न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में महिला सिंगल्स का खिताबी मुकाबला एक नई प्रतिद्वंद्विता का साक्षी बनने जा रहा है। बेलारूस की स्टार टेनिस खिलाड़ी अर्यना सबालेंका और कजाकिस्तान की एलेना रायबाकिना इस साल चौथी बार एक-दूसरे का सामना करने जा रही हैं। इस ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुँचते ही रायबाकिना ने विश्व रैंकिंग में सबालेंका को शीर्ष स्थान से हटाना पक्का कर दिया था। अब 99 हफ़्तों तक दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी रहने के बाद सबालेंका की बादशाहत समाप्त हो गई है, लेकिन शनिवार को होने वाले इस फाइनल मुकाबले में सबालेंका के पास अपनी हार का बदला लेने और इतिहास रचने का पूरा मौका है।
रैंकिंग गंवाने के बाद सबालेंका के पास अतिरिक्त प्रेरणा
चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन अर्यना सबालेंका के लिए यह फाइनल मुकाबला सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि अपनी साख को दोबारा साबित करने की चुनौती भी है। अगर सबालेंका इस बार भी न्यूयॉर्क में जीत हासिल कर लेती हैं, तो वह सेरेना विलियम्स (2012 से 2014) के बाद लगातार तीन यूएस ओपन सिंगल्स खिताब जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन जाएंगी। ओपन इरा के पूरे इतिहास में ऐसा कारनामा केवल दो ही महिला खिलाड़ी कर सकी हैं।
ब्रिटेन की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी एनाबेल क्रॉफ्ट ने बीबीसी रेडियो 5 लाइव पर बात करते हुए इस स्थिति को सबालेंका के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्थान खोना किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद दर्दनाक होता है और रायबाकिना के हाथों नंबर वन का ताज छीन जाना सबालेंका के भीतर गुस्से की आग भड़काएगा। यही गुस्सा उनके लिए कोर्ट पर एक अतिरिक्त ताकत का काम करेगा, जिससे वह इस साल का समापन धमाकेदार जीत के साथ करना चाहेंगी।
कोचिंग स्टाफ का नजरिया: मानसिक दबाव से मिली मुक्ति
यूएस ओपन के सेमीफाइनल में अमेरिका की तीसरी वरीयता प्राप्त जेसिका पेगुला के खिलाफ सबालेंका ने हाल के महीनों का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने उस मुकाबले में एक अलग ही मानसिक स्वतंत्रता और आक्रामकता दिखाई, जो पिछले कुछ समय से उनके खेल से नदारद थी। मैच के बाद सबालेंका ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें अपनी शीर्ष रैंकिंग गंवाने की कोई परवाह नहीं है, लेकिन उनके मुख्य कोच एंटोन ड्युब्रोव के बयानों से साफ होता है कि यह मुद्दा उनके दिमाग पर हावी था।
एंटोन ड्युब्रोव ने इस बदलाव पर अपनी राय रखते हुए कहा कि शीर्ष स्थान का जाना एक तरह से टीम के लिए अच्छा ही रहा है। उनका मानना है कि नंबर एक बने रहने की निरंतर मानसिक थकान और दबाव अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। अब सबालेंका के पास खोने को कुछ नहीं है और एक शिकारी की तरह दोबारा शीर्ष का पीछा करने का नया अध्याय शुरू हो चुका है। यह स्थिति सबालेंका को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की नई प्रेरणा प्रदान कर रही है।
पिछले कुछ महीनों की असफलताएं और मानसिक चुनौतियां
हालांकि सबालेंका इस टूर्नामेंट में दो बार की डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर उतरी थीं, लेकिन न्यूयार्क पहुँचने से पहले उनके हालिया फॉर्म और मानसिक संतुलन को लेकर टेनिस जगत में कई सवाल खड़े हो रहे थे। पिछले पाँच महीनों में 28 वर्षीय सबालेंका को कई ऐसे मैचों में हार का सामना करना पड़ा था, जहाँ वह बेहद मजबूत स्थिति में थीं और जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थीं।
