विंबलडन के सेंटर कोर्ट पर बुधवार को एक ऐसा मुकाबला देखने को मिला जिसने दर्शकों की सांसें थाम दीं। बारबोरा करेजिकोवा ने फ्रेंच ओपन चैंपियन और पांचवीं वरीयता प्राप्त मीरा आंद्रीवा को 4-6 7-5 6-4 से हराया। यह जीत लगभग तीन घंटे तक चले थकाऊ मुकाबले के बाद मिली और मैच खत्म होने के बाद करेजिकोवा ने इसे अपनी नन्हीं भांजी के नाम कर दिया, जो घर पर चिकनपॉक्स से जूझते हुए यह मैच देख रही थी।
भांजी के नाम की गई भावुक जीत
करेजिकोवा, जिन्होंने 2024 में विंबलडन की महिला एकल ट्रॉफी अपने नाम की थी, ने सेंटर कोर्ट को "दुनिया का सबसे बेहतरीन कोर्ट" बताया। तीस साल की इस चेक खिलाड़ी ने बताया कि उनकी छोटी भांजी खुद टेनिस खेलती है और उसे यह खेल बेहद पसंद है, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि वह यह मुकाबला जरूर देख रही होगी। करेजिकोवा के मुताबिक उनकी भांजी को चिकनपॉक्स हुआ है, जो उसे किंडरगार्टन से उसके भाई को हुआ और फिर वहीं से भांजी तक पहुंचा। करेजिकोवा को उम्मीद थी कि उनके भाई ने बच्चों को यह मैच देखने दिया होगा। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी भांजी को उन पर गर्व हो और यह जीत उसे टेनिस के साथ-साथ जिंदगी में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे।
छह मैच पॉइंट गंवाने के बाद भी नहीं टूटा हौसला
मुकाबला जितना रोमांचक था, उतना ही करेजिकोवा के लिए दिल दहलाने वाला भी रहा। निर्णायक सेट में 5-3 की बढ़त के बावजूद करेजिकोवा ने लगातार छह मैच पॉइंट गंवा दिए। ऐसा लग रहा था कि जीत उनके हाथ से फिसल सकती है, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और अगले ही गेम में मुकाबला अपने नाम कर लिया, जब आंद्रीवा भावनाओं पर काबू नहीं रख पाईं।
चोटों और निजी उतार-चढ़ाव से जूझती चैंपियन की वापसी
2024 में ऑल इंग्लैंड क्लब में खिताब जीतने के बाद से करेजिकोवा को कई चोटों का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वह रैंकिंग में भी नीचे खिसक गई थीं। इस सीजन में उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन और फ्रेंच ओपन के पहले ही राउंड में हार का सामना करना पड़ा था। मौजूदा समय में विश्व रैंकिंग में 38वें स्थान पर मौजूद करेजिकोवा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने चोटों के साथ-साथ निजी जिंदगी में भी कई मुश्किलें झेली हैं। उन्होंने माना कि इन सब भावनाओं से गुजरते हुए मैदान पर वापसी करना आसान नहीं था, इसलिए यह जीत उनके लिए बेहद खास मायने रखती है।
हार के बाद टूट गईं आंद्रीवा
जहां करेजिकोवा मुस्कुराते हुए इस जीत का जश्न मना रही थीं, वहीं 19 साल की रूसी खिलाड़ी आंद्रीवा गुस्से में अपना रैकेट फेंकते हुए अपनी टीम की तरफ "आई क्विट" चिल्लाते हुए कोर्ट से जल्दी-जल्दी बाहर निकल गईं। मुकाबले के दौरान भी वह कई बार रैकेट पटकने की धमकी दे चुकी थीं। हार के कुछ ही मिनट बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे उनके प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो वह रो पड़ीं। यह पूछे जाने पर कि इस हार से उबरने में उन्हें कितना समय लगेगा, आंद्रीवा ने कहा कि उन्हें "कुछ दिन" चाहिए होंगे, इतना कहते-कहते उनकी आवाज भर्रा गई। कुछ पल रुकने के बाद उन्होंने आगे कहा कि इसमें शायद कुछ दिन लगेंगे और फिर वह हार्ड कोर्ट सीजन की तैयारी के लिए अभ्यास पर लौट जाएंगी।
ओसाका का फिर छाया अनोखा फैशन अंदाज
विंबलडन में इस बार खेल के साथ-साथ फैशन की भी खूब चर्चा हो रही है और इसकी बड़ी वजह हैं चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन नाओमी ओसाका। अपने पहले मैच में वह ऑल इंग्लैंड क्लब में पूरी तरह सफेद रंग के भव्य किमोनो में पहुंची थीं, जो टूर्नामेंट के सख्त ड्रेस कोड के मुताबिक था। बुधवार को दूसरे मैच के लिए मैदान पर उतरते समय उन्होंने अपने अंदाज में थोड़ा बदलाव किया। इस बार उन्होंने फूलों वाली छपाई वाली सफेद जैकेट पहनी, जिसके साथ लंबा ट्रेन जुड़ा था और उसे कमर पर एक बड़े सजावटी बेल्ट यानी ओबी से बांधा गया था, जिसे परंपरागत रूप से किमोनो के साथ पहना जाता है। लॉकर रूम से कोर्ट नंबर दो तक जाते समय ओसाका का यह अंदाज देखकर दर्शक और फोटोग्राफर ठिठक कर रह गए।
इसके करीब एक घंटे बाद ही ओसाका ने रूस की अनास्तासिया गासानोवा को 6-3 6-2 से हराकर तीसरे राउंड में जगह बनाई। इसी के साथ उन्होंने विंबलडन में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी कर ली।
हाराजुकु से मिली फैशन की प्रेरणा
28 साल की ओसाका, जो कभी दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी रह चुकी हैं, जापान में जन्मीं और उनके पिता हैती के तथा मां जापान की हैं। उनका ज्यादातर बचपन अमेरिका के फ्लोरिडा में बीता। उन्होंने बताया कि उनकी प्रेरणा कुछ भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि एक बार जब वह जापान गई थीं तो टोक्यो के मशहूर फैशन इलाके हाराजुकु में उन्होंने देखा कि किस तरह लोग अपने कपड़ों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करते हैं। यह उन्हें बेहद खूबसूरत और रंगीन लगा और यही अनुभव उनके फैशन प्रयोगों में झलकता है। ओसाका ने कहा कि कपड़ों को लेकर उनकी कोई तय योजना नहीं होती, वह मानती हैं कि कुछ नया आजमाना और उसमें असफल हो जाना भी ठीक है, लेकिन वह कोशिश जरूर करना चाहती हैं।
ओसाका और साबालेंका के लिए आगे की चुनौती
तीसरे राउंड में ओसाका का सामना रूस में जन्मीं ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी दारिया कासाटकिना से होगा, जबकि चौथे राउंड में उनकी भिड़ंत मौजूदा विश्व नंबर एक आरिना साबालेंका से हो सकती है।
साबालेंका और नन्ही फैन का प्यारा पल
साबालेंका ने भी तीसरे राउंड में जगह बनाई। उन्होंने मैककार्टनी केस्लर को 6-1 7-6 (11-9) से हराया। मुकाबला जीतने के तुरंत बाद साबालेंका ने कोर्ट वन पर अपना फोन निकालकर एक नन्ही बच्ची के साथ तस्वीर खिंचवाई, जिसके बाएं हाथ पर बिल्कुल साबालेंका जैसा ही टाइगर टैटू बना हुआ था। साबालेंका पहले भी बता चुकी हैं कि यह टैटू टेनिस खेलते समय उनके आक्रामक रवैये को दर्शाता है। बीबीसी स्पोर्ट से बातचीत में साबालेंका ने कहा कि यह पल बेहद प्यारा था और बच्ची ने बताया कि उसका टैटू भी बिल्कुल वैसा ही है। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को अपनी नकल करते, अपने खेल को देखते और सराहते देखना उनके लिए बेहद प्रेरणादायक अनुभव है।
अब तीसरे राउंड में साबालेंका का सामना फ्रेंच ओपन की पूर्व चैंपियन येलेना ओस्तापेंको से होगा। लातविया की ओस्तापेंको ने क्रोएशिया की एंटोनिया रुजिच को 6-2 6-0 से हराकर यह मुकाबला तय किया।













