भारत में सड़क अवसंरचना के विस्तार के बीच तमिलनाडु में इंजीनियरिंग की एक बेहद जटिल और महंगी परियोजना पर काम तेज गति से चल रहा है। चेन्नई पोर्ट से मदुरावोयल तक तैयार हो रहे 21 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर को देश का पहला दोमंजिला एक्सप्रेसवे माना जा रहा है। निर्माण की तकनीकी पेचीदगियों और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र के कारण इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3,500 करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च अनुमानित है। अगर प्रति किलोमीटर लागत का हिसाब लगाया जाए, तो सड़क के केवल एक किलोमीटर हिस्से को तैयार करने में लगभग 166.7 करोड़ रुपये का व्यय हो रहा है, जो इसे देश के सबसे खर्चीले सड़क गलियारों में शामिल करता है।
दो मंजिलों में बंटेगा भारी और स्थानीय ट्रैफिक
इस पूरे कॉरिडोर को चार लेन के रूप में डिजाइन किया जा रहा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसका दो स्तरीय यानी दोमंजिला स्वरूप है। परियोजना के लेआउट के तहत ऊपर की मंजिल वाली सड़क विशेष तौर पर चेन्नई पोर्ट से आने और जाने वाले भारी मालवाहक ट्रकों तथा कंटेनरों के लिए आरक्षित रहेगी। इस ऊपरी हिस्से पर साधारण शहरी वाहनों और आम मुसाफिरों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी, ताकि बंदरगाह का लॉजिस्टिक्स बिना किसी रुकावट के तेज गति से दौड़ सके। दूसरी ओर, नीचे की मंजिल वाले एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से स्थानीय शहरी ट्रैफिक के संचालन के लिए खोला जाएगा। इसके जरिए आम वाहन चालक शहर के जाम से बचते हुए तेजी से सफर कर सकेंगे।
सात एंट्री एग्जिट प्वॉइंट और तेरह रैम्प की सुविधा
स्थानीय यात्रियों की सुविधा और शहर के विभिन्न हिस्सों से सुगम जुड़ाव के लिए दोनों मंजिलों के बीच इंटरचेंज की मुकम्मल व्यवस्था की जा रही है। इस एलिवेटेड मार्ग पर कुल 7 प्रवेश और निकास द्वार यानी एंट्री-एग्जिट प्वॉइंट बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्थानीय ट्रैफिक को नीचे वाले हिस्से पर चढ़ाने और उतारने के लिए 13 विशेष रैम्प तैयार किए जा रहे हैं। यह गलियारा चेन्नई पोर्ट के गेट नंबर 10 से शुरू होकर सीधे शहर के प्रमुख केंद्रों से होते हुए मदुरावोयल तक पहुंचेगा।
परियोजना का इतिहास और बंदरगाह विस्तार का लक्ष्य
इस महत्वाकांक्षी निर्माण योजना की रूपरेखा सबसे पहले साल 2010 में तैयार की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से साल 2016 में इस पर काम पूरी तरह बंद कर दिया गया था। लंबे इंतजार के बाद साल 2023 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस अनूठी इंजीनियरिंग डिजाइन के साथ परियोजना को दोबारा जिंदा किया। इस निर्माण कार्य को नवंबर 2027 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह ढांचा चेन्नई पोर्ट की कार्गो हैंडलिंग क्षमता में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। मौजूदा समय में चेन्नई पोर्ट की वार्षिक हैंडलिंग क्षमता 5.3 करोड़ टन है, जिसे इस कॉरिडोर की मदद से साल 2047 तक बढ़ाकर 20 करोड़ टन सालाना पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव और क्षेत्रीय निवेश
चेन्नई पोर्ट का यह दोमंजिला मार्ग आगे चलकर सीधे 262 किलोमीटर लंबे चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा, जिसका निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इन दोनों मार्गों के जुड़ने से कर्नाटक और तमिलनाडु के औद्योगिक केंद्रों से बंदरगाह तक माल ढुलाई का समय नाटकीय रूप से घट जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के इरादे से बीते एक दशक में अकेले तमिलनाडु में करीब 60 हजार करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया है। मौजूदा दौर में यह व्यापक प्रोजेक्ट करीब 40 हजार करोड़ रुपये का है, जिसके भविष्य में बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
























