एकता कपूर जैसी मास्टरमाइंड शख्सियत नहीं देखी, तेजस्वी प्रकाश ने खोले मनोरंजन जगत की रानी के राजशहनाज गिल का वो भावुक गाना, जिसे सुन आज भी नम हो जाती हैं सिडनाज फैंस की आंखेंअयोध्या को दीपोत्सव से पहले मिलेगी दशरथ पथ की सौगात, 418 करोड़ से ज्यादा की लागत से तैयार हो रहा फोरलेनप्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के बेटे उमर के काफिले पर केस दर्ज, नवाबगंज टोल प्लाजा पर बैरियर तोड़ने का आरोपरामायण के ट्रेलर पर फिदा हुए नागार्जुन, रणबीर और यश की अदाओं की जमकर की प्रशंसाजब पंकज त्रिपाठी को पड़ी थीं लाठियां, कभी संजय दत्त के दीवाने थे ये दिग्गज अभिनेताराजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के नेताओं के साथ मिलकर की जवानों के लिए रक्तदान पहलविश्व आदिवासी दिवस पर राहुल गांधी का संदेश, जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर जोरनागौर के गुढ़ा जोधा में 450 साल पुरानी संत खेमदास महाराज की जीवित समाधि, आज भी अटूट है चमत्कारिक वचनों पर विश्वासअक्षय कुमार का 1994 का सुपरहिट गाना 'गोरे गोरे मुखड़े पे काला चश्मा', जिसमें कुमार सानू और अलका याज्ञनिक की आवाज ने मचाया था धमाल
तमिलनाडु में घटती जन्म दर पर चिंता, तीसरे बच्चे के लिए प्रोत्साहन योजना लाने पर हो रहा विचारतमिलनाडु
9 अग॰ 2026, 6:33 pm (9 घंटे पहले)· 0

तमिलनाडु में घटती जन्म दर पर चिंता, तीसरे बच्चे के लिए प्रोत्साहन योजना लाने पर हो रहा विचार

तमिलनाडु में कुल प्रजनन दर 1.4 से नीचे लुढ़क जाने के बाद सरकार गंभीर संकट से निपटने के लिए तीसरे बच्चे के जन्म पर इंसेंटिव देने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। राज्य में बुजुर्गों की आबादी भी तेजी से बढ़ रही है।

कभी देश में तेजी से बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए योजनाएं बनाने वाले राज्यों के सामने अब बिल्कुल उलट चुनौती खड़ी हो गई है। दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु में जन्म दर में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके चलते राज्य प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चली है कि अब दंपਤੀ को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित करने के उपायों पर विचार शुरू हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने हाल ही में सार्वजनिक तौर पर संकेत दिया है कि भविष्य में तीसरे बच्चे के जन्म पर विशेष प्रोत्साहन राशि या योजना लाने की संभावनाओं पर गौर किया जा सकता है।

यह अहम बयान स्वास्थ्य मंत्री ने ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ साउथ India की मिड-ईयर वर्कशॉप को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि तमिलनाडु का कुल प्रजनन यानी टोटल फर्टिलिटी रेट अब 1.4 के स्तर से भी नीचे जा चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में आबादी के मौजूदा स्तर और संतुलन को बनाए रखने के लिए फर्टिलिटी रेट कम से कम 2.1 होना अनिवार्य माना जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य में जितने नए बच्चों का जन्म होना चाहिए, उसकी तुलना में काफी कम बच्चे पैदा हो रहे हैं, जिससे दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ सकता है।

ये भी पढ़ें

तीसरे बच्चे को बढ़ावा देने की योजना पर विचार

घटती जन्म दर के संभावित और गंभीर परिणामों का आकलन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश की नीतियों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दंपतियों को तीसरा बच्चा पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने वाली विभिन्न योजनाओं की खबरें सामने आई हैं। इसी तर्ज पर आने वाले समय में तमिलनाडु में भी ऐसे नीतिगत कदम उठाए जाने पर विचार किया जा सकता है, ताकि जन्म दर को एक सुरक्षित स्तर तक वापस लाया जा सके।

हालांकि, स्पष्ट रूप से यह बात भी सामने आई है कि फिलहाल राज्य सरकार ने ऐसी किसी आधिकारिक योजना की घोषणा नहीं की है। मंत्री का यह बयान महज इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रशासन इस बढ़ती हुई जनसांख्यिकीय समस्या से निपटने के लिए पारंपरिक और पुरानी नीतियों से हटकर नए एवं व्यावहारिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है ताकि भविष्य के संकट से बचा जा सके।

बुजुर्गों की बढ़ती आबादी और कार्यबल पर मंडराता संकट

तमिलनाडु के नीति निर्माताओं के सामने केवल कम बच्चों के जन्म लेने की ही समस्या नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ राज्य की आबादी बेहद तेजी से उम्रदराज भी हो रही है। स्वास्थ्य मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में राज्य की कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग का है। यह अनुपात आने वाले समय में और अधिक तेजी से बढ़ सकता है।

कम जन्म दर और वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या का यह मेल राज्य की भविष्य की कार्यशील आबादी पर सीधा और प्रतिकूल असर डाल सकता है। आने वाले दशकों में श्रम बाजार में काम करने वाले लोगों की कुल संख्या में कमी आएगी, जबकि दूसरी तरफ बुजुर्गों की बढ़ती संख्या के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा पर खर्च एवं जरूरतें काफी बढ़ जाएंगी। यही मुख्य वजह है कि राज्य सरकार अब इस पूरे जनसांख्यिकीय बदलाव को एक साधारण नीतिगत मुद्दे के बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में देख रही है।

