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चेन्नई पोर्ट मदुरावोयल कॉरिडोर बनेगा देश का पहला दोमंजिला एक्सप्रेसवे, प्रति किमी लागत 166.7 करोड़ रुपयेतमिलनाडु
10 अक्तू॰ 2026, 8:44 pm (1 घंटे पहले)· 0

चेन्नई पोर्ट मदुरावोयल कॉरिडोर बनेगा देश का पहला दोमंजिला एक्सप्रेसवे, प्रति किमी लागत 166.7 करोड़ रुपये

चेन्नई में 21 किलोमीटर लंबा चार लेन का दोमंजिला एलिवेटेड कॉरिडोर 3,500 करोड़ रुपये में तैयार किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक पूरा होने वाला यह ढांचा पोर्ट के भारी वाहनों और स्थानीय शहरी ट्रैफिक को अलग-अलग मंजिलों पर बांटेगा।

भारत में सड़क अवसंरचना के विस्तार के बीच तमिलनाडु में इंजीनियरिंग की एक बेहद जटिल और महंगी परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है। चेन्नई पोर्ट से मदुरावोयल तक तैयार हो रहे 21 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को देश का पहला दोमंजिला एक्सप्रेसवे माना जा रहा है। निर्माण की तकनीकी पेचीदगियों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र के कारण इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च अनुमानित है। अगर प्रति किलोमीटर लागत का हिसाब लगाया जाए, तो सड़क के केवल एक किलोमीटर हिस्से को तैयार करने में लगभग 166.7 करोड़ रुपये का व्यय हो रहा है, जो इसे देश के सबसे खर्चीले सड़क गलियारों में शामिल करता है।

दो मंजिलों में बंटेगा भारी और स्थानीय ट्रैफिक

इस पूरे कॉरिडोर को चार लेन के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसका दो स्तरीय यानी दोमंजिला स्वरूप है। परियोजना के लेआउट के तहत ऊपर की मंजिल वाली सड़क विशेष तौर पर चेन्नई पोर्ट से आने और जाने वाले भारी मालवाहक ट्रकों तथा कंटेनरों के लिए आरक्षित रहेगी। इस ऊपरी हिस्से पर साधारण शहरी वाहनों और आम मुसाफिरों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी, ताकि बंदरगाह का लॉजिस्टिक्स बिना किसी रुकावट के तेज गति से दौड़ सके। दूसरी ओर, नीचे की मंजिल वाले एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से स्थानीय शहरी ट्रैफिक के संचालन के लिए खोला जाएगा। इसके जरिए आम वाहन चालक शहर के जाम से बचते हुए तेजी से सफर कर सकेंगे।

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सात एंट्री एग्जिट प्वॉइंट और तेरह रैम्प की सुविधा

स्थानीय यात्रियों की सुविधा और शहर के विभिन्न हिस्सों से सुगम जुड़ाव के लिए दोनों मंजिलों के बीच इंटरचेंज की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है। इस एलिवेटेड मार्ग पर कुल 7 प्रवेश और निकास द्वार यानी एंट्री-एग्जिट प्वॉइंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय ट्रैफिक को नीचे वाले हिस्से पर चढ़ाने और उतारने के लिए 13 विशेष रैम्प तैयार किए जा रहे हैं। यह गलियारा चेन्नई पोर्ट के गेट नंबर 10 से शुरू होकर सीधे शहर के प्रमुख केंद्रों से होते हुए मदुरावोयल तक पहुंचेगा।

परियोजना का इतिहास और बंदरगाह विस्तार का लक्ष्य

इस महत्वाकांक्षी निर्माण योजना की रूपरेखा सबसे पहले साल 2010 में तैयार की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से साल 2016 में इस पर काम पूरी तरह बंद कर दिया गया था। लंबे इंतजार के बाद साल 2023 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस अनूठी इंजीनियरिंग डिजाइन के साथ परियोजना को दोबारा जिंदा किया। इस निर्माण कार्य को नवंबर 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह ढांचा चेन्नई पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। मौजूदा समय में चेन्नई पोर्ट की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता 5.3 करोड़ टन है, जिसे इस कॉरिडोर की मदद से साल 2047 तक बढ़ाकर 20 करोड़ टन सालाना पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव और क्षेत्रीय निवेश

चेन्नई पोर्ट का यह दोमंजिला मार्ग आगे चलकर सीधे 262 किलोमीटर लंबे चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिसका निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इन दोनों मार्गों के जुड़ने से कर्नाटक और तमिलनाडु के औद्योगिक केंद्रों से बंदरगाह तक माल ढुलाई का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के इरादे से बीते एक दशक में अकेले तमिलनाडु में करीब 60 हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया है। मौजूदा दौर में यह व्यापक प्रोजेक्ट करीब 40 हजार करोड़ रुपये का है, जिसके भविष्य में बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

चेन्नई पोर्ट मदुरावोयल एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई और अनुमानित लागत कितनी है?
यह एक्सप्रेसवे कुल 21 किलोमीटर लंबा और चार लेन का है, जिसकी निर्माण लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये अनुमानित है।
इस एक्सप्रेसवे की एक किलोमीटर सड़क बनाने पर कितना खर्च आ रहा है?
इस एलिवेटेड कॉरिडोर की एक किलोमीटर सड़क तैयार करने पर लगभग 166.7 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है।
इस दोमंजिला एक्सप्रेसवे की दोनों मंजिलों पर ट्रैफिक किस तरह चलेगा?
ऊपरी मंजिल केवल चेन्नई पोर्ट के भारी वाहनों के लिए आरक्षित रहेगी, जबकि निचली मंजिल पर स्थानीय शहरी वाहन चलेंगे।
इस परियोजना के पूरा होने की तय समयसीमा क्या है?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समयसीमा नवंबर 2027 निर्धारित की है।
कॉरिडोर पर स्थानीय वाहनों के लिए कितने एंट्री-एग्जिट और रैम्प बनाए जा रहे हैं?
इस पर कुल 7 एंट्री और एग्जिट प्वॉइंट तथा स्थानीय ट्रैफिक के लिए 13 रैम्प बनाए जा रहे हैं।
यह मार्ग किस अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा?
यह डबल डेकर कॉरिडोर करीब 262 किलोमीटर लंबे चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा।
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टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·8 मिनट पहले

चेन्नई का यह दोमंजिला एक्सप्रेसवे वाकई ट्रैफिक का बड़ा समाधान बनेगा, बशर्ते प्रोजेक्ट 2027 तक समय पर पूरा हो जाए।

Ravikash Gupta@ravikash·28 मिनट पहले

चेन्नई का यह दोमंजिला एक्सप्रेसवे ट्रैफिक और पोर्ट के माल ढुलाई दोनों के लिए बहुत राहत देगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·27 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है, पर मुझे शक है कि नवंबर 2027 तक यह पूरा हो पाएगा। इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर देर हो जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

चेन्नई पोर्ट के पास का ट्रैफ़िक मैंने ख़ुਦ झेला है, वहाँ गाड़ी चलाना किसी आज़माइश से कम नहीं। उम्मीद है इस दोमंजिला रास्ते से कुछ राहत मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·50 मिनट पहले

रोहन भाई, बंदरगाह के पास का वह जाम सचमुच बहुत बुरा है। उम्मीद है नवंबर 2027 तक यह दोमंजिला रास्ता बनने के बाद मुसाफिरों को सचमुच कुछ राहत मिल सकेगी।

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