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बेतला की सफारी भले बंद, बारिश में यहां दिखता है पलामू टाइगर रिजर्व का सबसे हसीन नजारायात्रा
2 घंटे पहले· 0

बेतला की सफारी भले बंद, बारिश में यहां दिखता है पलामू टाइगर रिजर्व का सबसे हसीन नजारा

मानसून में बेतला की मुख्य जंगल सफारी बंद रहती है, लेकिन बेतला से महुआडांड़ और पलामू किला जाने वाले रास्ते इस मौसम में हरियाली, झरनों और वन्यजीवों के अनोखे नजारे पेश करते हैं।

हर साल मानसून शुरू होते ही झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के अंदर मुख्य सफारी इलाके को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है, और ज्यादातर लोग यही समझ बैठते हैं कि अब बारिश खत्म होने तक जंगल घूमने का कोई मौका नहीं बचता. लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है. सुरक्षा कारणों से भले ही बेतला का मुख्य सफारी क्षेत्र बरसात में बंद रहता हो, इसी दौरान पास का एक कम पहचाना रास्ता पूरी तरह हरा-भरा होकर जीवंत हो उठता है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है.

बरसात में जाग उठता है यह छिपा रास्ता

बहुत कम लोगों को पता है कि पलामू टाइगर रिजर्व का एक खास हिस्सा मानसून शुरू होते ही पूरी तरह बदल जाता है. इस रास्ते पर जगह-जगह हरे-भरे नजारे, झरनों की आवाज, पहाड़ी ढलानें और घना जंगल मिलकर ऐसा दृश्य बनाते हैं कि सफर करने वाला खुद को स्वर्ग जैसी जगह में महसूस करता है. बेतला से महुआडांड़ की तरफ निकलने वाली यह सड़क इसी अनुभव का केंद्र है. बारिश के दिनों में सड़क के दोनों तरफ साल के घने पेड़ों की कतारें देखने वालों का दिल जीत लेती हैं, वहीं पहाड़ों से बहते नन्हे झरनों की आवाज और पक्षियों का कलरव सफर को और भी दिलचस्प बना देता है.

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मिर्चैया फॉल और सुग्गा बांध झील की खूबसूरती

इसी रास्ते पर पड़ने वाला मिर्चैया फॉल बरसात के मौसम में अपने पूरे वेग से गिरता नजर आता है, जो देखने वालों को मोहित कर लेता है. थोड़ा आगे बढ़ने पर सुग्गा बांध झील का शांत नजारा मिलता है, जिसकी खूबसूरती लोगों को तय समय से कहीं ज्यादा देर तक वहां रोक लेती है. इस पूरे सफर में कई बार जंगली जानवर और अलग-अलग प्रजाति के पक्षी भी नजर आ जाते हैं, जिससे यात्रा और भी रोमांचक हो जाती है.

इतिहास के शौकीनों के लिए पलामू किला वाला रास्ता

जो पर्यटक जंगल के साथ-साथ इतिहास भी टटोलना चाहते हैं, उनके लिए बेतला से पलामू किला जाने वाला रास्ता भी एक शानदार विकल्प है. यह रास्ता भी अपने आप में जंगल सफारी जैसा अनुभव देता है. यहां घुसने के लिए पर्यटकों को 50 रुपये का शुल्क चुकाना पड़ता है, जिसके बाद वे पलामू किला, कमलदह झील और आसपास फैले कई प्राकृतिक स्थलों को देख सकते हैं. बारिश के मौसम में घने जंगल के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता और भी सुंदर दिखने लगता है.

भविष्य में बड़े सफारी सर्किट की तैयारी

पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन आने वाले समय में इस पूरे इलाके को एक बड़े जंगल सफारी सर्किट में बदलने की योजना पर भी काम कर रहा है, ताकि मुख्य सफारी बंद रहने के महीनों में भी पर्यटकों के पास घूमने के लिए एक ठिकाना बना रहे.

पारंपरिक जंगल सफारी भले हर साल मानसून में बंद हो जाती हो, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व का यह प्राकृतिक रास्ता रोमांच, इतिहास और हरियाली का अपना अलग संगम पेश करता है. हर प्रकृति प्रेमी के लिए यह सफर सच में यादगार साबित हो सकता है. जो लोग बरसात में भी असली जंगल जैसा माहौल महसूस करना चाहते हैं, उनके लिए यह रास्ता किसी छुपे खजाने से कम नहीं है.

सवाल-जवाब

बेतला की जंगल सफारी मानसून में क्यों बंद कर दी जाती है?
सुरक्षा कारणों से मानसून शुरू होते ही बेतला नेशनल पार्क का मुख्य जंगल सफारी क्षेत्र पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है।
सफारी बंद होने पर पलामू टाइगर रिजर्व घूमने का कोई और रास्ता है क्या?
हां, बेतला से महुआडांड़ की तरफ जाने वाला जंगल मार्ग मानसून में हरा-भरा होकर पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
मिर्चैया फॉल और सुग्गा बांध झील कहां स्थित हैं?
दोनों जगहें बेतला से महुआडांड़ जाने वाले उसी जंगल मार्ग पर स्थित हैं।
पलामू किला जाने वाले रास्ते में प्रवेश शुल्क कितना है?
इस रास्ते में प्रवेश के लिए पर्यटकों को 50 रुपये का शुल्क देना होता है।
पलामू किला मार्ग पर और क्या-क्या देखा जा सकता है?
पलामू किला के अलावा इस मार्ग पर कमलदह झील और आसपास के कई प्राकृतिक स्थल देखे जा सकते हैं।
क्या पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस रास्ते को लेकर कोई योजना बना रहा है?
हां, प्रबंधन इस इलाके को भविष्य में एक बेहतर जंगल सफारी सर्किट के रूप में विकसित करने पर काम कर रहा है।
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