झारखंड के वनांचल और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए तकनीक के नए दरवाजे खुलने जा रहे हैं। पलामू टाइगर रिजर्व ने एक सहयोगी संस्था के साथ मिलकर जंगल और आसपास के क्षेत्रों के बच्चों और ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एक विशेष पहल शुरू की है। इस योजना के तहत आयोजित किए जा रहे एआई निर्माता प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल एआई टूल्स का उपयोग करना सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें स्थानीय चुनौतियों का तकनीकी समाधान ढूंढने और नए डिजिटल प्रोजेक्ट्स का निर्माण करने में सक्षम बनाना है।
कौशल विकास का नया चरण: हुनर से रोजगार 2.0
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने योजना के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रिजर्व द्वारा संचालित हुनर से रोजगार कार्यक्रम के पहले चरण में 600 से अधिक बच्चों और स्थानीय युवाओं को पारंपरिक तथा रोजगारपरक ट्रेडों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पूर्ववर्ती चरण की सफलता के बाद अब इसके दूसरे संस्करण यानी हुनर से रोजगार 2.0 की शुरुआत की गई है। इस नए चरण में पारंपरिक हुनर के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी कौशल प्रदान करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण परिवेश के युवाओं का जीवन स्तर सुधरे और उनके लिए भविष्य के नए रोजगार अवसर पैदा हों।
छह सप्ताह की निःशुल्क ट्रेनिंग और स्वरोजगार के अवसर
आयोजकों के अनुसार यह एआई निर्माता प्रशिक्षण शिविर पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। करीब छह सप्ताह तक चलने वाले इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में क्षेत्र के कॉलेज विद्यार्थियों के अलावा अन्य इच्छुक ग्रामीण युवा भी हिस्सा ले सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एआई की शुरुआती अवधारणाओं से लेकर इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों और प्रोजेक्ट निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। इस तकनीकी ज्ञान की मदद से युवा अपने घर या गांव में रहकर ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम तलाश सकेंगे और अपने लिए स्वरोजगार के नए रास्ते बना सकेंगे।
विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और स्थानीय समस्याओं का समाधान
सत्र के दौरान प्रतिभागियों को मार्गदर्शन देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की एक टीम तैयार की गई है। इस टीम में एआई क्षेत्र के तकनीकी विशेषज्ञ, टाइगर सेल के प्रतिनिधि और सफल स्टार्टअप्स से जुड़े मेंटर्स शामिल रहेंगे। विशेषज्ञों का मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि युवा किस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके अपने परिवेश से जुड़ी वास्तविक समस्याओं का तकनीकी हल निकाल सकें। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से कृषि सुधार, स्थानीय शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव पर्यटन, ग्रामीण रोजगार और क्षेत्रीय जरूरतों पर आधारित प्रोजेक्ट्स तैयार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बेतला में तैयार हो रही झारखंड की पहली ग्रामीण एआई लैब
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद युवाओं को अपने आइडियाज को अमलीजामा पहनाने और शोध करने के लिए एक आधुनिक मंच प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत बेतला में एक समर्पित एआई लैब स्थापित की जा रही है। पलामू टाइगर रिजर्व के अनुसार यह झारखंड की पहली ऐसी एआई लैब होगी जो किसी ग्रामीण और वन्य क्षेत्र में स्थापित की जा रही है। इस लैब का प्राथमिक उद्देश्य प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को नए प्रयोग करने, प्रोटोटाइप तैयार करने और अपने डिजिटल नवाचारों को विकसित करने की पूरी सुविधा देना है।
22 अगस्त को बेतला एनआईसी में काउंसलिंग और पंजीकरण
इस प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत के लिए 22 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे बेतला राष्ट्रीय उद्यान स्थित एनआईसी केंद्र में एक खुली काउंसलिंग सह परिचय सत्र का आयोजन रखा गया है। इस सत्र में एआई विशेषज्ञ उपस्थित युवाओं को पाठ्यक्रम की रूपरेखा, उपयोगिता और करियर संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। काउंसलिंग सत्र के तुरंत बाद इच्छुक प्रतिभागियों का ऑन-द-स्पॉट पंजीकरण किया जाएगा, जिसके बाद छह सप्ताह की नियमित ट्रेनिंग शुरू कर दी जाएगी। पलामू टाइगर रिजर्व की यह पहल ग्रामीण युवाओं को आधुनिक डिजिटल युग से जोड़ने और उन्हें एआई क्रिएटर के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।



















