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मानसून में माउंट आबू की इन 5 छिपी जगहों का नजारा जन्नत जैसा लगता हैयात्रा
1 घंटे पहले· 1

मानसून में माउंट आबू की इन 5 छिपी जगहों का नजारा जन्नत जैसा लगता है

मानसून में माउंट आबू घूमने वाले पर्यटक अक्सर नक्की झील और सनसेट पॉइंट तक ही सीमित रहते हैं, जबकि टेबल रॉक, गौमुख ट्रेक, सालगांव और अनादरा पॉइंट जैसी 5 छिपी जगहें कहीं ज्यादा खूबसूरत नजारे देती हैं।

राजस्थान का माउंट आबू हिल स्टेशन अक्सर राजस्थान का शिमला कहा जाता है और मानसून के मौसम में यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ती है, जो हरी-भरी वादियों का नजारा देखने आते हैं। लेकिन इस हिल स्टेशन में कुछ ऐसी जगहें भी छिपी हैं, जहां आम पर्यटक कभी नहीं पहुंच पाते, क्योंकि उनकी जानकारी बहुत कम लोगों को होती है। इनमें से कई जगहों तक सिर्फ ट्रेकिंग करके या पहाड़ी पगडंडियों से ही पहुंचा जा सकता है, लेकिन एक बार वहां पहुंचने पर सामने आने वाले नजारे किसी जन्नत से कम नहीं लगते।

नक्की झील से सनसेट पॉइंट तक का प्राकृतिक रास्ता

माउंट आबू की नक्की झील से शुरू होकर माउंट आबू सेंचुरी से गुजरता हुआ यह प्राकृतिक पाथ सीधे सनसेट पॉइंट तक ले जाता है। यहां से ट्रेकिंग शुरू करने पर करीब 3 किलोमीटर तक पहाड़ों के बीच पैदल चलना पड़ता है। रास्ते भर घनी हरियाली और वन्यजीव देखने को मिलते हैं, जिससे यह ट्रेक प्रकृति प्रेमियों के लिए खासा दिलचस्प बन जाता है और मानसून में यह पूरा सफर हरियाली से भरा नजर आता है।

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टेबल रॉक व्यू पॉइंट का अनोखा नजारा

माउंट आबू का टेबल रॉक व्यू पॉइंट एक पहाड़ी की चोटी है, जो एकदम टेबल की तरह समतल दिखाई देती है। यहां से अरावली की पहाड़ियों का नजारा आसमान से देखने जैसा अनुभव देता है। इस जगह तक पहुंचने के लिए साथ में ट्रेकिंग गाइड का होना जरूरी है, क्योंकि रास्ता आसान नहीं है। यहां पर्यटक ट्रेकिंग के साथ-साथ कैंपिंग का भी लुत्फ उठा सकते हैं, जिससे यह जगह सिर्फ एक दिन के भ्रमण के बजाय रात बिताने का भी विकल्प बन जाती है।

गौमुख ट्रेक और धार्मिक मान्यता

माउंट आबू का गौमुख ट्रेक यहां के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गौमुख मंदिर तक जाता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच करीब 750 सीढ़ियां उतरने के बाद यह मंदिर आता है। मंदिर से कुछ सीढ़ियां पहले एक प्राकृतिक जलस्रोत बना हुआ है, जहां गाय के मुख यानी गौमुख की प्रतिमा से लगातार जलधारा बहती रहती है। माना जाता है कि इसी गौमुख के नाम पर मंदिर का नाम पड़ा है। कहा जाता है कि यह स्थान भगवान राम के कुलगुरु वशिष्ठ की तपोस्थली और आश्रम रहा है, जिस वजह से यह ट्रेक धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता दोनों का मेल पेश करता है।

सालगांव का शांत जलस्रोत और झरना

माउंट आबू के सालगांव में एक जलस्रोत मौजूद है, जहां बारिश के मौसम में एक सुंदर झरना भी बहने लगता है। चारों ओर अरावली की पहाड़ियों और घने जंगल से घिरी यह जगह पर्यटकों को प्रकृति के बेहद करीब होने का अहसास कराती है। यहां तक पैदल ट्रेकिंग करके ही पहुंचा जा सकता है, इसी वजह से बहुत कम लोग यहां पहुंच पाते हैं और यही कारण है कि यहां सुकून और शांति का भरपूर अनुभव मिलता है, जो भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों में मिलना मुश्किल होता है।

अनादरा पॉइंट का पुराना जंगली रास्ता

माउंट आबू के अनादरा पॉइंट के पास बना यह प्राकृतिक ट्रेल मानसून में माउंट आबू के वन्यजीव क्षेत्र के सुंदर नजारे दिखाता है। जंगल में ट्रेकिंग करने वालों के बीच यह एक पुराना और मशहूर रास्ता माना जाता है। बारिश के दिनों में यहां से हरी-भरी अरावली की वादियों का नजारा देखने लायक होता है। यहां पर्यटक शांति महसूस करने के साथ-साथ फोटोग्राफी का भी आनंद ले सकते हैं। इस जगह तक जाने के लिए वन विभाग को फॉरेस्ट फीस देकर प्रवेश की अनुमति लेनी पड़ती है, और साथ में एक प्रशिक्षित गाइड का होना भी जरूरी है, ताकि जंगल में रास्ता भटकने का कोई खतरा न रहे।

इन पांचों जगहों की खास बात यह है कि इनमें से ज्यादातर तक पहुंचने के लिए पैदल ट्रेकिंग, गाइड या वन विभाग की अनुमति जैसी तैयारी पहले से करनी पड़ती है। यही वजह है कि ये स्थान आम पर्यटन नक्शे से दूर, अनछुए और शांत बने रहते हैं, और मानसून में यहां पहुंचने वालों को हरियाली और सुकून का ऐसा अनुभव मिलता है, जो भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों में मिलना मुश्किल है।

सवाल-जवाब

माउंट आबू को राजस्थान का शिमला क्यों कहा जाता है?
मानसून में यहां की हरी-भरी वादियों और ठंडे मौसम की वजह से इसे राजस्थान का शिमला कहा जाता है।
नक्की झील से सनसेट पॉइंट तक का ट्रेक कितना लंबा है?
यह ट्रेक करीब 3 किलोमीटर लंबा है और माउंट आबू सेंचुरी से होकर गुजरता है।
गौमुख मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं?
गौमुख मंदिर तक पहुंचने के लिए अरावली की पहाड़ियों के बीच करीब 750 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं।
टेबल रॉक व्यू पॉइंट तक जाने के लिए क्या जरूरी है?
यहां पहुंचने के लिए साथ में एक ट्रेकिंग गाइड का होना जरूरी है, और यहां कैंपिंग भी की जा सकती है।
अनादरा पॉइंट के जंगली रास्ते पर जाने के लिए क्या अनुमति चाहिए?
यहां जाने के लिए वन विभाग को फॉरेस्ट फीस देकर प्रवेश की अनुमति लेनी होती है और साथ में प्रशिक्षित गाइड होना भी जरूरी है।
सालगांव में झरना कब देखने को मिलता है?
सालगांव में बारिश के मौसम में एक सुंदर झरना बहता है, जो चारों ओर अरावली की पहाड़ियों और जंगल से घिरा है।
गौमुख मंदिर का नाम इस नाम पर क्यों पड़ा?
मंदिर के पास एक प्राकृतिक जलस्रोत में गाय के मुख यानी गौमुख की प्रतिमा से जलधारा बहती है, माना जाता है कि इसी वजह से मंदिर का नाम गौमुख पड़ा।
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