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सड़क पर जलभराव से लेकर मौसम के मिजाज तक, धनंजय संत का वेकास्ट सिस्टम देगा सटीक जानकारीतकनीक
23 सित॰ 2026, 9:43 am (1 घंटे पहले)· 0

सड़क पर जलभराव से लेकर मौसम के मिजाज तक, धनंजय संत का वेकास्ट सिस्टम देगा सटीक जानकारी

एमएस यूनिवर्सिटी के पूर्व भूविज्ञान प्रोफेसर धनंजय संत ने वेकास्ट नाम का स्मार्ट वेदर प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो बारिश के साथ-साथ यह भी बताएगा कि किस सड़क या चौराहे पर पानी भरेगा।

मानसून के दिनों में या अचानक बदलते मौसम में आम शहरी जिंदगी कई तरह की उलझनों से घिर जाती है। दफ्तर या बाजार निकलने की तैयारी कर रहे लोगों को अक्सर यह चिंता सताती है कि आगे मुख्य मार्गों पर जलभराव तो नहीं होगा, कहीं गाड़ियां पानी में फंसकर जाम का शिकार न हो जाएं, या फिर पैदल चलने वाले राहगीर चौराहे को पार कर भी पाएंगे या नहीं। वहीं घरों में मौजूद लोग इस पशोपेश में रहते हैं कि बालकनी में सूखने के लिए डाले गए कपड़े बारिश में भीगकर खराब तो नहीं होंगे। ऐसे तमाम बुनियादी सवालों और दैनिक चिंताओं को ध्यान में रखकर अब स्थानीय स्तर पर असर बताने वाली मौसम निगरानी तकनीक सामने आई है, जिससे लोग अपनी दिनचर्या और यात्रा पहले से तय कर सकेंगे।

मोहल्ले और सड़क के स्तर पर असर बताएगा स्मार्ट प्लेटफॉर्म

आमतौर पर जो मौसम पूर्वानुमान जारी किए जाते हैं, वे पूरे शहर या एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र के लिए बारिश की सामान्य संभावना जताते हैं। हालांकि इस पारंपरिक व्यवस्था से यह पता लगाना मुश्किल रहता है कि किसी खास कॉलोनी, गली या सड़क पर स्थिति क्या बनेगी। इस कमी को दूर करने के लिए वड़ोदरा निवासी और एमएस यूनिवर्सिटी के पूर्व भूविज्ञान प्रोफेसर धनंजय संत ने वेकास्ट नाम का एक स्मार्ट सिस्टम विकसित किया है। यह प्लेटफॉर्म सिर्फ बादलों के बरसने की जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि जमीन पर उस बारिश का वास्तविक प्रभाव क्या होने जा रहा है।

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स्थानीय बनावट और जल निकासी के आंकड़ों से पहचान

वेकास्ट की तकनीकी कार्यप्रणाली किसी इलाके की भौगोलिक बनावट, बारिश के लाइव आंकड़ों और वहां मौजूद ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता पर आधारित है। इन तीनों पहलुओं का संयुक्त विश्लेषण करके यह सिस्टम उन सड़कों, चौराहों और निचले हिस्सों को पहले ही चिन्हित कर लेता है, जहां पानी जमा होने की आशंका सबसे अधिक रहती है। इस जानकारी की मदद से नागरिक अपने रास्ते बदलकर सुरक्षित मार्गों का चयन कर सकते हैं और सफर के दौरान अनावश्यक परेशानियों से बच सकते हैं।

मौसम के प्रभाव को समझना है मुख्य उद्देश्य

धनंजय संत वर्तमान में बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज में एडजंक्ट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। प्रोफेसर संत के मुताबिक सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बारिश होगी या नहीं, बल्कि असल सवाल यह है कि जिस जगह कोई व्यक्ति खड़ा है, उस जगह पर मौसम का क्या प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि वेकास्ट जैसे डिजिटल टूल्स शहरों के उन संवेदनशील हिस्सों और नागरिक खतरों को सामने लाते हैं, जो बार-बार जलमग्न होते हैं। जब निचले इलाकों और खराब निकासी वाली सड़कों की अग्रिम चेतावनी मिल जाती है, तो लोग अपनी आवाजाही को बहुत बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर पाते हैं।

बदलते क्लाइमेट पैटर्न और अचानक तेज बरसात की चुनौती

मौजूदा दौर में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज काफी अप्रत्याशित हो गया है। बहुत कम समय में भारी बारिश होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर यह होता है कि शहर की सड़कें, अंडरपास और ढलान वाले इलाके देखते ही देखते पानी में डूब जाते हैं। जहां पारंपरिक व्यवस्था केवल बड़े इलाके का मोटा अनुमान देती है, वहीं यह नया हाइपरलोकल सिस्टम यह स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति के घर, रूट या दफ्तर के आसपास कितना पानी जमा हो सकता है और किस मोहल्ले में किस समय बारिश दस्तक देगी।

प्रशासन और आम जनता दोनों को मिलेगी राहत

इस तरह के स्मार्ट पूर्वानुमान मॉडल का लाभ केवल राहगीरों और वाहन चालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन के लिए भी यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। यदि बारिश शुरू होने से पहले ही जलभराव वाले संभावित हॉटस्पॉट की सटीक सूची सामने हो, तो सफाई कर्मचारियों की तैनाती, नालों की सफाई और ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था समय रहते की जा सकती है। इसके साथ ही आम नागरिक भी यह फैसला आसानी से ले पाते हैं कि किस वक्त घर पर ठहरना उचित रहेगा और कब सुरक्षित तरीके से सड़क पर निकला जा सकता है।

सवाल-जवाब

वेकास्ट सिस्टम को किसने विकसित किया है?
वेकास्ट को एमएस यूनिवर्सिटी के पूर्व भूविज्ञान प्रोफेसर धनंजय संत ने विकसित किया है, जो वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज बेंगलुरु में एडजंक्ट प्रोफेसर हैं।
वेकास्ट सामान्य मौसम पूर्वानुमान से किस तरह अलग है?
यह सिर्फ बारिश की संभावना बताने के बजाय इलाके की बनावट और ड्रेनेज क्षमता के आधार पर यह बताता है कि किस खास सड़क या चौराहे पर पानी भरेगा।
यह प्लेटफॉर्म जलभराव वाले इलाकों की पहचान कैसे करता है?
यह तकनीक किसी भी क्षेत्र की भौगोलिक ढलान, बारिश के आंकड़ों और वहां के जल निकासी नेटवर्क की जानकारी का विश्लेषण करके जलभराव के हॉटस्पॉट तय करती है।
वेकास्ट से नगर निगम और प्रशासन को क्या फायदा होगा?
जलभराव वाले संवेदनशील चौराहों और निचले इलाकों की पहले से जानकारी मिलने पर प्रशासन समय रहते नालों की सफाई, जल निकासी और ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर कर सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Michael Anderson@michael-anderson·1 घंटे पहले

शहरों में थोड़ी सी बारिश से जलभराव होना अमेरिका के कई इलाकों जैसे मियामी या न्यूयार्क में भी बड़ी समस्या बन गया है। इस तरह का लोकल ऐप वहां भी कम्यूटरों की बड़ी मदद कर सकता है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

माइकल, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है! पिछले साल मुंबई में शूटिंग के दौरान मेरी कैब भी ऐसे ही एक चौराहे पर घंटों पानी में फंसी रह गई थी, तब ऐसा कोई ऐप होता तो बहुत राहत मिलती।

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