बाजार में मिलने वाले रासायनिक उत्पादों से चेहरा धोने के बाद कई बार त्वचा अत्यधिक खिंची हुई महसूस होती है या कुछ ही देर में अतिरिक्त तेल नजर आने लगता है। महंगे ब्रांडेड क्लींजर पर लगातार खर्च करने के बजाय रसोई में आसानी से मिलने वाली प्राकृतिक सामग्रियों से एक सूखा घरेलू क्लींजर पाउडर तैयार किया जा सकता है। इस सूखे मिश्रण का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे एक बार बनाकर सुरक्षित रखा जा सकता है और रोजाना चेहरा धोते समय अपनी त्वचा की प्रकृति के अनुसार ताजे तरल पदार्थों के साथ मिलाकर उपयोग में लाया जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से बेसन, लाल मसूर की दाल, ओट्स, कस्तूरी हल्दी और सूखी गुलाब की पंखुड़ियों के पाउडर का संतुलित अनुपात शामिल होता है।
क्लींजर पाउडर बनाने के लिए जरूरी नाप और सामग्री
इस प्राकृतिक मिश्रण को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सभी घटकों का पूरी तरह नमी से मुक्त और साफ होना अनिवार्य है। मिश्रण तैयार करने के लिए सामग्री का सटीक अनुपात इस प्रकार रखना चाहिए
- बेसन: चार बड़े चम्मच बारीक पिसा हुआ चना दाल का आटा लें।
- लाल मसूर दाल पाउडर: दो बड़े चम्मच बारीक पिसी हुई लाल मसूर दाल का पाउडर मिलाएं।
- ओट्स पाउडर: दो बड़े चम्मच पिसे हुए ओट्स का सूखा पाउडर शामिल करें।
- कस्तूरी हल्दी: आधा छोटा चम्मच असली कस्तूरी हल्दी पाउडर डालें।
- गुलाब की पंखुड़ियों का पाउडर: एक बड़ा चम्मच छाया में सुखाई गई गुलाब की पंखुड़ियों का पिसा हुआ पाउडर लें।
इन सभी सूखी सामग्रियों को एक साफ और सूखे कांच के बर्तन में निकालें और चम्मच से तब तक मिलाएं जब तक कि सभी चीजें एकसमान न दिखने लगें। इसके बाद इस मिश्रण को एक बिल्कुल सूखे, वायुरोधी कांच के जार में भरकर रख दें। जार के भीतर किसी भी प्रकार की नमी या पानी की बूंद न जाने दें, क्योंकि सूखा रहने पर यह पाउडर बिना किसी परिरक्षक के लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और आपको हर बार पूरी सामग्री को गीला करने की जरूरत नहीं पड़ती।
ऑयली स्किन के लिए पेस्ट बनाने की विधि
जिन लोगों की त्वचा पर सीबम का स्राव अधिक होता है और चेहरा बहुत जल्दी चिपचिपा दिखने लगता है, उनके लिए इस सूखे पाउडर का हल्का मिश्रण बनाना फायदेमंद रहता है। इसके लिए एक छोटा चम्मच तैयार पाउडर किसी छोटी कटोरी में निकालें और उसमें आवश्यकतानुसार शुद्ध गुलाब जल मिलाकर एक चिकना घोल तैयार करें। कई लोग इसमें कच्चा दूध भी मिलाते हैं, लेकिन यदि आपकी त्वचा पर दूध के उपयोग से मुंहासे निकलने या जलन की समस्या रहती है तो इसका प्रयोग बिल्कुल न करें।
तैयार लेप न तो बहुत अधिक गाढ़ा होना चाहिए और न ही पानी की तरह बहने वाला। चेहरे को पहले सादे पानी से गीला करें, फिर इस लेप को उंगलियों की मदद से चेहरे पर फैलाएं। त्वचा को कठोरता से रगड़ने के स्थान पर लगभग एक से दो मिनट तक बेहद कोमल हाथों से गोलाकार गति में मालिश करें। इससे त्वचा के रोमछिद्रों में जमी गंदगी साफ हो जाती है और अतिरिक्त चिकनाई नियंत्रित रहती है।
