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बेतला नेशनल पार्क में ईको-टूरिज्म का नया अध्याय: अब नए सर्किट पर जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे पर्यटकयात्रा
13 जुल॰ 2026, 8:41 am (16 दिन पहले)· 2

बेतला नेशनल पार्क में ईको-टूरिज्म का नया अध्याय: अब नए सर्किट पर जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे पर्यटक

पलामू टाइगर रिजर्व ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक नई योजना तैयार की है, जिसके तहत वर्षा ऋतु में भी सफारी का अनुभव मिल सकेगा। किला-कमलदह सर्किट के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

झारखंड का पलामू टाइगर रिजर्व राज्य का एकमात्र ऐसा संरक्षित क्षेत्र है, जो अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्ध वन्यजीव संपदा के लिए देश भर में विख्यात है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों के और अधिक करीब लाने के उद्देश्य से वन विभाग लगातार नवाचार कर रहा है। इसी कड़ी में अब जंगल सफारी के अनुभव को और भी रोमांचक बनाने के लिए नए स्थानों को विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है।

बेतला की ऐतिहासिक विरासत और सफारी का सफर

बेतला नेशनल पार्क की गणना भारत के सबसे पुराने और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यानों में की जाती है। इसकी एक लंबी विरासत है, और 1980 के दशक में जब यहाँ पहली बार जंगल सफारी की शुरुआत की गई थी, तो इसका प्राथमिक उद्देश्य न केवल लोगों को प्रकृति के करीब लाना था, बल्कि उन्हें जंगल संरक्षण के प्रति जागरूक करना और स्थानीय स्तर पर पर्यटन को एक नई दिशा देना भी था। उस समय बेतला में जिस सफारी मॉडल की नींव रखी गई, वह बाद में देश भर के कई अन्य टाइगर रिजर्व और पार्कों के लिए एक सफल उदाहरण के रूप में देखा गया।

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बदलाव की जरूरत और नया ईको-टूरिज्म मॉडल

समय के साथ वन्यजीव पर्यटन की प्राथमिकताएं बदली हैं और पर्यटकों की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। इन बदलती परिस्थितियों को देखते हुए, वन विभाग अब बेतला नेशनल पार्क में सफारी का एक आधुनिक और उन्नत मॉडल पेश करने की योजना पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वर्षा ऋतु के दौरान भी पर्यटक वन्यजीवों और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठा सकें। इसके लिए पार्क के भीतर नए लोकेशन की पहचान कर उन्हें सफारी के अनुकूल तैयार किया जा रहा है।

पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन का दृष्टिकोण

पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना के अनुसार, नियमों के तहत देश के सभी टाइगर रिजर्व में मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए सफारी पर पाबंदी रहती है। बेतला में भी कोर एरिया में सफारी बंद रहती है, लेकिन इस दौरान भी बफर और पेरिफेरल क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए अवसर खुले रहते हैं। वन विभाग इसी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना चाहता है ताकि पर्यटकों को खाली न लौटना पड़े।

किला-कमलदह सर्किट: पर्यटन का नया केंद्र

प्रजेश कांत जैना ने बताया कि इस नई योजना के तहत किला-कमलदह सर्किट को विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक पलामू किला, कमलदह झील, प्राकृतिक जलस्रोतों और सघन वनों से घिरा हुआ है, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। चूंकि इन इलाकों में जंगली जानवरों की चहल-पहल अक्सर देखी जाती है, इसलिए यह सफारी के अनुभव को और भी अधिक रोमांचक बना देता है।

स्थानीय समुदायों की भागीदारी और रोजगार

इस नई पहल का एक अत्यंत सकारात्मक पहलू स्थानीय युवाओं का जुड़ाव है। किला-कमलदह क्षेत्र के आसपास रहने वाले युवाओं को ड्राइवर और नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि पर्यटकों को इस क्षेत्र की जैव विविधता, ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय संस्कृति की सटीक जानकारी भी मिल सकेगी। इससे जंगल संरक्षण और पर्यटन के बीच एक गहरा समन्वय भी स्थापित होगा।

ग्रासलैंड विकास और भविष्य की राह

इस सफारी मॉडल में बेतला नेशनल पार्क के लगभग 400 हेक्टेयर के नव-विकसित ग्रासलैंड क्षेत्र, पलामू किला और कमलदह झील को शामिल किया गया है। इन घास के मैदानों को वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित आवास के रूप में तैयार किया गया है ताकि पर्यटकों को आसानी से वन्यजीवों के दर्शन हो सकें। यह मॉडल वर्षा ऋतु में भी पर्यटन की गतिविधियों को सक्रिय रखेगा और बेतला नेशनल पार्क को भारत के एक प्रमुख ईको-टूरिज्म गंतव्य के रूप में एक नई वैश्विक पहचान दिलाएगा।

सवाल-जवाब

बेतला नेशनल पार्क में सफारी का नया मॉडल क्या है?
इस मॉडल के तहत वर्षा ऋतु में भी पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों का अनुभव कराने के लिए नए लोकेशन, विशेष रूप से किला-कमलदह सर्किट को विकसित किया जा रहा है।
मानसून के दौरान सफारी क्यों बंद रहती है?
वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए नियमानुसार कोर एरिया में सफारी पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
इस योजना से स्थानीय युवाओं को क्या लाभ होगा?
स्थानीय युवाओं को ड्राइवर और नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
नए सफारी मॉडल में कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इसमें 400 हेक्टेयर के नए विकसित ग्रासलैंड, ऐतिहासिक पलामू किला और कमलदह झील का क्षेत्र शामिल है।
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