इन असफलताओं में सबसे चौंकाने वाली हार फ्रेंच ओपन के क्वार्टर फाइनल में मिली थी। 25वीं वरीयता प्राप्त डियाना श्नायडर के खिलाफ सबालेंका ने पहला सेट जीतने के बाद दूसरे सेट में डबल ब्रेक की बढ़त बना ली थी। लेकिन इसके बाद उनका खेल पूरी तरह बिखर गया और उन्हें 3-6, 7-5, 6-0 से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इससे पहले क्ले-कोर्ट सीज़न के दौरान मैड्रिड में हेली बैप्टिस्ट के खिलाफ छह मैच पॉइंट गंवाना और रोम में सोराना कर्स्टिया के खिलाफ पहला सेट जीतने के बाद मैच हारना उनके गिरते मानसिक ध्यान को बयां कर रहा था।
सबालेंका के हाई परफॉर्मेंस कोच जेसन स्टेसी का मानना है कि इन कठिन समयों में भी टीम के अंदर कोई घबराहट नहीं थी। स्टेसी के मुताबिक, हर महान एथलीट के करियर में ऐसे उतार-चढ़ाव आते हैं और टीम ने सबालेंका को दबाव से बाहर निकलने का पूरा समय दिया। उन्हें अपनी शैली में खेलने की आजादी देने के साथ-साथ सही मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे वह दोबारा अपने पुराने रंग में लौट सकीं।
चोट से उबरकर फाइनल तक पहुँचीं रायबाकिना
दूसरी तरफ, 27 वर्षीय एलेना रायबाकिना भी कम बाधाओं को पार करके फाइनल तक नहीं पहुँची हैं। दो बार की मेजर चैंपियन और 2022 की विंबलडन विजेता रायबाकिना सिनसिनाटी के क्वार्टर फाइनल में अपने टखने को चोटिल कर बैठी थीं। स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह कई दिनों तक पैदल चलने में भी असमर्थ थीं, जिससे उनके यूएस ओपन में भाग लेने पर ही काले बादल छा गए थे।
इसके बावजूद कजाकिस्तान की इस स्टार ने न केवल कोर्ट पर वापसी की, बल्कि अपनी ताकतवर सर्विस के दम पर शुरुआती चार दौर के मुकाबले बेहद आसानी से जीत लिए। उनकी सर्विंग इतनी धारदार रही कि विपक्षी खिलाड़ियों को अंक बनाने के मौके ही नहीं मिले। इसके बाद चीन की झेंग क्विनवेन और घरेलू स्टार कोको गॉफ के खिलाफ कठिन मुकाबलों में रायबाकिना ने अपनी शारीरिक सहनशक्ति और बेसलाइन से दबाव झेलने की अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन किया।
एनाबेल क्रॉफ्ट ने रायबाकिना के इस सफर की सराहना करते हुए बताया कि तीन हफ्ते पहले तक वह रैकेट भी नहीं पकड़ पा रही थीं। उस दौरान उन्होंने अपनी टीम के साथ मानसिक तैयारी और रणनीतिक चर्चाओं पर ध्यान केंद्रित किया। बिना टेनिस बॉल को हिट किए मानसिक रूप से खुद को तरोताजा रखकर उतरना ही इस टूर्नामेंट में उनकी सफलता का सबसे बड़ा रहस्य साबित हुआ है।
सीज़न का अंतिम ग्रैंड स्लैम और 2026 की खिताबी भूख
इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में रायबाकिना ने सबालेंका को निर्णायक सेट में 3-0 से पिछड़ने के बावजूद 6-4, 4-6, 6-4 से हराकर खिताब अपने नाम किया था। हालांकि इसके बाद मियामी और इंडियन वेल्स में सबालेंका ने रायबाकिना को हराकर अपनी हार का बदला लिया था। अब सीज़न के चौथे और अंतिम ग्रैंड स्लैम के फाइनल में इन दोनों दिग्गजों का आमने-सामने होना यह साबित करता है कि वर्तमान समय में महिला टूर पर यही दोनों सबसे बेहतरीन खिलाड़ी हैं।
वर्ष 2026 की अपनी पहली ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी की तलाश में जुटीं अर्यना सबालेंका ने साफ कर दिया है कि वह इस मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह सीज़न का आखिरी बड़ा प्रयास है और वह जीत हासिल करने के लिए हर संभव चुनौती का सामना करने को तत्पर हैं।



















