कोडरमा में बैग का कारोबार कैसे शुरू करें, जानिए निवेश से लेकर संभावित मुनाफे का पूरा गणितरॉबिनहुड के साथ रिपल की नई साझेदारी के बीच 1.33 डॉलर पर थमी एक्सआरपी की बढ़तसेबू में रक्षा सहयोग मजबूत करने पर भारत और फिलीपींस के बीच बनी सहमतिनागौर में मूंछों वाले नाचते बालाजी से लेकर एक आंख वाली प्रतिमा तक, जानिए इन प्रसिद्ध धामों का इतिहासब्रिटिश पाउंड में लगातार चौथे दिन फिसलन, 1.3300 के स्तर पर टिका स्टर्लिंगराजौरी में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदसर्दियों में दुधारू मवेशियों के घटते दूध से बचाएंगे ये जरूरी उपाय, जाने बचाव और खानपान की सही तकनीककपड़ा पीएलआई योजना के चौथे चरण के लिए खुला पोर्टल, सरकार ने टर्नओवर की शर्त आधी कीबशीरबाग पैलेस में उस्ताद बड़े गुलाम अली खान के आखिरी दिन और हैदराबाद में उनकी मजार की दास्तानपश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमागरम बहस, शुभेंदु अधिकारी की ममता बनर्जी को घर बैठने की दो टूक सलाह
बावनगजा: मानसून में जन्नत जैसा दिखता है 900 साल पुराना यह जैन तीर्थयात्रा
9 जुल॰ 2026, 8:52 am (112 दिन पहले)· 2

बावनगजा: मानसून में जन्नत जैसा दिखता है 900 साल पुराना यह जैन तीर्थ

मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में स्थित बावनगजा मानसून के दौरान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहाँ 84 फीट ऊंची भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के साथ ही कई प्राचीन मंदिर मौजूद हैं।

मध्य प्रदेश के बड़वानी में सतपुड़ा पर्वतमाला की गोद में बसा बावनगजा जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में गिना जाता है। बड़वानी शहर से करीब 6 से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान न केवल अपनी धार्मिक पवित्रता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी प्राकृतिक भव्यता के लिए भी जाना जाता है। विशेष रूप से मानसून के दिनों में जब यह पूरा पहाड़ी क्षेत्र घनी हरियाली की चादर ओढ़ लेता है, तब यहाँ का वातावरण बेहद सुकून देने वाला और मनमोहक हो जाता है।

भगवान आदिनाथ की 84 फीट ऊंची प्रतिमा

बावनगजा के मुख्य आकर्षण का केंद्र यहां की पहाड़ी पर स्थित भगवान आदिनाथ, जिन्हें ऋषभदेव के नाम से भी जाना जाता है, की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा लगभग 84 फीट ऊंची है, जिसे 52 गज भी कहा जाता है। यही मुख्य कारण है कि इस पूरे तीर्थक्षेत्र को बावनगजा के नाम से जाना जाता है। इस मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक ही चट्टान को तराशकर तैयार किया गया है, जो उस दौर की स्थापत्य कला और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है।

ये भी पढ़ें

ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

भगवान आदिनाथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर के रूप में पूजे जाते हैं। बावनगजा में उनकी यह मूर्ति खड़े आसन में स्थित है, जो दूर से ही पर्यटकों और श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। इसे 'चूलगिरि' के नाम से भी पुकारा जाता है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह प्रतिमा लगभग 900 साल पुरानी है, जिसे 12वीं शताब्दी का माना जाता है। दुनिया भर में पत्थर को तराशकर बनाई गई प्रतिमाओं में इसे एक प्रमुख स्थान प्राप्त है।

इस पहाड़ी परिसर में केवल एक प्रतिमा ही नहीं है, बल्कि यहां 11वीं से 15वीं शताब्दी के बीच निर्मित लगभग 11 प्राचीन जैन मंदिर भी मौजूद हैं। ये मंदिर इस पूरे क्षेत्र की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को और पुख्ता करते हैं। इनमें अन्य जैन तीर्थंकरों की बहुत ही सुंदर और कलात्मक मूर्तियां स्थापित हैं।

पौराणिक कथाओं से जुड़ाव

इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, बावनगजा जैन समाज के लिए एक अत्यंत पवित्र सिद्धक्षेत्र है, जिसका उल्लेख रामायण काल से भी मिलता है। लोकमान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां इंद्रजीत के साथ-साथ कुंभकर्ण और मंदोदरी ने मोक्ष प्राप्त किया था। यही कारण है कि जैन समाज के अनुयायी इसे एक सिद्धभूमि के रूप में सम्मान देते हैं।

मानसून में पर्यटन का अनुभव

बरसात के मौसम में बावनगजा की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के कारण पहाड़ियों पर बिछी हरियाली, बादलों का नीचे उतरना और मंदिरों के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे किसी हिल स्टेशन जैसा एहसास देता है। जो लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं, वे पहाड़ी रास्तों, ठंडी हवाओं और नैसर्गिक खूबसूरती का भी भरपूर आनंद लेते हैं। बावनगजा अब केवल एक धार्मिक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी अपनी पहचान बना चुका है।

सवाल-जवाब

बावनगजा कहां स्थित है?
बावनगजा मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच स्थित है।
भगवान आदिनाथ की प्रतिमा कितनी पुरानी है?
यह प्रतिमा लगभग 900 साल पुरानी मानी जाती है और इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था।
बावनगजा का नाम बावनगजा क्यों पड़ा?
भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की ऊंचाई करीब 84 फीट है, जो लगभग 52 गज के बराबर है, इसी कारण इस स्थान का नाम बावनगजा पड़ा।
बावनगजा जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
बरसात के मौसम में यहां का नजारा बेहद मनमोहक और हिल स्टेशन जैसा हो जाता है, इसलिए मानसून का समय यहां घूमने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp