारोबार शुरू किया।
शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। रोज की कमाई भी ठीक से नहीं निकल पाती थी और घर चलाना मुश्किल हो जाता था। लेकिन कासम खान ने हिम्मत नहीं हारी। वे डटे रहे और संघर्ष जारी रखा। इस कठिन दौर में उनके माता-पिता का सहयोग और हौसला भी उन्हें मिलता रहा।
ताजी सब्जी और भरोसे ने बनाई पहचान
कासम खान ने शहर की बड़ी सब्जी मंडी में अपनी दुकान लगानी शुरू की। उनकी खासियत यह रही कि वे हमेशा ताजी और अच्छी क्वालिटी की सब्जी लेकर आते हैं। लोगों को यही बात पसंद आई और धीरे-धीरे उनकी दुकान पर नियमित ग्राहक आने लगे। अब सुबह से लेकर देर शाम तक खरीदारों का तांता लगा रहता है।
आज लाखों की कमाई और दूसरों के लिए रोजगार
19 साल की निरंतर मेहनत का नतीजा यह है कि कासम खान अब हर साल 2 से 3 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं। उनकी दुकान पर अब दो लोग काम करते हैं यानी खुद आगे बढ़ने के साथ-साथ वे दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनका सपना है कि आगे चलकर और अधिक लोगों को रोजगार का मौका मिल सके।













