घरेलू विनिर्माण को गति देने और मध्यम दर्जे के उद्यमों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से कपड़ा मंत्रालय ने टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के चौथे चरण का ऑनलाइन आवेदन पोर्टल फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इस नए चरण के तहत विनिर्माता 1 नवंबर से लेकर 31 दिसंबर तक अपने ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। उद्योग जगत की मांग और छोटे कारखानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने पात्रता से जुड़े नियमों में कुछ अहम संशोधन भी किए हैं, जिससे मझोले स्तर की औद्योगिक इकाइयों के लिए योजना के तहत वित्तीय लाभ हासिल करने का रास्ता साफ हो सके।
भाग 2 में न्यूनतम टर्नओवर की सीमा में 50 प्रतिशत की भारी कटौती
संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, मंत्रालय ने योजना की 'भाग 2' श्रेणी के अंतर्गत आवश्यक न्यूनतम टर्नओवर की पूर्व शर्त में बड़ी ढील दी है। पहले इस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाली विनिर्माण इकाइयों के लिए कम से कम 200 करोड़ रुपये का टर्नओवर होना जरूरी था, जिसे अब घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। टर्नओवर सीमा में इस कटौती का सीधा लाभ मध्यम और लघु विनिर्माण इकाइयों (MSME) को मिलेगा, जो पहले वित्तीय सीमा के कारण आवेदन करने से वंचित रह जाती थीं। हालांकि, इस श्रेणी में प्रवेश के लिए आवश्यक न्यूनतम निवेश की राशि को बिना किसी बदलाव के 50 करोड़ रुपये पर ही यथावत रखा गया है।
मंत्रालय का स्पष्ट मानना है कि राजस्व की न्यूनतम सीमा को घटाने से उन कंपनियों को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा जिनका वित्तीय आकार मध्यम है लेकिन वे आधुनिक तकनीक और वस्त्र उत्पादन में विस्तार की मजबूत क्षमता रखती हैं। पात्रता के इस सरलीकरण के बाद 31 दिसंबर तक खुले रहने वाले पोर्टल पर नए उद्यमियों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
मंजूरी पाने वाली कंपनियों के लिए योजना की समयसीमा 2033-34 तक बढ़ाई गई
नियमों में ढील देने के साथ ही सरकार ने इस चौथे दौर के तहत चयनित होने वाले सफल आवेदकों को एक और बड़ा नीतिगत संबल दिया है। चौथे चरण के अंतर्गत स्वीकृति प्राप्त करने वाले विनिर्माताओं के लिए योजना की कुल अवधि को वित्तीय वर्ष 2033-34 तक बढ़ा दिया गया है। कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, योजना की मियाद में इस विस्तार का प्राथमिक उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों को अपनी उत्पादन क्षमताओं को धीरे-धीरे विस्तार देने और दीर्घकालिक पूंजीगत व्यय की ठोस योजनाएं तैयार करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध कराना है। इससे कंपनियों को बाजार की मांग के अनुरूप अपनी आपूर्ति श्रृंखला को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
मानव निर्मित फाइबर और तकनीकी वस्त्रों पर मुख्य फोकस
कपड़ा उद्योग के लिए लाई गई इस पीएलआई योजना का मुख्य केंद्र चुनिंदा विशेष उत्पाद श्रेणियों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। योजना में विशेष रूप से मानव निर्मित फाइबर (MMF) परिधान, एमएमएफ कपड़े और तकनीकी वस्त्र (टेक्निकल टेक्सटाइल्स) जैसे उच्च मूल्य वर्धित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस नीति का व्यापक लक्ष्य देश के भीतर उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाना, आधुनिक उपकरणों में नया निजी निवेश आकर्षित करना, बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर सृजित करना और वैश्विक कपड़ा मूल्य श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाना है।
पुराने चरणों के आवेदकों को चौथे दौर में स्थानांतरित होने का विकल्प
मंत्रालय ने पहले से चल रहे चरणों के प्रतिभागियों के लिए भी एक विशेष लचीला प्रावधान पेश किया है। वे सभी कंपनियां जिन्होंने पीएलआई योजना के पहले, दूसरे या तीसरे दौर में हिस्सा लिया था, उन्हें भी चौथे दौर में स्थानांतरित होने की अनुमति दी गई है। यह सुविधा केवल उन्हीं विनिर्माताओं पर लागू होगी जिन्होंने योजना के किसी भी हिस्से के तहत अब तक प्रोत्साहन राशि का कोई दावा नहीं किया है और न ही उन्हें कोई प्रोत्साहन मिला है। ऐसे आवेदकों को नए दौर में शामिल होने से पहले पिछले चरणों के तहत दिए गए अपने मौजूदा आवेदनों को विधिवत रूप से वापस लेना अनिवार्य होगा, जिसके बाद ही वे चौथे चरण की संशोधित शर्तों के तहत पात्र बन सकेंगे।

















