राजस्थान की पावन धरा अपनी ऐतिहासिक विरासतों के साथ-साथ अद्भुत आस्था केंद्रों के लिए भी पूरे देश में जानी जाती है। नागौर जिले में भगवान हनुमान के कई ऐसे धाम हैं, जिनकी मूर्तियां और उनसे जुड़ी मान्यताएं देश भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। यहां कहीं मूंछों वाले नाचते स्वरूप की पूजा की जाती है, तो कहीं वीर राजाओं द्वारा स्थापित अनोखी प्रतिमाएं भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं।
सावंतगढ़ में मूंछों वाले नाचते बालाजी
नागौर, नावां और कुचामन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव सावंतगढ़ में पवनपुत्र हनुमान का बेहद दुर्लभ मंदिर स्थित है। इस पावन स्थल पर स्थापित मूर्ति में भगवान हनुमान मूंछों के साथ नृत्य की मुद्रा में नजर आते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस दरबार में आकर बालाजी महाराज को नारियल भेंट करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। अपने तरह के इस अनोखे स्वरूप के दर्शन करने के लिए न केवल राजस्थान के विभिन्न इलाकों से, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
राजा अमरसिंह राठौड़ द्वारा निर्मित एक आंख वाले हनुमान
नागौर शहर में बजरंगबली का एक अन्य प्रसिद्ध और विशिष्ट मंदिर स्थित है। इस तीर्थ स्थल का सबसे प्रमुख आकर्षण भगवान हनुमान की एक आंख वाली विशेष प्रतिमा है, जो सामान्य स्वरूपों से काफी भिन्न दिखाई देती है। जनश्रुतियों और क्षेत्रीय मान्यताओं के मुताबिक, इस मंदिर की स्थापना नागौर के पराक्रमी शासक राजा अमरसिंह राठौड़ ने करवाई थी। सदियों पुराने इस मंदिर में आज भी रोजाना भक्त संकटमोचन के दर्शन कर शीश नवाते हैं।
डेह धाम में वीर हनुमान का आस्था केंद्र
नागौर जिले के डेह गांव में स्थित वीर हनुमान मंदिर को इलाके में श्रद्धापूर्वक डेह धाम के नाम से पुकारा जाता है। यह स्थल आसपास के समूचे क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। भक्त परिवार में खुशहाली, सुख-समृद्धि और विभिन्न कार्यों में सफलता की अरदास लेकर इस धाम में हाजिरी लगाते हैं। मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारी कथाएं और जनश्रुतियां स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनी और सुनाई जाती हैं।
मेड़ता सिटी में 500 वर्ष पुराना इमली वाले बालाजी मंदिर
मीरा नगरी के रूप में प्रसिद्ध मेड़ता सिटी में मीरा महल के समीप इमली वाले बालाजी का मंदिर अवस्थित है। स्थानीय निवासी श्याम बोराणा के अनुसार, इस पवित्र स्थल की नींव लगभग 500 वर्ष पूर्व एक सिद्ध संत ने रखी थी। मंदिर के निर्माण को लेकर एक रहस्यमयी घटना का उल्लेख भी मिलता है, जिसने जनमानस में इसके प्रति आस्था को और गहरा कर दिया है। विष्णु सागर सरोवर के किनारे स्थित होने की वजह से यह मंदिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से बड़ा महत्व रखता है।
श्यामगढ़ की शिव बगीची में दक्षिण मुखी हनुमान
नागौर और कुचामन जिले के सीमांत क्षेत्र पर स्थित श्यामगढ़ की शिव बगीची में लगभग 45 साल पुरानी दक्षिण मुखी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। यह मूर्ति अपने आकर्षक स्वरूप और चमत्कारी प्रभाव के लिए जानी जाती है। आश्रम के मुख्य पुजारी सर्वेश्वरदास महाराज पिछले कई सालों से शिव बगीची का प्रबंधन और संचालन कर रहे हैं। यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और प्रार्थना करते हैं।
























