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गंगा किनारे एक रेस्टोरेंट जहां कबाड़ ही बना खूबसूरती, ऋषिकेश में टिकाऊ सोच की मिसाल बना तुलसी रेस्टोरेंटयात्रा
25 जून 2026, 12:46 pm (44 दिन पहले)· 2

गंगा किनारे एक रेस्टोरेंट जहां कबाड़ ही बना खूबसूरती, ऋषिकेश में टिकाऊ सोच की मिसाल बना तुलसी रेस्टोरेंट

ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला इलाके में स्थित तुलसी रेस्टोरेंट में पुरानी कढ़ाइयां, बेकार बर्तन, ठेलियां और कांच की बोतलें सजावट का हिस्सा बन गई हैं, और यहां प्लास्टिक का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

योग और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए दुनिया भर में मशहूर ऋषिकेश अब एक नई वजह से चर्चा में है। गंगा, योग और प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेने हर साल यहां हजारों सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन अब इस शहर के कुछ अनोखे कैफे और रेस्टोरेंट भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इन्हीं में एक नाम है तुलसी रेस्टोरेंट, जिसकी पहचान सिर्फ उसके स्वाद से नहीं, बल्कि उसके बेहद खास इंटीरियर से भी जुड़ी है।

लक्ष्मण झूला क्षेत्र के पास बना यह रेस्टोरेंट पहली ही नजर में राहगीरों का ध्यान खींच लेता है। यहां आने वाले लोगों को किसी आम कैफे जैसा माहौल नहीं मिलता। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि पूरी सजावट वेस्ट मैटेरियल यानी बेकार समझी जाने वाली चीजों से तैयार की गई है। यही वजह है कि देश और विदेश से आने वाले पर्यटक इस जगह को देखने और यहां वक्त बिताने के लिए खास तौर पर रुकते हैं।

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2019 में शुरू हुआ था यह सफर

रेस्टोरेंट चलाने वाले सूरज बताते हैं कि उन्होंने इसकी शुरुआत साल 2019 में की थी। उनका मकसद सिर्फ एक कैफे खोलना नहीं था, बल्कि लोगों को यह दिखाना भी था कि जिन चीजों को हम बेकार मानकर फेंक देते हैं, उन्हें रचनात्मक तरीके से कैसे दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने वेस्ट से बेस्ट बनाने की राह पकड़ी।

कबाड़ से बनी सजावट

रेस्टोरेंट के अंदर कदम रखते ही ऐसी कई चीजें नजर आती हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग कबाड़ समझकर हटा देते हैं। लकड़ी की पारंपरिक टेबल की जगह यहां पुरानी ठेलियों का इस्तेमाल किया गया है। पुराने टायरों को बेंच की शक्ल दी गई है, तो वहीं खराब हो चुके बर्तनों को नई पहचान देकर सजावट का हिस्सा बना दिया गया है।

यहां पुरानी कढ़ाइयों और पैन को आकर्षक लाइट्स में तब्दील कर दिया गया है। जंग लगी कढ़ाइयों को रंग-रोगन कर सिंक का रूप दे दिया गया है। इसके अलावा कांच की खाली बोतलें भी सजावटी सामान बनकर दीवारों और कोनों की रौनक बढ़ा रही हैं। नतीजा यह है कि पूरा कैफे एक अलग और रचनात्मक माहौल पेश करता है।

प्लास्टिक से दूरी, पर्यावरण से नजदीकी

इस जगह की एक और बड़ी खासियत यह है कि यहां प्लास्टिक के इस्तेमाल को लगभग पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की गई है। हालत यह है कि आपको यहां प्लास्टिक की पानी की बोतलें तक देखने को नहीं मिलेंगी। पर्यावरण बचाने की इस कोशिश को सैलानी खूब सराहते हैं और इसे एक सकारात्मक पहल मानते हैं।

आज जब पूरी दुनिया में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवनशैली की बात हो रही है, ऐसे में इस तरह के प्रयास लोगों को नई सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। यहां आने वाले कई पर्यटक इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जिसकी वजह से यह जगह धीरे-धीरे एक लोकप्रिय आकर्षण बन चुकी है। रेस्टोरेंट का हर कोना मानो यही संदेश देता है कि थोड़ी सी रचनात्मक सोच के साथ किसी भी बेकार चीज को दोबारा इस्तेमाल कर उसे नई पहचान दी जा सकती है।

सिर्फ सजावट नहीं, खाने पर भी पूरा ध्यान

सूरज बताते हैं कि वे सिर्फ इंटीरियर ही नहीं, बल्कि खाने की क्वालिटी पर भी खास ध्यान देते हैं। उनके मुताबिक यहां जंक फूड के बजाय हेल्दी फूड को प्राथमिकता दी जाती है। पीनट बटर और दूसरे कई स्प्रेड्स जैसी चीजें भी बाहर से खरीदने के बजाय यहीं खुद तैयार की जाती हैं, ताकि ग्राहकों को ताजा और बेहतर खाना परोसा जा सके।

सवाल-जवाब

तुलसी रेस्टोरेंट कहां स्थित है?
यह रेस्टोरेंट ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला क्षेत्र के पास स्थित है।
इस रेस्टोरेंट को कब और किसने शुरू किया?
इसे सूरज ने साल 2019 में शुरू किया था।
इस कैफे की सजावट में क्या खास है?
यहां सजावट के लिए वेस्ट मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है, जैसे पुरानी ठेलियां, टायर, बर्तन, कढ़ाइयां और कांच की बोतलें।
पुरानी कढ़ाइयों का यहां क्या इस्तेमाल किया गया है?
पुरानी कढ़ाइयों और पैन को लाइट्स में बदला गया है, जबकि जंग लगी कढ़ाइयों को रंगकर सिंक का रूप दिया गया है।
क्या यहां प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है?
नहीं, यहां प्लास्टिक के इस्तेमाल को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, यहां तक कि प्लास्टिक की पानी की बोतलें भी नहीं मिलतीं।
क्या यहां सिर्फ इंटीरियर ही खास है या खाना भी?
सूरज खाने की क्वालिटी पर भी खास ध्यान देते हैं, यहां जंक फूड के बजाय हेल्दी फूड को प्राथमिकता दी जाती है और पीनट बटर जैसे स्प्रेड्स खुद तैयार किए जाते हैं।
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