बिहार के पूर्णिया में रूपेंद्र मोहन दुबे की कहानी संघर्ष से सफलता की एक मिसाल पेश करती है। इलाके में उन्हें लोग लड्डू दुबे के नाम से भी पुकारते हैं। उन्होंने अपनी मां की प्रेरणा से ‘दुबे दरबार’ नाम से एक ढाबे की शुरुआत की है। यह ढाबा आज 22 लोगों के परिवारों का भरण-पोषण कर रहा है, जो कभी खुद किराने की छोटी दुकान चलाते थे या खेतों में मजदूरी करते थे। दूसरों को रोजगार देने वाले रूपेंद्र दुबे की यह यात्रा प्रेरणादायक है।
संघर्ष के दिन और ट्रैक्टर का सफर
साल 1990 से पहले का समय रूपेंद्र मोहन दुबे के लिए काफी अलग था। वे खेतों में खेती का काम करते थे और अपने ट्रैक्टर से 60 रुपये प्रति घंटे की दर से किसानों के खेतों की जुताई किया करते थे। इसके बाद उन्होंने समय के साथ पूर्णिया के डॉलर हाउस चौक पर एक किराने की दुकान भी संचालित की। हालांकि, उन्हें अपने लिए जीने से ज्यादा दूसरों की भलाई करने और उनके जीवन में सुधार लाने में संतुष्टि मिलती थी।
मां की सीख और समाज सेवा की प्रेरणा
रूपेंद्र मोहन दुबे की मां एक समाजसेविका थीं। उनकी मां उन्हें हमेशा समाज के हित में काम करने की सलाह देती थीं। वह चाहती थीं कि रूपेंद्र ऐसा कोई व्यवसाय शुरू करें जिससे न सिर्फ समाज का नाम रोशन हो, बल्कि जरूरतमंद लोगों को आसानी से रोजगार भी मिल सके। मां की यही बातें उनके मन में घर कर गईं और उन्होंने इसी दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया।
‘दुबे दरबार’ की स्थापना और लोकप्रियता
मां की दी गई सीख से पूरी तरह प्रेरित होकर रूपेंद्र मोहन दुबे ने पूर्णिया के नवनिर्मित बाईपास के पास सिपाही टोला बक्सा घाट रोड के किनारे अपनी पैतृक जमीन पर ‘दुबे दरबार’ रेस्टोरेंट नाम से ढाबा खोला। इस ढाबे की खासियत यह है कि यहां 100 से अधिक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिन्हें खाने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं। यहां हमेशा खाने के शौकीनों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिलती है, और वे साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखते हैं।
दूसरों के जीवन में उजाला फैलाने की खुशी
रूपेंद्र मोहन दुबे का कहना है कि उन्हें इस बात का बेहद संतोष और खुशी है कि जो इंसान कभी खुद दूसरों के खेतों में काम करके अपनी आजीविका चलाता था, आज वह 22 अन्य लोगों को रोजगार देकर उनके परिवारों का पेट पाल रहा है। उनका यह अनूठा प्रयास समाज के प्रति उनकी गहरी जिम्मेदारी को बयां करता है। उनकी योजना आने वाले समय में अपने इस कारोबार को और विस्तार देकर अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की है।



















