उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का सुदूरवर्ती लीती गांव अब अपनी शांत आबोहवा, पारंपरिक जीवनशैली और अनूठे प्राकृतिक सम्मोहन की बदौलत पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनकर उभर रहा है। कपकोट विकासखंड के अंतर्गत आने वाला यह खूबसूरत इलाका समुद्र तल से लगभग 1800 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। महानगरों के शोरगुल और व्यस्त दिनचर्या से दूर शुद्ध पर्वतीय हवा और कुदरती शांति की तलाश में आने वाले मुसाफिरों को यह पहाड़ी बस्ती एक बेहद सुकूनभरा अनुभव प्रदान कर रही है।
हिमालय की बर्फीली चोटियों और नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार
भौगोलिक दृष्टिकोण से समृद्ध इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां से दिखने वाली हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखलाएं हैं। स्थानीय निवासी लक्ष्मण सिंह कोरंगा के अनुसार, गांव से नंदा देवी और नंदा घुंघटी जैसी विश्व प्रसिद्ध बर्फीली चोटियों का भव्य और विहंगम नजारा साफ नजर आता है। भोर के समय जब सूर्य की पहली स्वर्णिम किरणें हिमाच्छादित शिखरों पर पड़ती हैं, तो समूची घाटी का सौंदर्य अत्यंत मनोहारी रूप धारण कर लेता है।
बागेश्वर के जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद लीती गांव को नामिक ग्लेशियर का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। साहसिक पर्यटन और ट्रैकिंग के शौकीन यात्रियों के लिए यह गांव एक रणनीतिक और अहम पड़ाव की भूमिका निभा सकता है। नामिक ग्लेशियर के अभियान पर निकलने वाले ट्रैकर्स यहां विश्राम करने के साथ-साथ आसपास के सुरम्य पर्वतीय परिदृश्यों और शांत वादियों का भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।
कीवी की बागवानी से बदली किसानों की तकदीर
प्राकृतिक परिदृश्य के अलावा लीती गांव की एक और मजबूत पहचान यहां तेजी से पनप रही कीवी की खेती है। इस पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु और विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियां कीवी के उत्पादन के लिए बेहद मुफीद मानी जाती हैं। अपनी सदियों पुरानी पारंपरिक खेती के साथ-साथ यहां के मेहनती किसान अब व्यावसायिक बागवानी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। नकदी फसल के रूप में कीवी की सफल पैदावार ने स्थानीय किसानों को अतिरिक्त आमदनी के नए और टिकाऊ साधन दिए हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
महिला सशक्तिकरण और 30 होमस्टे की अनूठी पहल
पहाड़ों में पलायन को मात देने और ग्रामीण पर्यटन को व्यावहारिक धरातल पर उतारने के लिए गांव की करीब 30 महिलाओं ने मिलकर होमस्टे संचालन की एक शानदार मिसाल कायम की है। इन होमस्टे के जरिए बाहरी पर्यटकों को किसी भीड़भाड़ वाले व्यवसायिक होटल के बजाय सीधे स्थानीय परिवारों के साथ रहने, पहाड़ी खान-पान का असली स्वाद चखने और लोक-संस्कृति को करीब से महसूस करने का मौका मिलता है।
होमस्टे का प्रबंधन संभाल रहीं संचालक महिलाएं मेहमानों को ठेठ पहाड़ी जीवनशैली, स्थानीय परंपराओं और आत्मीय आतिथ्य सत्कार से रूबरू करा रही हैं। इस सामूहिक प्रयास ने न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के स्वतंत्र अवसर पैदा किए हैं, बल्कि कई परिवारों की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती दी है। बुनियादी सुविधाओं के आधुनिकीकरण, बेहतर सड़क संपर्क और व्यवस्थित प्रचार-प्रसार के जरिए इस गांव को ग्रामीण पर्यटन, कीवी बागवानी और हिमालयी ट्रैकिंग के एक आदर्श मॉडल के रूप में और आगे बढ़ाया जा सकता है।



















