दक्षिण रेलवे ने तमिलनाडु और केरल के बीच यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए एक विशेष सुविधा शुरू की है। मदुरै-गुरुवायुर एक्सप्रेस में आधुनिक एग्जीक्यूटिव विस्टाडोम एसी कोच जोड़ने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से यात्री सेंगोट्टई-पुनालूर घाट खंड से गुजरते हुए पश्चिमी घाट के घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और मनमोहक परिदृश्यों का दीदार कर सकेंगे। इस रेल मार्ग में ऐतिहासिक आर्यनकावु दर्रा भी शामिल है, जिसका मनोरम दृश्य सफर को और अधिक यादगार बनाएगा।
विस्टाडोम सेवा की तिथियां और संचालन का शेड्यूल
रेलवे प्रशासन ने रविवार को जारी अपनी आधिकारिक सूचना में स्पष्ट किया कि यह विस्टाडोम कोच फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के रूप में जोड़ा जा रहा है। मदुरै से चलने वाली ट्रेन संख्या में यह विशेष कोच 22 अक्टूबर 2026 से लेकर 15 जनवरी 2027 तक उपलब्ध रहेगा। इस समयावधि के दौरान मदुरै से प्रस्थान करने वाली ट्रेन में हर सप्ताह गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को विस्टाडोम कोच लगाया जाएगा।
वहीं दूसरी दिशा से वापसी यात्रा के दौरान गुरुवायुर से प्रस्थान करने वाली मदुरै-गुरुवायुर एक्सप्रेस में यह सुविधा 23 अक्टूबर 2026 से 16 जनवरी 2027 तक मिलेगी। गुरुवायुर की तरफ से यह ट्रेन प्रत्येक शुक्रवार, शनिवार, रविवार और सोमवार को विस्टाडोम कोच के साथ संचालित की जाएगी। सीमित दिनों के इस संचालन कार्यक्रम के जरिए दोनों राज्यों के बीच आवागमन करने वाले पर्यटकों और नियमित यात्रियों को लक्षित किया गया है।
किराया सूची और टिकट आरक्षण की प्रक्रिया
इस एग्जीक्यूटिव विस्टाडोम कोच के लिए रेलवे की ओर से सीटों का आरक्षण शुरू कर दिया गया है। यात्रा की दूरी के हिसाब से किराया तय किया गया है, जिसमें इस कोच का न्यूनतम मूल किराया 515 रुपये निर्धारित हुआ है। यदि कोई यात्री मदुरै से गुरुवायुर तक पूरे मार्ग का सफर तय करता है, तो उसके लिए कुल किराया 1,875 रुपये होगा। यात्री रेलवे के आरक्षण काउंटरों और आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सीट बुक कर सकते हैं।
विस्टाडोम कोच की तकनीकी विशेषताएं और उद्देश्य
विस्टाडोम कोच को विशेष रूप से दर्शनीय स्थलों की सैर कराने के उद्देश्य से डिजाइन किया जाता है। इन डिब्बों में कांच की पारदर्शी छत और अत्यंत चौड़ी खिड़कियां लगाई जाती हैं, जिससे यात्रियों को बाहर का विहंगम दृश्य बिना किसी रुकावट के देखने को मिलता है। इस व्यवस्था से पहाड़ी घाटियों, घुमावदार मोड़ों और हरियाली से भरे दुर्गम इलाकों की सुंदरता का आनंद बोगी के भीतर बैठे-बैठे लिया जा सकता है।
सेंगोट्टई-पुनालूर रेल खंड पश्चिमी घाट का एक अत्यंत सुरम्य हिस्सा माना जाता है, जो केरल और तमिलनाडु के बीच सीधा संपर्क सूत्र है। दक्षिण रेलवे का मुख्य उद्देश्य रेल यात्रा को केवल एक गंतव्य तक पहुंचने का माध्यम न रखकर उसे एक सुखद और प्राकृतिक पर्यटन अनुभव में बदलना है। रेलवे के अनुसार, आरामदायक सफर के साथ प्रकृति के सानिध्य की चाह रखने वाले पर्यटकों के लिए यह कोच विशेष आकर्षण का केंद्र साबित होगा।



















