बीजिंग के टेनिस कोर्ट पर नोवाक जोकोविच ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए चीन ओपन का पुरुष एकल खिताब जीत लिया है। खिताबी भिड़ंत बेहद नाटकीय मोड़ पर समाप्त हुई, जब उनके ऑस्ट्रेलियाई प्रतिद्वंद्वी एलेक्स डी मिनौर चोट के कारण मैच बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो गए। इस खिताबी जीत के साथ ही सर्बियाई दिग्गज ने बीजिंग में सातवीं बार ट्रॉफी उठाने का रिकॉर्ड बनाया और अपने करियर के कुल एकल खिताबों की संख्या को 102 तक पहुंचा दिया। अब वह पुरुष टेनिस इतिहास में सबसे ज्यादा खिताब जीतने वाले रोजर फेडरर के 103 टाइटल्स के विशाल आंकड़े से महज एक कदम पीछे हैं।
टाईब्रेक के रोमांच के बाद चोट ने रोका मुकाबला
टूर्नामेंट का यह निर्णायक मुकाबला शुरुआत से ही बेहद कड़ा और दोनों तरफ से तीखे प्रहारों से भरा रहा। पांचवीं वरीयता प्राप्त ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एलेक्स डी मिनौर ने दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी के खिलाफ शुरुआती पलों से ही आक्रामक रुख अपनाया। डी मिनौर ने बेसलाइन से जोरदार खेल दिखाते हुए पहले सेट में कुल 11 विनर्स जड़े, जबकि दूसरी ओर जोकोविच के खाते में इस दौरान केवल 3 विनर्स ही दर्ज हो सके। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने अपनी सर्विस गेम पर दबाव बनाए रखा और दो अहम ब्रेक पॉइंट बचाकर पहले सेट को टाईब्रेक तक खींचा।
टाईब्रेक के दबाव भरे लम्हों में जोकोविच का वर्षों पुराना अनुभव सामने आया। डी मिनौर ने कुछ अनावश्यक गलतियां कीं, जिनका भरपूर फायदा उठाते हुए जोकोविच ने टाईब्रेक को 7-3 से अपने नाम कर लिया और पहला सेट 7-6 से जीत लिया। हालांकि, दूसरे सेट के पहले ही गेम में डी मिनौर ने जोकोविच की सर्विस तोड़ी और 1-0 की बढ़त बना ली, लेकिन इसी मोड़ पर उनकी शारीरिक तकलीफ असहनीय हो गई। ग्रोइन की समस्या के चलते उन्होंने आगे खेलने में असमर्थता जताई और मैच को वहीं रोकना पड़ा।
चोटिल डी मिनौर की निराशा और माफी
पहला सेट खत्म होते ही दोनों खिलाड़ियों को मेडिकल सहायता लेनी पड़ी थी, जिससे साफ पता चल रहा था कि कोर्ट पर परिस्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण थीं। डी मिनौर अपनी बाईं जांघ पर भारी पट्टी बांधकर कोर्ट पर उतरे थे, लेकिन दर्द के कारण उनकी गति पूरी तरह प्रभावित हो रही थी। आखिरकार मैच से हटने का कठिन फैसला लेने के बाद ट्रॉफी वितरण समारोह में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बेहद भावुक और निराश नजर आए। उन्होंने कोर्ट पर मौजूद दर्शकों से माफी मांगी और कहा कि वह किसी भी हाल में फाइनल का ऐसा अंत नहीं चाहते थे। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि वह पूरी तरह फिट होकर अगले साल इस टूर्नामेंट में दोबारा हिस्सा लेने जरूर लौटेंगे। डी मिनौर इस साल फरवरी में रॉटरडैम में खिताब जीत चुके थे और बीजिंग में अपने सीजन की दूसरी ट्रॉफी हासिल करने का सपना देख रहे थे।
शीर्ष खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए फाइनल तक का सफर
चीन ओपन में इस बार जोकोविच की खिताबी राह बेहद कठिन मानी जा रही थी, क्योंकि उन्होंने लगातार तीन मैचों में शीर्ष 10 में शामिल खिलाड़ियों को धूल चटाई। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जोकोविच ने यूएस ओपन चैंपियन एलेक्स ज्वेरेव को सीधे सेटों के कड़े संघर्ष में मात दी थी। इसके बाद सेमीफाइनल में उनका सामना रूस के दानिल मेदवेदेव से हुआ। वह मैच भी अप्रत्याशित घटनाक्रम के साथ खत्म हुआ था, जब मेदवेदेव को एक शॉट के दौरान दर्शक को गेंद लग जाने की वजह से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
दूसरी तरफ एलेक्स डी मिनौर का सफर भी कम नाटकीय नहीं रहा। उन्होंने सेमीफाइनल में पोलैंड के हूबर्ट हुरकाच का सामना किया था, जहां हुरकाच भी चोट के कारण रिटायर होकर मैच से बाहर हो गए थे। इस तरह टूर्नामेंट के अंतिम दौर में चोटों और आकस्मिक घटनाओं ने कई मैचों के नतीजों पर असर डाला, लेकिन जोकोविच ने हर दौर में अपना संयम बनाए रखा।
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ लगातार 21वें साल का कारनामा
इस खिताबी जीत के बाद चीन ओपन में जोकोविच का अजेय रिकॉर्ड बढ़कर 34-0 हो गया है, यानी बीजिंग के इस मुख्य ड्रॉ में उन्हें अब तक किसी भी मुकाबले में हार का मुंह नहीं देखना पड़ा है। इसके साथ ही टेनिस इतिहास का एक और दुर्लभ आंकड़ा उनके नाम दर्ज हो गया है। यह लगातार 21वां ऐसा कैलेंडर वर्ष है, जिसमें जोकोविच ने कम से कम एक टूर खिताब जरूर जीता है। दो दशकों से अधिक समय तक लगातार ट्रॉफी जीतने का यह सिलसिला आधुनिक खेल जगत में शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और खेल के प्रति बेमिसाल निष्ठा को दर्शाता है।
ऑल-टाइम रिकॉर्ड्स की दहलीज पर जोकोविच
मौजूदा सीजन में जोकोविच इससे पहले केवल ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में पहुंचे थे, जहां उन्हें कार्लोस अल्कराज के खिलाफ शिकस्त झेलनी पड़ी थी। बीजिंग की यह जीत उनके आत्मविश्वास के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बनकर आई है। ओपन एरा में सबसे ज्यादा पुरुष एकल खिताब जीतने का सर्वकालिक रिकॉर्ड जिमी कॉनर्स के नाम है, जिन्होंने अपने करियर में 109 ट्रॉफियां जीती थीं। जोकोविच अब कॉनर्स से सात खिताब दूर हैं, जबकि रोजर फेडरर के 103 टाइटल्स के रिकॉर्ड को छूने के लिए उन्हें अब सिर्फ एक और खिताबी जीत की दरकार है। कोर्ट पर उनकी मौजूदा लय और भूख को देखते हुए यह साफ है कि टेनिस के इतिहास में सबसे सुनहरे पन्नों को दोबारा लिखने का उनका यह सफर अभी रुकने वाला नहीं है।


















