लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर एक बड़ी तकनीकी और डिजिटल घटना सामने आई है जिसके तहत यह एप्लीकेशन ऐप्पल के ऐप स्टोर से पूरी तरह हट गई है। इस बदलाव की वजह से अब नए ग्राहकों को अपने ऐप्पल डिवाइस पर इस सर्विस को प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों के उपभोक्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह शिकायत दर्ज कराई है कि तमाम कोशिशों और बार-बार खोजबीन करने के बावजूद उन्हें यह सॉफ्टवेयर ऐप स्टोर पर नहीं मिल रहा है। इस स्थिति ने डिजिटल दुनिया में कई तरह के कयासों को जन्म दे दिया है क्योंकि दोनों ही प्रमुख पक्षों यानी टेक दिग्गज ऐप्पल और मैसेजिंग ऐप के प्रबंधन की तरफ से इस पर कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
हालांकि जिन उपभोक्ताओं के पास यह ऐप पहले से ही उनके आईफोन या आईपैड में डाउनलोड किया हुआ मौजूद है, वे लोग इसे बिना किसी रुकावट के लगातार चला रहे हैं। यह तकनीकी और उपलब्धता से जुड़ी समस्या मुख्य रूप से उन नए ग्राहकों के सामने आई है जो इस संचार माध्यम को अपनी डिवाइस पर पहली बार स्थापित करना चाहते थे। अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस लोकप्रिय सॉफ्टवेयर को अचानक हटाए जाने के पीछे कोई कानूनी निर्देश, डिजिटल सुरक्षा संबंधी चिंताएं या फिर नियमों का उल्लंघन जैसी कोई वजह शामिल है या नहीं।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में इसके संस्थापक पावेल डुरोव और उनकी कंपनी की विधिक चुनौतियां भी हैं जो पहले से ही कई राष्ट्रों की जांच एजेंसियों के रडार पर बनी हुई हैं। हाल ही में रूसी अधिकारियों ने पावेल डुरोव पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा था। रूसी सुरक्षा एजेंसी एफएसबी का यह भी आरोप है कि यूक्रेन की खुफिया इकाइयां इस माध्यम का उपयोग करके वहां के युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों और तोड़फोड़ के कृत्यों के लिए उकसा रही थीं।
सुरक्षा एजेंसी की ओर से यह भी सामने आया कि दैविनचिक या लियो नाम के एक चैटबॉट का दुरुपयोग भोले-भाले नागरिकों को अपने जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा था। इस प्रक्रिया में महिलाओं की फर्जी पहचान का सहारा लेकर युवाओं से संपर्क साधा जाता था और उन्हें रेलवे स्टेशनों, बिजली घरों, संचार तंत्र और बैंकिंग संस्थानों जैसी संवेदनशील जगहों को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जाता था। जांच एजेंसियों के आंकड़ों के हवाले से यह भी बताया गया कि बीते एक साल के भीतर बारह से बाईस वर्ष की उम्र के छियालीस ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया है जिन पर इस संचार माध्यम के जरिए आतंकवाद या आपराधिक कृत्यों के लिए भर्ती किए जाने का संदेह है।
इन गंभीर आरोपों के बीच रूसी सुरक्षा तंत्र ने यह भी दावा किया कि पावेल डुरोव का नाम अंतरराष्ट्रीय वांटेड सूची में शामिल कर लिया गया है, हालांकि उन्हें पकड़ने के लिए भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में अभी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इन तमाम कानूनी और प्रशासनिक शिकंजों के जवाब में पावेल डुरोव ने हमेशा से सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका यह कहना रहा है कि उनकी यह कंपनी हमेशा से गैरकानूनी सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती है, कानून प्रवर्तन एजेंसियों का पूरा सहयोग करती है और इसके साथ ही अपने उपभोक्ताओं की निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रूस छोड़ने के बाद इस उद्यमी ने संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस की नागरिकता हासिल कर ली थी और वर्ष 2024 के दौरान उन्हें फ्रांस में भी हिरासत में लिया गया था। उस समय उन पर यह आरोप मढ़ा गया था कि उनका यह प्लेटफॉर्म आपराधिक मामलों की जांच में पर्याप्त मदद नहीं कर रहा है, हालांकि बाद में जांच की प्रक्रिया के दौरान उन्हें देश से बाहर जाने की अनुमति दे दी गई थी।
पिछले कुछ समय से यह मैसेजिंग ऐप सामग्री के नियमन, राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल गोपनीयता जैसे संवेदनशील विषयों को लेकर लगातार विवादों के घेरे में बना हुआ है। कुछ दिन पहले ही ऑस्ट्रेलिया की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी नियामक संस्था ने भी इस कंपनी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। उस एजेंसी का यह तर्क था कि इस प्लेटफॉर्म ने अपने यहां से हिंसक सामग्री को तय समय सीमा के भीतर नहीं हटाया। हालांकि इन सभी आलोचनाओं का खंडन करते हुए कंपनी ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी थी कि उसने इस वर्ष अब तक आतंकवाद से जुड़े डेढ़ लाख से अधिक समूहों और समुदायों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।


