अस्पतालों में 99 फीसदी डिलीवरी, फिर भी सरकारी संस्थान पीछे

तमिलनाडु की मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था का विश्लेषण करें तो एक बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी तस्वीर सामने आती है। राज्य में कुल प्रसव का करीब 99 प्रतिशत हिस्सा अस्पतालों के भीतर यानी संस्थागत रूप से हो रहा है, जो स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की मजबूती को दर्शाता है। लेकिन इसी दौर में सरकारी अस्पतालों के भीतर होने वाले प्रसवों की हिस्सेदारी में लगातार और लगातार गिरावट दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय है।

वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान राज्य के सरकारी अस्पतालों में कुल प्रसव का लगभग 65.8 प्रतिशत हिस्सा होता था, जो अब लुढ़क कर केवल 51 प्रतिशत के आसपास रह गया है। इस गिरावट पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही इसके कारणों का पता लगाने के लिए एक व्यापक अध्ययन करवाएगी। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में अत्याधुनिक आपातकालीन प्रसूति और नवजात शिशु देखभाल जैसी तमाम बेहतरीन सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध होने के बावजूद गर्भवती महिलाओं का रुझान निजी अस्पतालों की तरफ क्यों बढ़ रहा है, इस पहेली का जवाब ढूंढना सरकार की प्राथमिकता बन गया है।

निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका और सरकारी योजनाओं का विस्तार

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में प्रसव मामलों की हिस्सेदारी में आई इस भारी कमी के पीछे निजी स्वास्थ्य संस्थानों की आक्रामक और बढ़ती हुई भूमिका एक बड़ा कारण हो सकती है। निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त मातृत्व सेवाओं तथा मुथुलक्ष्मी रेड्डी मैटरनिटी बेनिफिट स्कीम का दायरा बढ़ाकर निजी अस्पतालों तक किए गए विस्तार ने आम जनता की सरकारी अस्पतालों पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है।

समाज के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को निजी चिकित्सालयों के महंगे इलाज के भारी आर्थिक बोझ से बचाने के लिए ही राज्य सरकार ने हाल ही में थाई मामन थंगम योजना की शुरुआत की है, जिससे जरूरतमंदों को राहत मिल सके।

मेडिकल शिक्षा में सीटें बढ़ीं और पुरानी सरकारों पर निशाना

चिकित्सा शिक्षा के मोर्चे पर बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने पिछली सरकारों की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में तीन निजी मेडिकल कॉलेजों को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने के कारण सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों को बड़ा आघात लगा और सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए निर्धारित 7.5 प्रतिशत कोटे पर भी प्रतिकूल असर पड़ा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार ने नेशनल मेडिकल कमीशन के सभी कड़े नियमों और शर्तों को पूरी तरह से पूरा करते हुए इस शैक्षणिक वर्ष में तीन प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कुल 150 अतिरिक्त मेडिकल सीटें हासिल करने में सफलता पाई है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मेडिकल प्रवेश काउंसलिंग का आधिकारिक शेड्यूल और फाइनल मेरिट लिस्ट आगामी 10 अगस्त को जारी कर दी जाएगी।

निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस पर नकेल और आधार कार्ड की अनिवार्यता पर सफाई

छात्रों और अभिभावकों को राहत देते हुए सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों द्वारा तय अवधि से ज्यादा समय तक फीस वसूलने की शिकायतों पर भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। मंत्री ने जानकारी दी कि इन तमाम शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि नियमों की अवहेलना करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य मेडिकल शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और विद्यार्थियों पर से अनुचित आर्थिक दबाव को हटाना है।

इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में आने वाली गर्भवती महिलाओं को केवल आधार कार्ड न होने या ओपीडी रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी कतारों में धक्के खाने की खबरों पर भी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में इलाज पाने के लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य शर्त नहीं है और किसी भी सरकारी चिकित्सा संस्थान को केवल आधार न होने के आधार पर किसी भी मरीज का इलाज बीच में रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मरीज अपने स्मार्टफोन के माध्यम से घर बैठे ही आसानी से ओपीडी पर्ची या रसीद जनरेट कर सकते हैं, जिससे पंजीकरण काउंटरों पर लगने वाली अनावश्यक भीड़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सके।

सवाल-जवाब

तमिलनाडु में कुल प्रजनन दर (TFR) कितनी हो गई है?
तमिलनाडु का कुल प्रजनन दर (TFR) गिरकर 1.4 से भी नीचे चला गया है।
आबादी का संतुलन बनाए रखने के लिए फर्टिलिटी रेट कितना होना चाहिए?
आबादी के मौजूदा स्तर को बनाए रखने के लिए फर्टिलिटी रेट लगभग 2.1 होना जरूरी माना जाता है।
तमिलनाडु सरकार किस नई योजना पर विचार कर रही है?
राज्य सरकार घटती जन्म दर से निपटने के लिए तीसरे बच्चे के जन्म पर प्रोत्साहन देने वाली योजना पर विचार कर रही है।
तमिलनाडु में 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी का प्रतिशत कितना है?
राज्य की कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा 60 वर्ष से अधिक आयु का है।
क्या सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है?
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, इलाज के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है और इसके बिना किसी मरीज का इलाज नहीं रोका जा सकता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR