तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता से जुड़ा पारिवारिक मामला एक नए मोड़ पर आकर समाप्त हो गया है। संगीता ने कुटुंब अदालत में दाखिल की गई अपनी तलाक याचिका को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। चेंगलपट्टू के निकट स्थित अदालत में शुक्रवार को इस प्रकरण पर सुनवाई आयोजित की गई थी। सुनवाई के दौरान संगीता के रुख को देखते हुए न्यायाधीश ने बिना किसी लंबी अदालती प्रक्रिया के मामले को निरस्त करते हुए इसका पूर्ण निपटारा कर दिया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज कराया बयान
शुक्रवार को हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के समय संगीता व्यक्तिगत रूप से अदालत के कमरे में मौजूद नहीं थीं। उन्होंने दूरस्थ माध्यम का उपयोग करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की कार्यवाही में भाग लिया। सुनवाई के दौरान उन्होंने पीठ को स्पष्ट शब्दों में सूचित किया कि वह तलाक की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहती हैं और अपनी अर्जी वापस लेना चाहती हैं। अदालत ने उनके इस वक्तव्य को औपचारिक रूप से रिकॉर्ड पर लिया और कानूनी प्रक्रिया को आगे न बढ़ाते हुए याचिका खारिज कर दी।
कानूनी कार्यवाही का औपचारिक समापन
अदालत से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि संगीता द्वारा याचिका वापस लेने की इच्छा जताने के पश्चात मामले में अतिरिक्त सुनवाई की आवश्यकता नहीं बची थी। अदालत का अंतिम आदेश पूरी तरह से संगीता के प्रत्यक्ष बयान पर आधारित था। इस फैसले के साथ ही दोनों पक्षों के बीच चल रही इस तलाक याचिका से संबंधित तमाम कानूनी प्रक्रियाएं आधिकारिक तौर पर बंद हो गई हैं।
अटकलों पर विराम लेकिन वजह अस्पष्ट
पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पत्नी संगीता के निजी रिश्तों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। जब यह मामला चेंगलपट्टू की कुटुंब अदालत पहुंचा, तो सार्वजनिक जीवन और मीडिया में इसे लेकर काफी चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब याचिका वापस लिए जाने से इन सभी अटकलों पर विराम लग गया है। हालांकि, संगीता ने यह अर्जी वापस लेने का निर्णय क्यों लिया, इसके पीछे के व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों का खुलासा नहीं किया गया है।
मुख्यमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले में उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि संगीता के केवल एक स्पष्ट बयान के आधार पर ही अदालत ने मामले को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया। इस घटनाक्रम पर अब तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय या उनके प्रतिनिधियों की ओर से कोई भी सार्वजनिक बयान अथवा आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार यह प्रकरण अब पूरी तरह से निष्पादित माना जा चुका है।



















