स्वरोजगार की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए बैग का व्यापार एक बेहद व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रहा है। अगर आप कम पूंजी के साथ कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, तो बैग रिटेल का व्यापार आपके लिए बेहतरीन जरिया बन सकता है। इस धंधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रखे जाने वाले सामान के खराब होने या उनकी समय सीमा यानी एक्सपायरी खत्म होने की कोई चिंता नहीं रहती। इसके अलावा, बहुत कम जगह में भी अलग-अलग प्रकार के बैग्स की विस्तृत श्रृंखला का स्टॉक आसानी से सजाया जा सकता है। झारखंड के कोडरमा में स्टेशन रोड स्थित सोनू बैग दुकान के संचालक मंटू केसरी ने इस व्यवसाय की लागत, जरूरी संसाधनों और कमाई की संभावनाओं के बारे में पूरी जानकारी साझा की है।
20 हजार रुपये के शुरुआती स्टॉक से हो सकती है शुरुआत
व्यापार की शुरुआत करने की प्रक्रिया समझाते हुए मंटू केसरी ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति के पास पहले से ही कोई दुकान या उपयुक्त व्यापारिक स्थान मौजूद है, तो उसे भारी भरकम रकम जुटाने की जरूरत नहीं है। ऐसा व्यक्ति महज 20 हजार रुपये के शुरुआती स्टॉक के साथ बैग का कारोबार शुरू कर सकता है। शुरुआती दौर में अपनी उपलब्ध पूंजी और स्थानीय ग्राहकों की मांग के हिसाब से तरह-तरह की वैरायटी रखी जा सकती है। शुरुआत में सीमित मात्रा में सामान रखकर पहले बाजार और ग्राहकों की पसंद को समझा जा सकता है, जिसके बाद धीरे-धीरे स्टॉक और बिजनेस का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
दुकान में रखी जाने वाली वैरायटी के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस श्रेणी में लेडिज पर्स, जेंट्स पर्स, स्कूल बैग, कॉलेज बैग और ट्रैवलिंग ट्रॉली बैग जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। क्योंकि हर उम्र और वर्ग के लोगों को अलग-अलग जरूरतों के लिए बैग की आवश्यकता होती है, इसलिए बाजार में साल भर इनकी निरंतर बिक्री के अवसर मिलते रहते हैं। दुकानदार अपने बजट और ग्राहकों की मांग के अनुसार सामान की मात्रा तय कर सकता है।
नया सेटअप तैयार करने में डेढ़ से दो लाख का कुल निवेश
कारोबार का ढांचा खड़ा करने पर आने वाले खर्च का ब्योरा देते हुए मंटू केसरी ने स्पष्ट किया कि केवल माल खरीदना ही व्यापार शुरू करने का पूरा खर्च नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति बिल्कुल नई दुकान खोलने की योजना बना रहा है, तो उसे दुकान के अंदरूनी काम पर भी ध्यान देना होगा। इसमें फर्नीचर, सामान रखने के लिए मजबूत रैक, डिस्प्ले काउंटर, सजावट और अन्य बुनियादी लाइटिंग की व्यवस्था शामिल होती है।
पूरा सेटअप तैयार करने और शुरुआती सामान का स्टॉक भरने में कुल मिलाकर लगभग डेढ़ लाख रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का कुल निवेश आ सकता है। हालांकि, यह कुल लागत दुकान के आकार, उसके सटीक स्थान, अंदर की सजावट और आप कितना सामान खरीद रहे हैं, इस बात पर निर्भर करेगी। यदि किसी के पास पहले से ढांचागत व्यवस्था मौजूद है, तो शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है।
दुकान का किराया और लोकेशन का महत्व
स्थान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंटू केसरी ने कहा कि व्यापार की सफलता में दुकान की लोकेशन बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। कोडरमा के मुख्य बाजार में अगर कोई दुकान किराए पर ली जाती है, तो उसका मासिक किराया लगभग 10 हजार रुपये तक बैठता है। वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति मुख्य बाजार के बजाय किसी गली, मोहल्ले या कम चहल-पहल वाले इलाके में दुकान खोलता है, तो वहां मासिक किराया लगभग पांच हजार रुपये प्रति माह के आसपास रहता है।
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से 80 रुपये में मिलता है थोक माल
कीमतों और सप्लाई चेन के बारे में बात करते हुए मंटू केसरी ने बताया कि उनकी अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। खुद का उत्पादन होने के कारण वे ग्राहकों और अन्य छोटे कारोबारियों को बेहद किफायती थोक दरों पर बैग उपलब्ध करा पाते हैं। उनके पास बैग की शुरुआती थोक दरें 80 रुपये प्रति पीस से शुरू होती हैं। हालांकि, हर बैग की अंतिम कीमत उसकी सामग्री की गुणवत्ता, साइज, डिजाइन और बैग के प्रकार के हिसाब से अलग-अलग तय होती है।
20 से 30 प्रतिशत तक मुनाफे की संभावना
कमाई और मार्जिन का गणित समझाते हुए मंटू केसरी ने बताया कि बैग के बिजनेस में औसतन 20 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक का प्रॉफिट मार्जिन आसानी से मिल जाता है। किसी भी दुकानदार की कुल शुद्ध कमाई उसकी दैनिक बिक्री, खरीद दर और परिचालन खर्चों पर निर्भर करती है। अगर व्यापारी अपने साथ पक्के और नियमित ग्राहक जोड़ता है, सही थोक मूल्य पर सामान खरीदता है और बाजार की मांग के हिसाब से स्टॉक बनाए रखता है, तो इस कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।























