राजस्थान में भादवा का महीना शुरू होते ही लोकदेवता बाबा रामदेव जी की भक्ति का माहौल पूरे प्रदेश में दिखने लगता है। हर साल लाखों श्रद्धालु जैसलमेर के रामदेवरा धाम पहुंचकर बाबा के दर्शन करते हैं, लेकिन जो लोग किसी वजह से इतनी दूर नहीं जा पाते, उनके लिए अजमेर में ही एक ऐसा मंदिर है जहां वैसी ही आस्था और भक्ति देखने को मिलती है।
250 साल पुराना है यह मंदिर
अजमेर से पुष्कर जाने वाले रास्ते पर स्थित यह रामदेव मंदिर करीब 250 साल पुराना बताया जाता है। इसे पांच गांव के धूणी वाले रामदेव जी के नाम से जाना जाता है। सालों से यह मंदिर सिर्फ अजमेर शहर के लिए नहीं बल्कि आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए भी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
भादवा में जागरण और भजन संध्या
मंदिर के पुजारी के मुताबिक भादवा महीने में यहां कई तरह के आयोजन होते हैं। इस दौरान मंदिर में विशाल जागरण और भजन संध्या रखी जाती है, जिसमें राजस्थान के साथ-साथ दूसरी जगहों से भी हजारों श्रद्धालु शामिल होने पहुंचते हैं। इस मौके पर पूरा मंदिर परिसर भक्ति संगीत, जलते दीयों की रोशनी और जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। बाबा की दूज के दिन कई अलग-अलग जगहों से मंदिर में झंडा चढ़ाने के लिए लोग आते हैं।
एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के दर्शन
पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर परिसर में बाबा रामदेव जी के अलावा भगवान खाटू श्याम जी, राधा-कृष्ण और राम दरबार की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इसके साथ ही यहां छह फीट ऊंची दक्षिणमुखी हनुमान जी की भव्य प्रतिमा भी है। एक ही जगह पर इतने देवी-देवताओं के दर्शन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और गहरी धार्मिक अनुभूति मिलती है।
कैसे पहुंचें मंदिर तक
यह मंदिर अजमेर रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर दूर पुष्कर रोड पर स्थित है। यहां तक बस, टेंपो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप अजमेर की धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करें। प्राचीन आस्था, शांत वातावरण और भव्य मंदिर परिसर इसे श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी खास आकर्षण बनाते हैं।




















