तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्टूबर को विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर पूरी तरह से युवाओं का है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुनिया तमाम जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए नई सोच की तलाश कर रही है। छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक समुदाय की निगाहें उन अभिनव संभावनाओं पर टिकी हैं, जिन्हें गढ़ने और सुलझाने की वास्तविक क्षमता आज की युवा पीढ़ी के पास मौजूद है।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने युवाओं के सशक्तिकरण, भारत की राष्ट्रीय एकता और तमिल परंपरा के ऐतिहासिक ज्ञान पर गहरा प्रकाश डाला। उन्होंने सभा में मौजूद विद्यार्थियों से मुखातिब होते हुए कहा कि आने वाले कल की बागडोर उन्हीं के हाथों में है और उन्हें अपने सामने मौजूद हर अवसर को पूरी निष्ठा से भुनाना चाहिए।
तमिल विरासत और तिरुक्कुरल का वैश्विक महत्व
संबोधन में प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा, समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक विरासत की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने प्रसिद्ध प्राचीन तमिल रचना तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए इसे मानवीय जीवन के आचरण और मार्गदर्शन का एक अद्वितीय ग्रंथ बताया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने उस पल को भी याद किया जब उन्हें इस ऐतिहासिक कृति की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट करने का अवसर मिला था। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का प्राचीन दर्शन और तमिल ज्ञान विश्व पटल पर भी उतना ही प्रासंगिक और मार्गदर्शक सिद्ध होता है।
विकसित भारत का संकल्प और बड़े कैनवास की सोच
राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का युवा आज विकसित भारत के सपने को साकार करने की सबसे मजबूत शक्ति बनना चाहता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने व्यक्तिगत भविष्य को किसी सीमित दायरे में देखने के बजाय देश और दुनिया के विशाल पटल पर रखकर देखें। उनके अनुसार, इस संकल्प को पूरा करने के लिए जिन नए विचारों और नवाचारों की आवश्यकता है, वे केवल भारत की दिशा ही तय नहीं करेंगे, बल्कि आने वाले समय में समूचे विश्व का भविष्य भी निर्धारित करेंगे।
संस्थान की यात्रा और सैनिकों के लिए बच्चों का योगदान
विश्व हिंदू विद्या केंद्र की इस 50 साल की यात्रा को प्रेरक बताते हुए उन्होंने इसके विकास में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों, पूर्व छात्रों, कर्मचारियों और अभिभावकों की सराहना की। उन्होंने विद्यालय के निर्माण कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले जयगोपाल गरोडिया के योगदान को भी आदरपूर्वक नमन किया।
संस्थान द्वारा विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति के संस्कार रोपने के तरीके की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने पूर्व रेडियो कार्यक्रम की एक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह गिरिजा अम्मा की एक छोटी सी पहल ने बड़ा रूप ले लिया था। उन्होंने बच्चों को हर दिन मात्र एक रुपया बचाने और उसे देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया था। जब हजारों विद्यार्थी इस नेक काम से जुड़े, तो देखते ही देखते लगभग 40 लाख रुपये की राशि एकत्रित हो गई। प्रधानमंत्री ने इसे संस्कार और सामूहिक संकल्प का एक अनुकरणीय उदाहरण बताया।
देश में उच्च शिक्षण संस्थानों का तेज विस्तार
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने 2014 के बाद से देश के भीतर उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे में आए बड़े बदलावों के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में देश के भीतर विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है।
- विश्वविद्यालयों का दायरा: साल 2014 में देश भर में करीब 750 विश्वविद्यालय मौजूद थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 1,300 से भी अधिक हो चुकी है।
- कॉलेजों का नेटवर्क: देश में डिग्री कॉलेजों की कुल संख्या करीब 38,000 से बढ़कर अब 52,000 के आंकड़े को पार कर गई है।
- प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान: पिछले वर्षों में युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी व प्रबंधकीय शिक्षा मुहैया कराने के लिए कई नए आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईआईटी और एम्स स्थापित किए गए हैं।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि शैक्षणिक अवसरों का यह व्यापक विस्तार देश के युवाओं को अपनी प्रतिभा साबित करने और राष्ट्र को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे ले जाने के लिए मजबूत आधारशिला प्रदान कर रहा है।





