रूखी त्वचा के लिए सही तरीका
रूखी या बेजान त्वचा वालों को चेहरे की नमी बनाए रखने के लिए इस पाउडर में दही या सामान्य पानी मिलाकर पेस्ट तैयार करना चाहिए। दही मिलाने से लेप अत्यंत मलाईदार बन जाता है, जिससे यह त्वचा पर बेहद आसानी से फैलता है और धोने के बाद भी प्राकृतिक नमी को सोखता नहीं है। इस मिश्रण को लगाते समय भी चेहरे को जोर से रगड़ने से बचना चाहिए।
सफाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चेहरे को सामान्य नल के पानी से पूरी तरह धो लें। गीले चेहरे को तौलिए से रगड़कर पोंछने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर सुखाएं। धोने के तुरंत बाद यदि त्वचा में हल्का खिंचाव महसूस हो, तो अपनी त्वचा की जरूरत के अनुसार कोई हल्का मॉइश्चराइजर अवश्य लगाएं ताकि त्वचा की सुरक्षात्मक परत सुरक्षित बनी रहे।
दैनिक उपयोग और संवेदनशीलता से जुड़े जरूरी नियम
यह मिश्रण पूरी तरह प्राकृतिक घटकों से बना है, फिर भी इसका यह अर्थ नहीं है कि हर व्यक्ति इसे बिना सोचे-समझे रोजाना लगाना शुरू कर दे। मसूर दाल और बेसन के बारीक कण चेहरे की मृत कोशिकाओं को हटाने का काम करते हैं, जो एक प्रकार का हल्का एक्सफोलिएशन है। यदि आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, पहले से लालिमा से प्रभावित है या चेहरे पर सक्रिय मुंहासे मौजूद हैं, तो इसे बार-बार चेहरे पर रगड़ने से सूजन और जलन बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में किसी भी नए घरेलू उपाय को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से बचना चाहिए। शुरुआत में गर्दन या जबड़े के किसी छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करके देखें। यदि लगाने के बाद किसी भी तरह की खुजली, जलन या लाल चकत्ते उभरें, तो इसका प्रयोग तुरंत बंद कर दें। इसके अलावा, आंखों के आसपास की बेहद नाजुक त्वचा और किसी भी कटे या छिले हुए हिस्से पर इस मिश्रण को बिल्कुल न लगाएं।
हल्दी और गुलाब की पंखुड़ियों से जुड़ी सावधानियां
इस उबटन में शामिल की जाने वाली कस्तूरी हल्दी और गुलाब की सूखी पंखुड़ियां मुख्य रूप से त्वचा को एक मनमोहक सौम्य सुगंध और पारंपरिक स्पर्श प्रदान करती हैं। इन्हें किसी प्रकार का रंग गोरा करने वाला चमत्कारी इलाज या किसी गंभीर त्वचा विकार की अचूक दवा नहीं समझा जाना चाहिए। हर इंसान की त्वचा की रासायनिक संरचना और प्रतिक्रिया अलग होती है, इसलिए परिणाम भी भिन्न हो सकते हैं। यदि अतीत में आपको किसी प्राकृतिक लेप से एलर्जी हुई हो, तो सतर्कता बरतना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
इस क्लींजर को अपनी दिनचर्या में बनाए रखने का सबसे सरल नियम यही है कि हमेशा कम मात्रा में ताजा पाउडर बनाकर सुरक्षित रखें। जब भी चेहरा धोना हो, केवल उतनी ही मात्रा चम्मच से निकालें जितनी उस समय आवश्यक हो, ताकि मुख्य जार पूरी तरह सूखा और संक्रमण मुक्त बना रहे।


















