किचन में अचानक हरी मिर्च खत्म हो जाना एक आम समस्या है, जिसके चलते बार-बार बाजार के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस परेशानी से बचने के लिए घर पर ही इसका छोटा सा पौधा तैयार करना एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प है। मिर्च उगाने के लिए किसी बड़े खेत या विस्तृत बगीचे की दरकार नहीं होती। घर की बालकनी, खुली छत या खिड़की के धूपदार कोने में रखे सामान्य गमले में भी मिर्च की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसके लिए बाजार से महंगे बीज खरीदने की भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि रसोई के डिब्बे में मौजूद साबुत सूखी लाल मिर्च के बीज भी अंकुरण के लिए पूरी तरह कारगर साबित होते हैं। हालांकि, सिर्फ मिट्टी में बीज दबा देना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पौधे की अच्छी बढ़वार और भरपूर पैदावार के लिए मिट्टी के प्रकार, नमी, धूप और कटाई-छंटाई की उचित समझ होना बेहद आवश्यक है।
पौधा लगाने के लिए बुनियादी सामग्री
घर पर गमले में हरी मिर्च का पौधा शुरू करने के लिए बहुत सीमित संसाधनों की जरूरत पड़ती है। सबसे पहले सूखी लाल मिर्च से निकाले गए अच्छे और पुष्ट बीज जुटा लें। इसके साथ उपजाऊ मिट्टी, वर्मीकम्पोस्ट या भली-भांति सड़ी हुई गोबर की खाद और साफ पानी की व्यवस्था करें। शुरुआत में बीज अंकुरित करने के लिए छोटे आकार के कप, सीडलिंग ट्रे या छोटे गमले का चयन करना सही रहता है। जब पौधा थोड़ा बड़ा और मजबूत हो जाए, तब उसे स्थायी तौर पर लगभग 10 से 12 इंच के गहरे गमले में स्थानांतरित किया जा सकता है।
सूखी मिर्च के बीजों से अंकुरण की विधि
पौधा तैयार करने के पहले चरण में सूखी लाल मिर्च को तोड़कर अंदर से स्वस्थ, बड़े और भरे हुए बीज अलग कर लें। हल्के या खोखले बीजों को हटा देना चाहिए। बीजों की अंकुरण क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें हल्के पानी में तकरीबन 2 से 3 घंटे तक भिगोकर रखें। इसके बाद तैयार की गई भुरभुरी मिट्टी में इन बीजों को लगभग आधा इंच की गहराई पर दबाएं। बीजों के ऊपर मिट्टी की बहुत मोटी परत न चढ़ाएं, क्योंकि भारी परत के नीचे बीज दबने से अंकुरण में रुकावट आ सकती है।
बीज बोने के बाद मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए किसी स्प्रे बोतल से हल्का छिड़काव करें। मग से तेज धार में पानी डालने से बीज अपनी जगह से हट सकते हैं। गमले को ऐसे स्थान पर रखें जहां पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आती हो, लेकिन शुरुआती दिनों में तेज और सीधी धूप से बचाना आवश्यक है। मौसम की स्थिति और बीजों की गुणवत्ता के अनुसार अंकुर निकलने में अलग-अलग समय लग सकता है। जब पौधे में मजबूती दिखने लगे और वह थोड़ा बड़ा हो जाए, तब उसे बड़े गमले में लगाने की तैयारी करनी चाहिए।
सही पॉटिंग मिक्स और जल निकासी का महत्व
मिर्च के पौधे की जड़ों के स्वस्थ विकास के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। सामान्य उपजाऊ मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। इसके अलावा मिट्टी की बनावट को हल्का और भुरभुरा बनाने के लिए जरूरत के अनुसार कोकोपीट या रेत मिलाई जा सकती है, जिससे मिट्टी अधिक चिपचिपी न बने।
गमले के तले में जल निकासी छिद्र यानी ड्रेनेज होल का होना अनिवार्य है। यदि गमले में अतिरिक्त पानी जमा रहेगा, तो जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। मिट्टी को हमेशा दलदली या अत्यधिक गीला रखने के बजाय यह नियम अपनाएं कि जब ऊपर की सतह छूने पर सूखी लगे, तभी गमले में पानी दें।
बड़े गमले में रिपॉटिंग और धूप का प्रबंधन
जब छोटा पौधा लगभग 4 से 5 इंच की ऊंचाई हासिल कर ले और उस पर कुछ मजबूत पत्तियां निकल आएं, तब उसे 10 से 12 इंच के बड़े गमले में रिपॉट कर देना चाहिए। पौधे को पुराने बर्तन से बाहर निकालते समय विशेष सावधानी बरतें ताकि मुख्य जड़ों के आसपास जमी मिट्टी न हटे और जड़ें सुरक्षित रहें। रिपॉटिंग करने के तुरंत बाद पौधे को कुछ दिनों तक हल्की रोशनी वाली छायादार जगह पर रखें ताकि वह नए वातावरण में ढल सके। जब पौधा स्थिर हो जाए, तब उसे धीरे-धीरे धूप वाले स्थान पर रखें।
मिर्च के पौधे को अच्छी धूप बेहद पसंद होती है, इसलिए गमले को ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां रोजाना पर्याप्त समय के लिए प्राकृतिक धूप मिल सके। यदि गर्मियों के मौसम में धूप अत्यधिक तेज हो, तो दोपहर के समय पौधे को सीधी तपिश से थोड़ी राहत दी जा सकती है ताकि पत्तियां झुलसने से बची रहें।
सिंचाई करते समय जल्दबाजी से बचें। ऊपर की मिट्टी की नमी की जांच करने के बाद ही पानी दें। लगातार अत्यधिक पानी देने से गमले में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जो पौधे के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसी तरह मिट्टी को लंबे समय तक पूरी तरह सूखा छोड़ देना भी मिर्च के विकास को प्रभावित करता है।
शाखाओं की प्रूनिंग और कीट नियंत्रण
जब पौधा अच्छी तरह बढ़ने लगे और अपनी मुख्य ऊंचाई पकड़ने लगे, तब उसकी सबसे ऊपरी नई शाखा की हल्की कटाई यानी प्रूनिंग की जा सकती है। ऊपरी हिस्से की हल्की प्रूनिंग करने से पौधे की ऊर्जा कई दिशाओं में बंटती है और नीचे से नई शाखाएं निकलने की संभावना बढ़ जाती है। जितनी अधिक शाखाएं होंगी, पौधे पर मिर्च लगने के अवसर उतने ही ज्यादा होंगे। प्रूनिंग करते समय मुख्य तने को भारी नुकसान न पहुंचाएं और हमेशा साफ तथा तेज कैंची का उपयोग करें।
पौधे के पोषण के लिए समय-समय पर जैविक खाद देना लाभकारी होता है। वर्मीकम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद की थोड़ी मात्रा गमले में डालना सबसे सरल उपाय है। खाद डालने के बाद मिट्टी की ऊपरी परत को हल्का सा मिला दें और आवश्यकतानुसार पानी डालें। इसके अलावा समय-समय पर पत्तियों के नीचे और तनों की बारीकी से जांच करें। यदि छोटे कीड़े या कीट नजर आएं, तो नीम तेल का छिड़काव किया जा सकता है। नीम तेल का इस्तेमाल करते समय उत्पाद के लेबल पर लिखी सही मात्रा और निर्देशों का कड़ाई से पालन करें। बहुत तेज या गाढ़ा घोल बनाकर सीधे पत्तियों पर छिड़कने से पौधे की कोमल पत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है।


















