हवाई अड्डों पर प्रायः सामान्य चहल-पहल देखने को मिलती है, परंतु कभी-कभी कुछ दृश्य ऐसे होते हैं जो हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। ऐसा ही एक वाकया तब देखने को मिला जब पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की नजर हवाई अड्डे पर एक ऐसे यात्री पर पड़ी जिसकी बांह पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकृति बनी हुई थी। पहली नजर में यह कोई प्रिंटेड कपड़ा महसूस हुआ, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि यह बांह पर उकेरा गया एक पक्का टैटू था। उस नागरिक ने कंधे और आस्तीन पर सैकड़ों सुइयों की तीखी पीड़ा सहकर प्रधानमंत्री की तस्वीर बनवा रखी थी।
इस अनूठे दृश्य की तस्वीर साझा करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि लोग चाहें तो इन्हें भक्त की संज्ञा दे सकते हैं, परंतु यहाँ एक ऐसा नागरिक उपस्थित है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन खुले तौर पर प्रदर्शित कर रहा है। उन्होंने इस वाकये को हवाई अड्डे पर देखे गए सबसे अप्रत्याशित और स्मरणीय अनुभवों में से एक करार दिया। यह वाकया केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रधानमंत्री मोदी के कई ऐसे प्रशंसक हैं जिनकी दीवानगी के अपने अनोखे अंदाज हैं।
हवाई अड्डे की घटना से सामने आया समर्थकों का अनोखा अंदाज़
स्मृति ईरानी द्वारा साझा की गई इस तस्वीर ने देश भर में राजनेताओं के प्रति आम जनता की व्यक्तिगत निष्ठा और अभिव्यक्ति के तरीकों पर एक नई चर्चा शुरू कर दी है। बांह पर सुइयों के दर्द से बनी यह आकृति केवल कला प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक नागरिक का अपने नेता के प्रति समर्पण दर्शाती है। इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद कई अन्य समर्थकों की गाथाएं भी सामने आ रही हैं, जो समय-समय पर अपने अनूठे कारनामों के कारण सुर्खियों में रहे हैं।
पीठ पर 15 घंटे का दर्द सहकर टैटू बनवाने वाले शिक्षक बासवराज
कर्नाटक राज्य के रायचूर जिले के रहने वाले बासवराज की कहानी भी अत्यंत दिलचस्प है। पैसे से एक विद्यालय शिक्षक, बासवराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए लगभग 15 घंटे तक सुइयों की असहनीय पीड़ा सहन की। उन्होंने अपनी पूरी पीठ पर प्रधानमंत्री मोदी का एक विस्तृत टैटू बनवाया। इस टैटू की कलात्मकता ऐसी है कि इसमें मोदी का चश्मा, दाढ़ी, केश विन्यास और कुर्ते का कॉलर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
बासवराज के इस अनूठे कदम की गूंज राजनीतिक गलियारों तक पहुंची। एक जनसभा के दौरान स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बासवराज के इस प्रयास का उल्लेख करते हुए उनका नाम लिया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। बासवराज का कहना है कि सरकार द्वारा चार वर्षों की अवधि में किए गए जनहित के कार्यों के सामने उनका यह दर्द एक छोटा सा समर्पण मात्र है। उनके लिए यह केवल प्रशंसक होना नहीं, बल्कि जन कल्याणकारी नीतियों के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है।
हनुमान का रूप धरकर 160 रैलियों में शामिल होने वाले श्रवण शाह
बिहार के बेगूसराय जिले के निवासी श्रवण शाह का समर्थन व्यक्त करने का तरीका पूरी तरह से भिन्न है। वे जब भी किसी सार्वजनिक मंच पर आते हैं, भगवा वस्त्र धारण करते हैं, हाथ में गदा रखते हैं, सिर पर कमल के निशान वाली टोपी पहनते हैं और हाथ में नरेंद्र मोदी का बैनर थामे रहते हैं। वे स्वयं को भगवान हनुमान के रूप में प्रस्तुत करते हैं और अब तक लगभग 160 राजनीतिक रैलियों में सहभागिता कर चुके हैं।
