चीन में लगातार टेनिस मुकाबले खेल रहे दिग्गज खिलाड़ी नोवाक जोकोविच का सफर शंघाई मास्टर्स में अप्रत्याशित रूप से थम गया है। बीजिंग में आयोजित चाइना ओपन का खिताब जीतने के महज तीन दिन बाद, सर्बियाई खिलाड़ी को दूसरे दौर के कड़े मुकाबले में पोलैंड के ह्यूबर्ट हर्काज के हाथों 6-4, 6-3 से शिकस्त झेलनी पड़ी। इस टूर्नामेंट में 10वीं वरीयता प्राप्त 39 वर्षीय जोकोविच को पहले दौर में बाई मिली थी, लेकिन दूसरे दौर में वह अपनी लय बरकरार नहीं रख सके। 87 मिनट तक चले इस मुकाबले में हर्काज की दमदार सर्विस के आगे जोकोविच बेबस नजर आए।
नौ मुकाबलों में पहली बार हर्काज ने दर्ज की जीत
ह्यूबर्ट हर्काज के खिलाफ नोवाक जोकोविच का पुराना रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा था, लेकिन इस बार पोलिश खिलाड़ी ने इतिहास पलट दिया। अपने करियर की नौ आमने-सामने की भिड़ंतों में हर्काज ने जोकोविच के खिलाफ यह पहली जीत हासिल की है। साल 2023 में शंघाई में चैंपियन रह चुके और वर्तमान में विश्व रैंकिंग में 34वें स्थान पर काबिज हर्काज ने दोनों सेटों में सटीक समय पर सर्विस ब्रेक हासिल किए। जोकोविच पिछले 10 दिनों के भीतर अपना छठा मुकाबला खेल रहे थे, जिसका असर कोर्ट पर उनकी शारीरिक सक्रियता और मूवमेंट पर साफ दिखाई दिया।
शानदार जीत दर्ज करने के बाद ह्यूबर्ट हर्काज ने इस लम्हे को बेहद खास बताया। हर्काज ने कहा, "यह एक विशेष रात है। मैं लगभग सात वर्षों से नोवाक के खिलाफ खेल रहा हूं। पहले मुझे सफलता नहीं मिली थी, लेकिन वह इतने वर्षों से एक महान चैंपियन रहे हैं। वह अभी बीजिंग जीतकर आए हैं, इसलिए उनके खिलाफ खेलना बेहद कठिन चुनौती थी, मगर ऐसे दिग्गज खिलाड़ी के साथ कोर्ट साझा करना मेरे लिए सम्मान की बात है।"
बीजिंग में 102वां खिताब और शंघाई में सर्विस ब्रेक की मार
पुरुष एकल में रिकॉर्ड 24 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता जोकोविच के लिए पिछला सप्ताह ऐतिहासिक रहा था। बीजिंग में फाइनल के दौरान एलेक्स डी मिनौर के चोटिल होकर हटने के बाद जोकोविच ने 11 महीने का सूखा समाप्त करते हुए अपने करियर का 102वां एकल खिताब जीता था। बीजिंग की खिताबी जीत के साथ ही जोकोविच ने लगातार 21वें वर्ष टूर-लेवल एकल खिताब जीतने का अनोखा कीर्तिमान स्थापित किया, जहां उनका लगातार 34 मैच जीतने का क्रम बना हुआ है।
जनवरी में ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में कार्लोस अल्काराज के खिलाफ मिली हार के बाद बीजिंग फाइनल इस साल जोकोविच का केवल दूसरा फाइनल था। बीजिंग के सफर में जोकोविच ने विश्व नंबर दो अलेक्जेंडर ज्वेरेव को मात दी थी और तीसरी वरीयता प्राप्त डेनियल मेदवेदेव के खिलाफ एक सेट तथा एक ब्रेक से आगे चल रहे थे, जब रूसी खिलाड़ी को डिफॉल्ट घोषित कर दिया गया था। हालांकि, बीजिंग की इस कड़ी मेहनत के बाद शंघाई में हर्काज के खिलाफ दोनों सेटों में एक-एक सर्विस गंवाना जोकोविच को बहुत भारी पड़ गया।
ट्यूरिन में होने वाले एटीपी फाइनल्स की राह हुई चुनौतीपूर्ण
बीजिंग में ट्रॉफी उठाने से जोकोविच की सीजन के अंत में होने वाले प्रतिष्ठित एटीपी फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीदों को काफी मजबूती मिली थी। हालांकि, शंघाई में शुरुआती चरण में ही बाहर होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। ट्यूरिन की रेस में जोकोविच फिलहाल नौवें स्थान पर हैं। शीर्ष आठ खिलाड़ियों में जगह बनाकर सीजन के अंतिम टूर्नामेंट का टिकट हासिल करने के लिए अब उन्हें नवंबर में होने वाले पेरिस मास्टर्स में असाधारण और मजबूत प्रदर्शन करना होगा।
आर्थर फेरी और कारेन खाचानोव के बीच तीन घंटे से अधिक का संघर्ष
शंघाई मास्टर्स के एक अन्य कड़े मुकाबले में ग्रेट ब्रिटेन के युवा खिलाड़ी आर्थर फेरी को पूर्व शीर्ष-10 खिलाड़ी कारेन खाचानोव के हाथों रोमांचक हार का सामना करना पड़ा। इस वर्ष विंबलडन के सेमीफाइनल तक पहुंचकर सभी को चौंकाने वाले फेरी ने खाचानोव को हर अंक के लिए कड़ी टक्कर दी। साढ़े तीन घंटे तक चले इस मैराथन मैच में खाचानोव ने तीनों सेट टाई-ब्रेकर में खींचते हुए 7-6 (8-6), 6-7 (5-7), 7-6 (7-2) से बाजी अपने नाम की।



















