नया फ्लैट किराए पर लेने या अपना आशियाना खरीदने से पहले लोग अक्सर दीवारों के रंग, टाइल्स, बालकनी के दृश्य और पार्किंग की सुविधा को बहुत बारीकी से परखते हैं। लेकिन असली परेशानी तब सामने आती है जब घर में रहने के लिए शिफ्ट होने के बाद बालकनी में जाकर फोन पर बात करनी पड़े या फिर घर से काम करते समय वाई-फाई के सिग्नल पूरी तरह गायब हो जाएं। किसी भी घर के अंदर मोबाइल नेटवर्क की असल स्थिति क्या है, इस पर आमतौर पर कोई चर्चा नहीं होती है और जब इस बारे में बिल्डर्स या ब्रोकर से पूछा जाता है, तो वे हमेशा सब कुछ बेहतरीन होने का दावा करते हैं। इस आम समस्या का एक पुख्ता समाधान अब भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई ने ढूंढ निकाला है, जिसने एक खास डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग प्लेटफॉर्म और एक नया मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह डिजिटल सिस्टम किसी भी प्रॉपर्टी की असल डिजिटल सेहत को पूरी पारदर्शिता के साथ खरीदार या किराएदार के सामने रख देता है।
एक क्लिक पर खुलेगा नेटवर्क का कच्चा-चिट्ठा
घर के अंदर फोन पर बात करते समय कॉल ड्रॉप होगी या आवाज बिल्कुल साफ आएगी, इंटरनेट पर फाइल डाउनलोड करने की स्पीड बेहद तेज होगी या बार-बार बफरिंग की समस्या से जूझना पड़ेगा, इन सभी सवालों के जवाब अब केवल एक क्लिक पर मिल जाएंगे। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी के मुताबिक, इस नई व्यवस्था के आ जाने से आम लोग किसी भी प्रॉपर्टी को फाइनल करने से पहले ही इस बात की पूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे कि उस इमारत के अंदर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर किस स्तर का तैयार किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा और वे अपनी पसंद के घर में मिलने वाली डिजिटल सुविधाओं के बारे में पहले से ही पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे।
उपभोक्ताओं को मिलेंगी विश्वसनीय और तुलनात्मक जानकारियां
ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने इस बात पर जोर दिया कि इस रेटिंग को सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराने और प्रमाणपत्रों के सत्यापन की सुविधा मिलने से उपभोक्ताओं को बेहद भरोसेमंद और तुलनात्मक जानकारियां मिल सकेंगी। इसकी मदद से लोग ऐसे आवासों और दफ्तरों का चुनाव बहुत समझदारी के साथ कर पाएंगे जहां कॉलिंग, फाइल डाउनलोडिंग और तमाम ऑनलाइन सेवाओं की सबसे बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हों। उन्होंने आगे यह भी स्पष्ट किया कि यह नई प्रणाली उपभोक्ताओं को किसी भी संपत्ति में विकसित की गई डिजिटल कनेक्टिविटी अवसंरचना के महत्व को गहराई से समझने में मदद करेगी। साथ ही, यह प्रॉपर्टी डेवलपर्स और बड़ी प्रबंधन संस्थाओं को भी प्रेरित करेगी कि वे किसी भी निर्माण परियोजना के शुरुआती दौर से ही मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी सुविधाओं को उसमें शामिल करें।
इस नए प्लेटफॉर्म की मदद से कोई भी उपभोक्ता किसी भी रेटेड प्रॉपर्टी को उसके नाम, आधिकारिक प्रमाणपत्र संख्या यानी सर्टिफिकेट आईडी या फिर सीधे लोकेशन के आधार पर आसानी से खोज सकेगा। इतना ही नहीं, लोगों को संबंधित संपत्ति का डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित रेटिंग प्रमाणपत्र भी देखने को मिल जाएगा। इसके अलावा, प्रमाणपत्र पर दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से उसकी प्रामाणिकता को भी तुरंत परखा जा सकेगा, जिससे किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। सरकार का यह भी मानना है कि इस कदम से डिजिटल कनेक्टिविटी किसी भी संपत्ति की एक स्पष्ट और आसानी से सत्यापित की जाने वाली विशेषता बन जाएगी, जिससे खरीदारों और किराएدارों को बड़ा फायदा होगा।
पारदर्शी होगी प्रक्रिया और काम करेगा खास मोबाइल ऐप
संचार मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह अनूठा प्लेटफॉर्म प्रॉपर्टी मैनेजर्स, पंजीकृत डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग एजेंसियों और आम उपभोक्ताओं को एक साझा डिजिटल मंच पर एकसाथ लाता है, जिससे पूरी रेटिंग प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाती है। पंजीकृत डीसीआरए एजेंसियां इस प्लेटफॉर्म के जरिए रेटिंग के लिए मिलने वाले सभी आवेदनों तक आसानी से पहुंच सकेंगी, उनका मौके पर जाकर निरीक्षण कर सकेंगी, परीक्षण के परिणामों को दर्ज कर सकेंगी और सभी जरूरी दस्तावेजों का प्रबंधन करते हुए तय दिशानिर्देशों के मुताबिक पूरी रेटिंग प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर सकेंगी। इसके अलावा, ट्राई ने मैदानी आकलन यानी फील्ड असेसमेंट के लिए एक विशेष डीसीआरए मोबाइल ऐप भी उपलब्ध कराया है। इस आधुनिक ऐप के माध्यम से अधिकृत एजेंसियां भवनों के भीतर डिजिटल कनेक्टिविटी की जांच तय परीक्षण पद्धति के अनुसार कर सकती हैं और माप से जुड़ा तमाम डेटा सीधे सिस्टम में अपलोड कर देती हैं।

















