राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में सिंचाई पानी के रेगुलेशन को लेकर चल रहा किसान आंदोलन अब अपने 39वें दिन में प्रवेश कर चुका है और लगातार उग्र रूप धारण करता जा रहा है। लंबे वक्त से अपनी जायज मांगों पर कोई ठोस निर्णय न आने के कारण अन्नदाताओं का गुस्सा अब सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है। रविवार को किसानों ने अपने संघर्ष को और अधिक धार देते हुए बिरधवाल हेड पर कब्जा करने तथा अनूपगढ़ शाखा में पानी जबरन छुड़वाने की खुली चेतावनी दी है। इस घोषणा के बाद से ही पूरे इलाके में प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। आंदोलन से जुड़े हुए किसान अपने तय धरनास्थल से आगे बढ़ते हुए लगातार बिरधवाल हेड की तरफ कूच कर रहे हैं। इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने डब्बर मोड़ पर पहुंचकर वहां जाम लगा दिया, जिससे यातायात बाधित हुआ और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंच गया और हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। किसानों के इस तीखे रुख से इस बात के साफ संकेत मिल रहे हैं कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी ज्यादा व्यापक रूप ले सकता है।
जयपुर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना भवन पर डटा प्रतिनिधिमंडल
एक तरफ जहां घड़साना में सड़कों पर प्रदर्शन तेज हो गया है, वहीं दूसरी तरफ राजधानी जयपुर में भी किसानों का विरोध प्रदर्शन उतनी ही मजबूती के साथ जारी है। किसानों का एक 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पिछले शनिवार की रात से ही जयपुर में स्थित इंदिरा गांधी नहर परियोजना भवन के बाहर धरने पर बैठा हुआ है। रविवार का पूरा दिन बीत जाने के बाद भी यह प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर उसी जिद और डटकर वहां बैठा रहा। इससे एक दिन पहले यानी शनिवार को राज्य के सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के साथ किसान नेताओं की एक उच्चस्तरीय वार्ता हुई थी, लेकिन वह बैठक पूरी तरह से बेनतीजा साबित हुई। उस वार्ता में किसी भी मुद्दे पर सहमति न बन पाने के कारण किसानों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़े हैं। इसके बावजूद किसान नेताओं को अभी भी रविवार को एक बार फिर से सरकार के साथ बातचीत होने की पूरी उम्मीद है। वे चाहते हैं कि सिंचाई के पानी के रेगुलेशन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों का एक स्थाई समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि यदि इस बार भी बातचीत से कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आता है, तो वे अपने इस आंदोलन को पूरे प्रदेश स्तर पर और अधिक बड़ा बनाएंगे।
डब्बर मोड़ पर यातायात ठप और बिरधवाल हेड की ओर बढ़ता कारवां
घड़साना के स्थानीय स्तर पर चल रहे इस लंबे आंदोलन ने अब प्रशासन की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। पिछले 39 दिनों से लगातार धरने पर बैठे किसानों ने अब अपनी मांगों के समर्थन में आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इसी रणनीति के तहत उन्होंने बिरधवाल हेड पर अपना कब्जा जमाने और अनूपगढ़ शाखा नहर में पानी चालू करवाने का बड़ा ऐलान किया है। इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए किसान अपने मूल धरना स्थल से धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए बिरधवाल हेड की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान रविवार को जब किसानों ने डब्बर मोड़ पर पहुंचकर चक्काजाम कर दिया, तो वहां वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस घटनाक्रम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में जुट गए। स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रदर्शनकारी किसानों का साफ तौर पर कहना है कि सिंचाई के पानी के रेगुलेशन और वितरण को लेकर उनकी मांगों पर सरकार को अब बिना किसी टालमटोल के गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि उनकी इन मांगों का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो वे अपने इस विरोध प्रदर्शन को और अधिक आक्रामक बनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
जयपुर में रातभर का डेरा और बेनतीजा वार्ताओं का दौर
श्रीगंगानगर के किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर जयपुर में चल रहा धरना इस बात का प्रमाण है कि आंदोलन अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है। 12 सदस्यीय किसान प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना भवन परिसर में ही अपना रातभर का डेरा डाला हुआ है। शनिवार की रात से शुरू हुआ यह धरना रविवार को भी पूरे जोश के साथ जारी रहा और किसानों ने वहां से हटने से साफ इनकार कर दिया। शनिवार को हुई सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के साथ बैठक में दोनों पक्षों के बीच कोई भी सहमति न बन पाने के कारण गतिरोध अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। वार्ता के विफल होने के बाद से ही किसान वर्ग में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी और अधिक गहरी हो गई है, हालांकि वे रविवार को एक बार फिर से नई वार्ता के होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रतिनिधिमंडल का एकमात्र और मुख्य उद्देश्य सिंचाई पानी के रेगुलेशन से जुड़ी नीति में सुधार लाना है। किसान चाहते हैं कि नहरों के जरिए होने वाले पानी के समान वितरण और रेगुलेशन की अनिश्चितताओं को दूर किया जाए ताकि किसानों को उनकी फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई का पानी मिल सके।
वार्ता विफल रहने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
घड़साना में पिछले 39 दिनों से सुलग रहे इस आंदोलन और रविवार को डब्बर मोड़ पर हुए कड़े प्रदर्शन के बाद सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। किसान जिस तरह से बिरधवाल हेड पर कब्जा करने और अनूपगढ़ शाखा में पानी छुड़वाने की जिद पर अड़े हैं, उससे स्थिति किसी भी समय गंभीर हो सकती है। एक तरफ जहां घड़साना की सड़कों पर किसान आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ जयपुर में बैठा किसान प्रतिनिधिमंडल सरकार के साथ एक और दौर की बातचीत की उम्मीद लगाए बैठा है। किसान नेताओं ने अपनी तरफ से बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बार भी आपसी बातचीत से कोई ठोस और मान्य समाधान नहीं निकलता है, तो इस आंदोलन को बहुत बड़े पैमाने पर पूरे इलाके में फैला दिया जाएगा। स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम की पल-पल की रिपोर्ट ले रही हैं और प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें सरकार तथा किसान प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली संभावित बैठक के नतीजों पर और घड़साना में तय होने वाली अगली आंदोलन की रणनीति पर टिकी हुई हैं कि आगे क्या कदम उठाया जाता है।

















