सितंबर में बोई पालक कुछ ही हफ्तों में देगी बंपर पैदावार, बुवाई शुरू करने से पहले समझ लें ये जरूरी टिप्सअजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़नेत्रदान से चेहरे की बनावट पर क्या असर पड़ता है? डॉक्टर रश्मि मित्तल ने दूर किए पांच बड़े भ्रमफाइव-स्टार होटलों से आगे निकलकर क्यों बढ़ रहा है रिवर्स वेकेशन का ट्रेंडहर दिन बालों में फिरने वाली कंघी में छिपी हो सकती है सिर की सेहत बिगाड़ने वाली गंदगीईरान का बड़ा पलटवार, अमेरिकी युद्धपोतों पर दागी बैलिस्टिक मिसाइलेंग्वालियर में विवेकानंद तिराहे के पास बस में आग, 25 यात्रियों ने कूदकर बचाई जानग्रीस के एयरशो में करतब दिखाते समय आग का गोला बना F-4 फैंटम, दोनों पायलट नहीं बचेबिलासपुर में अलग नगर निगम की मांग पर गरमाई सियासत, अमित तिवारी का पांचवें दिन भी अनशन जारीपाकिस्तान पर बड़ी जीत के बाद हरमनप्रीत कौर के कड़े तेवर, ऐतिहासिक मैच में रचा नया कीर्तिमान
अजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़राजस्थान
6 सित॰ 2026, 7:22 am (29 मिनट पहले)· 3

अजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़

अजमेर में पुष्कर रोड पर बना 250 साल पुराना पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी मंदिर भादवा महीने में जागरण और भजन संध्या के लिए मशहूर है, जो रामदेवरा नहीं जा पाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा विकल्प बन गया है।

राजस्थान में भादवा का महीना शुरू होते ही लोकदेवता बाबा रामदेव जी की भक्ति का माहौल पूरे प्रदेश में दिखने लगता है। हर साल लाखों श्रद्धालु जैसलमेर के रामदेवरा धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं, लेकिन जो लोग किसी वजह से इतनी दूर नहीं जा पाते, उनके लिए अजमेर में ही एक ऐसा मंदिर है जहां वैसी ही आस्था और भक्ति देखने को मिलती है।

250 साल पुराना है यह मंदिर

अजमेर से पुष्कर जाने वाले रास्ते पर स्थित यह रामदेव मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है। इसे पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी के नाम से जाना जाता है। सालों से यह मंदिर सिर्फ अजमेर शहर के लिए नहीं बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

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भादवा में जागरण और भजन संध्या

मंदिर के पुजारी के मुताबिक भादवा महीने में यहां कई तरह के आयोजन होते हैं। इस दौरान मंदिर में विशाल जागरण और भजन संध्या रखी जाती है, जिसमें राजस्थान के साथ-साथ दूसरी जगहों से भी हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं। इस मौके पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत, जलते दीयों की रोशनी और जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। बाबा की दूज के दिन कई अलग-अलग जगहों से मंदिर में झंडा चढ़ाने के लिए लोग आते हैं।

एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन

पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर परिसर में बाबा रामदेव जी के अलावा भगवान खाटू श्याम जी, राधा-कृष्ण और राम दरबार की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां छह फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की भव्य प्रतिमा भी है। एक ही जगह पर इतने देवी-देवताओं के दर्शन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और गहरी धार्मिक अनुभूति मिलती है।

कैसे पहुंचें मंदिर तक

यह मंदिर अजमेर रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर दूर पुष्कर रोड पर स्थित है। यहां तक बस, टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप अजमेर की धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें। प्राचीन आस्था, शांत वातावरण और भव्य मंदिर परिसर इसे श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण बनाते हैं।

सवाल-जवाब

यह मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर अजमेर में पुष्कर रोड पर, अजमेर रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस मंदिर को किस नाम से जाना जाता है?
इसे पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी के नाम से जाना जाता है।
यह मंदिर कितना पुराना है?
यह मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है।
भादवा महीने में यहां क्या खास आयोजन होता है?
भादवा में यहां विशाल जागरण और भजन संध्या का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर परिसर में और किन देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं?
यहां भगवान खाटू श्याम जी, राधा-कृष्ण, राम दरबार और छह फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की प्रतिमा के भी दर्शन होते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
यहां तक बस, टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है।
बाबा की दूज पर मंदिर में क्या होता है?
बाबा की दूज पर अलग-अलग जगहों से लोग मंदिर में झंडा चढ़ाने आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

भादवा महीने में उमड़ने वाली इस भारी भीड़ के मद्देनजर सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती रहता है। पुष्कर रोड पर यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की अनियंत्रित भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था करना इस दौरान सबसे अहम होता है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

अजमेर के इस ऐतिहासिक मंदिर में उमड़ने वाली भारी भीड़ सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता प्रशासनिक इंतजामों की मांग करती है। पुष्कर रोड पर इस दौरान बढ़ने वाले दबाव को देखते हुए जिला प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग और सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त करने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो और कानून-व्यवस्था सुचारू बनी रहे।

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