झारखंड के कोडरमा जिले में स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी पर एक गंभीर आपराधिक मामले में कानून का शिकंजा कस गया है। जिले के सिविल सर्जन डॉक्टर अनिल कुमार को एक नाबालिग लड़की के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस प्रशासन ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई के तुरंत बाद डॉक्टर को स्वास्थ्य परीक्षण हेतु सदर अस्पताल पहुंचाया, जहाँ उनकी आवश्यक मेडिकल जांच करवाई गई। इस औपचारिक चिकित्सीय जांच की औपचारिकताएं पूरी होने के पश्चात पुलिस टीम उन्हें सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के लिए ले गई। यह पूरा प्रकरण पड़ोसी हजारीबाग जिले की निवासी एक नाबालिग किशोरी द्वारा दर्ज कराई गई गंभीर शिकायत से संबंधित है।
परामर्श के दौरान संपर्क और उत्पीड़न के गंभीर आरोप
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पीड़िता वर्ष 2025 के दौरान अपनी माता के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चिकित्सीय परामर्श के सिलसिले में डॉक्टर अनिल कुमार के संपर्क में आई थी। नाबालिग का आरोप है कि इसी अवधि में डॉक्टर ने उसे अपने विश्वास और झांसे में लिया और कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया। इस घटनाक्रम से आहत होकर पीड़िता ने सीधे ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज कराई और आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। इस डिजिटल शिकायत के प्रकाश में आते ही कोडरमा पुलिस महकमा तुरंत सक्रिय हो गया और मामले की विधिवत पड़ताल शुरू कर दी गई।
विशेष पुलिस टीम की छापेमारी और हिरासत
पुलिस अधीक्षक के कड़े निर्देशों के तहत मामले की तहकीकात के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था। इस विशेष टीम ने त्वरित सुराग जुटाते हुए शनिवार देर रात चंदवारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत उरवां इलाके में स्थित एक रेस्टोरेंट के नजदीक घेराबंदी कर डॉक्टर अनिल कुमार को अपनी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के फौरन बाद आरोपी अधिकारी को पूछताछ के लिए तिलैया डैम ओपी ले जाया गया, जहाँ पुलिस अधिकारियों ने उनसे घटनाक्रम को लेकर सघन पूछताछ की। साथ ही पुलिस प्रशासन ने कानून के मुताबिक पीड़िता का आधिकारिक बयान दर्ज करने की कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई।
महिला थाने में जांच और विभागीय हलचल
नाबालिग पीड़िता को आवश्यक पूछताछ और सुरक्षा के तहत कोडरमा महिला थाना लाया गया, जहाँ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और महिला थाना प्रभारी ने संयुक्त रूप से मामले के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी जुटाई। इसके समानांतर इस मामले को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष भी ले जाए जाने की बात सामने आ रही है। विस्तृत पूछताछ और प्राथमिक जांच के बाद पुलिस ने सिविल सर्जन को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। इस बड़ी गिरफ्तारी के कारण जिले के संपूर्ण स्वास्थ्य महकमे में भारी हड़कंप मच गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि इन गंभीर आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, जिसके लिए हर पहलू की सूक्ष्मता से छानबीन की जा रही है।



















