रांची की एक आम घरेलू महिला, सीमा शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि उद्यमशीलता की दुनिया में कदम रखने और सफलता का स्वाद चखने के लिए उम्र कभी कोई बाधा नहीं होती। अपने जीवन के लगभग पांच दशक केवल परिवार की देखभाल और बच्चों की परवरिश में पूरी तरह से समर्पित करने के बाद, उन्होंने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो आज समाज की कई अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है। 48 वर्ष की इस बेहद सफल व्यवसायी ने महज दो साल पहले बुने गए एक छोटे से विचार को एक शानदार हकीकत में बदल दिया है और आज उनका उच्च गुणवत्ता वाले सिल्क परिधानों का कारोबार लाखों में खेल रहा है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता की मजबूत नींव में उनके ससुराल वालों का एक बहुत ही प्रगतिशील और अप्रत्याशित नजरिया शामिल है, जिन्होंने उन्हें घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपनी एक अलग पहचान बनाने के लिए मजबूती से प्रेरित किया।
सास-ससुर ने दिखाई नई राह
जब सीमा के बच्चे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए और वे पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गए, तो एक मां के रूप में उनकी जिम्मेदारियां कम हो गईं और उनके पास काफी खाली समय बचने लगा। आम तौर पर इस उम्र में पहुंचने के बाद महिलाएं आराम करना और शांत जीवन बिताना पसंद करती हैं, लेकिन उनके सास-ससुर की सोच समाज की इस पुरानी धारणा से बिल्कुल अलग थी। उन्होंने अपनी बहू का हौसला बढ़ाते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि उसे अब घर में खाली बैठने के बजाय बाहर जाकर कुछ रचनात्मक और उत्पादक काम करना चाहिए। परिवार के इन वरिष्ठ सदस्यों से मिली इस अप्रत्याशित प्रेरणा और अपने पति के निरंतर सहयोग ने सीमा के भीतर एक नया और असीम आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने 46 साल की उम्र में अपने उस गहरे ज्ञान का उपयोग करने का फैसला किया जो उन्हें 'जयपुरी मोडाल सिल्क' के बारे में था। एक साधारण और शांत गृहिणी से एक ऊर्जावान महिला उद्यमी बनने का उनका यह रोमांचक सफर मात्र 10,000 रुपये की एक बहुत ही मामूली प्रारंभिक पूंजी के साथ शुरू हुआ था।
जयपुर की यात्रा और अनोखे डिजाइन
अपने नए व्यवसाय को बाजार में एक अलग और खास पहचान देने के लिए सीमा शर्मा ने पूरी उत्पादन प्रक्रिया की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले रखी है। वह केवल अपने घर से बैठकर निर्देश नहीं देतीं, बल्कि बेहतरीन साड़ियों, आकर्षक सलवार सूट और अन्य डिजाइनर परिधानों को तैयार करवाने के लिए नियमित रूप से खुद जयपुर की यात्रा करती हैं। वहां जाकर उन्होंने कई कुशल और अनुभवी कारीगरों को सीधा रोजगार भी दिया है जो उनके द्वारा सोचे गए खूबसूरत डिजाइन को कपड़ों पर उकेरते हैं। उनके तेजी से बढ़ते ब्रांड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनके सभी कपड़ों पर ज्यादातर बहुत ही बारीक हस्तकला का काम होता है। धागों की जटिल बुनाई और फैब्रिक के अनोखे संयोजन के कारण उनकी कोई भी डिजाइन दूसरी बार बिल्कुल वैसी नहीं बनाई जाती। बाजार में उनकी इसी विशिष्टता ने उन्हें एक बहुत ही वफादार ग्राहक वर्ग दिया है। जो भी खरीदार एक बार उनके उत्कृष्ट उत्पादों को खरीदकर ले जाता है, वह हमेशा के लिए उनका पक्का ग्राहक बन जाता है।
लाखों का टर्नओवर और बढ़ता कारोबार
आज सीमा का यह कारोबार एक विशाल और बहुत ही सफल रूप ले चुका है। महज दो सालों के छोटे से अंतराल में, उनकी वह 10,000 रुपये वाली छोटी सी शुरुआत 8 से 10 लाख रुपये के शानदार टर्नओवर तक पहुंच गई है। उनके द्वारा डिजाइन किए गए खूबसूरत जयपुरी परिधान अब केवल रांची शहर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जयपुर, कोलकाता, बिहार, यूपी और दिल्ली जैसे देश के विभिन्न प्रमुख हिस्सों में भारी मांग के साथ भेजे जा रहे हैं। कभी घर के रोजमर्रा के कामों में व्यस्त रहने वाली सीमा के पास अब अपने लगातार बढ़ते व्यापार के कारण एक भी दिन फुर्सत से बैठने का समय नहीं होता है।
आत्मनिर्भरता की उड़ान
आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र होने का यह नया अहसास उनके लिए बेहद खास और संतोषजनक है। अब वह न केवल अपने व्यक्तिगत शौक और लंबे समय से देखे गए सपनों को पूरी तरह से अपने दम पर पूरा कर रही हैं, बल्कि अपने परिवार को एक बहुत ही मजबूत आर्थिक संबल भी प्रदान कर रही हैं। एक सफल बिजनेस चलाने से जो आत्मविश्वास आता है, उसने उनके पूरे व्यक्तित्व को बदल दिया है। अपने इस असाधारण और संघर्षपूर्ण सफर से उन्होंने यह महत्वपूर्ण बात सीखी है कि हर महिला को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ काम जरूर करना चाहिए, चाहे वह काम कितने भी छोटे स्तर पर क्यों न हो। सीमा का कहना है, "अगर आप ईमानदारी से मेहनत करेंगी तो सफलता जरूर मिलेगी।" उनका यह संदेश उन तमाम महिलाओं के लिए एक मशाल की तरह है जो कुछ नया शुरू करने की चाहत तो रखती हैं, लेकिन सामाजिक झिझक के कारण पीछे हट जाती हैं।



















