चेन्नई स्थित एक विशेष सीबीआई अदालत ने फर्जी पहचान पत्र और जाली कागजातों के सहारे भारतीय पासपोर्ट बनवाने के हाई-प्रोफाइल मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने कुख्यात अपराधी छोटा राजन को सरकारी एजेंसियों के साथ धोखाधड़ी करने और जालसाजी का सहारा लेने का दोषी पाते हुए 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 55,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाने का भी आदेश जारी किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी की विस्तृत पड़ताल में यह साफ हुआ था कि आरोपी ने भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए विजय कदम नाम की एक पूरी तरह से बनावटी पहचान तैयार की थी। इसी फर्जी नाम का इस्तेमाल करके उसने चेन्नई स्थित रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में नया भारतीय पासपोर्ट जारी कराने के लिए आवेदन दाखिल किया था।
जाली ट्रांसफर सर्टिफिकेट और राशन कार्ड से रची गई पहचान
अदालती कार्यवाही के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों से उजागर हुआ कि छोटा राजन ने अपनी इस नई जाली पहचान को सरकारी रिकॉर्ड में असली साबित करने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था। उसने पासपोर्ट आवेदन के साथ एक फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC), एक बनावटी राशन कार्ड और पहचान से जुड़े कई अन्य जाली प्रमाणपत्र संलग्न किए थे। इन झूठे और गढ़े गए दस्तावेजों के माध्यम से उसने पासपोर्ट अधिकारियों को गुमराह किया और विजय कदम नाम का एक वैध पासपोर्ट हासिल करने में सफलता पा ली।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाकर न सिर्फ भारत सरकार और राष्ट्रीय जांच एजेंसियों को धोखा दिया, बल्कि इसी अवैध रूप से प्राप्त पासपोर्ट का उपयोग करके वह कई सालों तक बिना किसी भय के दुनिया के विभिन्न मुल्कों में घूमता रहा। इस फर्जी पासपोर्ट की आड़ में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आपराधिक गतिविधियों और गैर-कानूनी नेटवर्क को बेखौफ होकर संचालित करता रहा।
सीबीआई की दो दशक पुरानी कानूनी लड़ाई और एफआईआर की समयरेखा
यह मामला कानूनी दृष्टि से काफी लंबा और महत्वपूर्ण रहा है, जिसकी जड़ें लगभग दो दशक पहले की हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस पासपोर्ट जालसाजी के मामले में 19 मार्च 2002 को औपचारिक रूप से प्राथमिकी या एफआईआर (FIR) दर्ज की थी। इसके बाद जांच एजेंसी ने मामले की गहराई से छानबीन की, फर्जी दस्तावेजों को जब्त किया और गवाहों के बयान जुटाए। सीबीआई ने 22 जनवरी 2004 को अदालत के समक्ष ठोस और मजबूत सबूतों के साथ अपनी विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्षों तक चली लंबी अदालती सुनवाई, गवाहों की गवाहियों और दस्तावेजी सबूतों के गहन विश्लेषण के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि छोटा राजन के खिलाफ धोखाधड़ी करने, जाली रिकॉर्ड तैयार करने और फर्जी पहचान पत्रों का गलत इस्तेमाल करने के सभी आरोप पूरी तरह सच और प्रमाणित हैं। अदालत ने इन सभी अपराधों के लिए उसे कानून के तहत सख्त सजा का हकदार माना।
नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद और बढ़ती कानूनी मुश्किलें
उल्लेखनीय है कि यह कुख्यात अपराधी वर्तमान में देश की राजधानी नई दिल्ली में स्थित अति-सुरक्षित तिहाड़ जेल के भीतर बंद है। वह हत्या करने और रंगदारी वसूलने जैसे कई अन्य गंभीर तथा संगीन आपराधिक मामलों में अदालत द्वारा पहले से ही उम्रकैद यानी आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। तिहाड़ जेल में सजा काटने के दौरान ही इस पासपोर्ट धोखाधड़ी मामले की सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने अपना निर्णय सुनाया।
चेन्नई की सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल के कारावास की यह नई सजा और 55,000 रुपये का जुर्माना उसकी कानूनी स्थिति को और अधिक जटिल बना देगा। पहले से ही गंभीर अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहे अपराधी के लिए इस नए मामले में दोषी सिद्ध होना उसकी रिहाई और कानूनी राहत की सभी संभावनाओं को और भी कठिन बना देता है।



