श्रवण शाह की निष्ठा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे कई रैलियों में बिना जूतों के, नंगे पैर पहुंचे हैं। बिहार के भीतर होने वाली प्रधानमंत्री की किसी भी जनसभा में श्रवण शाह की उपस्थिति अनिवार्य सी मानी जाती है। उनका एक ही सपना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके गृह जिले बेगूसराय का दौरा करें और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने का अवसर प्राप्त हो सके।
दक्षिण अफ्रीका से लौटकर सीने पर टैटू बनवाने वाले विनोद बिहारी
पटना के रहने वाले विनोद बिहारी की कहानी राजनीतिक समर्थन के एक अलग पहलू को उजागर करती है। वे दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे और उन्होंने अपने सीने पर दो विशेष टैटू बनवाए। सीने के एक हिस्से पर उन्होंने अपने माता-पिता की तस्वीर बनवाई, जबकि दूसरे हिस्से पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आकृतियां गुदवाईं।
विनोद बिहारी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यदि मोदी राम का स्वरूप हैं तो योगी लक्ष्मण की भूमिका में हैं, और जब साथ में हनुमान रूपी समर्थक मौजूद हैं, तो देश में रामराज्य की स्थापना हो चुकी है। वे केवल विचारों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राज्य में सत्ता परिवर्तन की सूचना मिलते ही पटना पहुंचे और राजभवन के बाहर आयोजित जीत के उत्सव में सक्रिय रूप से शामिल हुए।
9 लाख से अधिक बार 'मोदी-मोदी' लिखने वाले बुजुर्ग शत्रुघ्न बरनवाल
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के 68 वर्षीय वयोवृद्ध शत्रुघ्न बरनवाल ने अपनी दीवानगी को लेखन का रूप दे दिया। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने के ऐतिहासिक निर्णयों से प्रभावित होकर उन्होंने एक अनूठा संकल्प लिया। उन्होंने लगभग एक महीने की अवधि में अपनी डायरियों में कुल 9 लाख 9 हजार बार 'मोदी-मोदी' नाम लिखा।
शत्रुघ्न बरनवाल का मानना है कि वे प्रधानमंत्री को देवता के समान पूज्य मानते हैं। उनसे मिलने की तीव्र अभिलाषा के कारण ही उन्होंने दिन-रात मेहनत करके यह लेखन कार्य पूरा किया। 68 वर्ष की आयु होने के बावजूद उनके भीतर का उत्साह किसी युवा समर्थक से कम नहीं दिखाई देता। वे इन डायरियों को संभाल कर रखते हैं और इस उम्मीद में हैं कि किसी दिन उन्हें प्रधानमंत्री से मुलाकात का अवसर मिलेगा।
पूरे शरीर को पोस्टर बनाने वाले कानपुर के युवक का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के एक युवक ने तो अपने शरीर को ही एक जीवंत पोस्टर का रूप दे दिया। उसने अपने शरीर के प्रत्येक उपलब्ध हिस्से पर 'मोदी-मोदी' का नाम उकेरवा लिया। जब वह प्रधानमंत्री के एक कार्यक्रम में पहुंचा और उसने लोगों के सामने अपना शरीर दिखाया, तो वहां उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए। उस युवक का कहना था कि उसकी पूरी देह ही मोदी के नाम हो चुकी है।
इन छह अलग-अलग व्यक्तियों की कहानियां यह सिद्ध करती हैं कि समर्थकों का उत्साह भिन्न-भिन्न रूपों में व्यक्त होता है। किसी ने सुइयों का दर्द सहकर टैटू बनवाया, किसी ने लाखों बार नाम लिखा, किसी ने पौराणिक पात्र का रूप धारण किया तो किसी ने अपनी काया को ही संदेश बना दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा साझा की गई हवाई अड्डे की तस्वीर ने एक बार फिर इन समर्पित प्रशंसकों की गाथाओं को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।



















