घर के इंटीरियर को खूबसूरत और आरामदायक बनाने के लिए जब नया फर्नीचर बनवाया जाता है, तो परिवार के लोग अक्सर उसके ट्रेंडी डिजाइन, रंगों के संयोजन, पॉलिश फिनिशिंग और बजट पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, फर्नीचर तैयार होकर घर में आ जाने के बाद एक ऐसी छिपी हुई समस्या सामने आती है जो महंगे से महंगे काठ को भी धीरे-धीरे तबाह कर सकती है, और वह है दीमक का प्रकोप। दीमक का हमला शुरुआत में इतना खामोश, बारीक और मामूली होता है कि आम तौर पर लोग इस पर समय रहते ध्यान ही नहीं दे पाते। लकड़ी के निचले जोड़ों, गुप्त कोनों या किनारों पर बारीक लकड़ी का पाउडर जमा होना, सतह पर छोटे-छोटे सुराख या छेद दिखाई देना अथवा छूने पर लकड़ी का हिस्सा हल्का कमजोर महसूस होना इसके स्पष्ट शुरुआती लक्षण होते हैं। यदि इन शुरुआती संकेतों पर तुरंत ध्यान न दिया जाए, तो कुछ ही महीनों में फर्नीचर अंदर से पूरी तरह खोखला हो सकता है। कपड़े रखने की अलमारी, सोने का बेड, घर का मुख्य दरवाजा, बच्चों की स्टडी टेबल और ड्रेसिंग टेबल जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले कीमती सामान में यह परेशानी सबसे अधिक देखी जाती है। यही वजह है कि नया फर्नीचर बनवाते समय सही और प्रतिरोधी लकड़ी का चुनाव करना एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय माना जाता है।
दीमक के हमले का तरीका और लकड़ी को अंदरूनी नुकसान
दीमक की सबसे खतरनाक खासियत यह है कि यह लकड़ी की बाहरी सतह पर सीधा हमला करने के बजाय उसके अंदरूनी हिस्से में पैठ बनाकर नुकसान पहुंचाना शुरू करती है। दीमक लकड़ी के भीतर ही भीतर बारीक सुरंगों का जाल बनाती हुई आगे बढ़ती है और धीरे-धीरे उसकी पूरी ढांचागत मजबूती और सहने की क्षमता को खत्म कर देती है। जब तक लकड़ी के ऊपर कोई छेद, दरार या पाउडर दिखाई देता है, तब तक उसके अंदर का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका होता है। इसके अलावा, कई लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि बाजार से सबसे महंगी और भारी लकड़ी खरीद लेने से दीमक का खतरा हमेशा के लिए टल जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि यदि लकड़ी लगातार सीलन, पानी, हवा की नमी या मिट्टी के सीधे संपर्क में रहती है, तो महंगी से महंगी लकड़ी में भी दीमक लगने का गंभीर जोखिम बना रहता है। इसलिए केवल लकड़ी का महंगा होना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं है, बल्कि लकड़ी की प्राकृतिक गुणवत्ता, उसे सुखाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया, सही सीजनिंग और उचित कीटनाशक ट्रीटमेंट भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।
महानीम यानी बकायन लकड़ी के प्राकृतिक गुण और खासियत
वानस्पतिक और वैज्ञानिक रूप से मेलिया अजेडराक के नाम से जानी जाने वाली लकड़ी को भारत के विभिन्न हिस्सों में बकायन, महानिम या महानीम के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है। इस पेड़ की छाल, पत्तों और लकड़ी के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक रूप से ऐसे जैविक और रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें कीड़ों और लकड़ी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को दूर रखने वाले विशेष गुण देखे गए हैं। इसी प्राकृतिक विशेषता के कारण महानीम की लकड़ी को सामान्य इमारती लकड़ियों की तुलना में कीटों और दीमक के प्रति अपेक्षाकृत अधिक प्रतिरोधी माना जाता है। यदि आप अपने घर के इंटीरियर के लिए ऐसी लकड़ी की तलाश में हैं जो प्राकृतिक रूप से कीड़ों को पनपने से रोकने की क्षमता रखती हो, तो महानीम एक बेहद व्यावहारिक, टिकाऊ और उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है। यही कारण है कि हाल के दिनों में फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में इस लकड़ी को लेकर लोगों की दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ी है।
हालांकि, लकड़ी और इंटीरियर मामलों के विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से मानना है कि महानीम की लकड़ी को आंख बंद करके 100 प्रतिशत दीमक-रोधी मान लेना सही नहीं होगा। दुनिया की कोई भी प्राकृतिक लकड़ी हर प्रकार के वातावरण और परिस्थिति में पूरी तरह दीमक से सुरक्षित नहीं रह सकती। लकड़ी की वास्तविक उम्र, उसमें बची हुई नमी की मात्रा, उसका इस्तेमाल किस स्थान पर किया जा रहा है और लकड़ी की सीजनिंग व प्रोसेसिंग किस तरह की गई है, ये सभी कारक उसकी वास्तविक मजबूती, उम्र और दीमक से बचाव की क्षमता को तय करते हैं।
नमी, सीलन और आसपास के वातावरण का असर
घर के भीतर रखा गया कोई भी फर्नीचर लगातार बदलते मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव, धूल और हवा में मौजूद नमी के संपर्क में रहता है। यदि घर में कपड़े या सामान रखने की अलमारी को किसी ऐसी दीवार से सटाकर रखा गया है जहां बारिश या प्लंबिंग की वजह से सीलन रहती है, तो केवल दीमक-रोधी लकड़ी लगा देने से समस्या हल नहीं होगी। ऐसे मामलों में सबसे पहले दीवार की नमी और सीलन के मूल कारण को दूर करना अनिवार्य होता है। इसी तरह, फर्नीचर के निचले हिस्से को सीधे गीले फर्श, गीली टाइल्स या नम जमीन पर रखने से हमेशा बचना चाहिए। नमी का वातावरण मिलते ही दीमक बहुत तेजी से पनपती है और लकड़ी के भीतर अपना ठिकाना बनाकर उसे खोखला करने लगती है।
दीमक मुक्त फर्नीचर के लिए जरूरी सावधानियां और रख-रखाव के नियम
फर्नीचर के लिए लकड़ी का चुनाव करते समय केवल उसके प्रचलित नाम या आकर्षक विज्ञापनों को देखकर फैसला न लें। खरीदारी करते समय लकड़ी की वास्तविक मजबूती, उसके अच्छी तरह सुखाए जाने (सीजनिंग) की प्रक्रिया और उस पर किए गए एंटी-टर्माइट ट्रीटमेंट की पूरी तकनीकी जानकारी लेना बेहद आवश्यक है। भले ही लकड़ी प्राकृतिक रूप से कीड़ों को दूर रखने वाले गुणों से भरपूर हो, फिर भी उस पर सही पॉलिश, वार्निश और प्रोटेक्टिव कोटिंग की मजबूत परत चढ़ाना उसकी बाहरी और अंदरूनी सुरक्षा को कई गुना बेहतर बना देता है।
इसके साथ ही, घर के अंदरूनी हिस्से में नमी के स्तर को नियंत्रित रखना भी फर्नीचर की उम्र बढ़ाने के लिए जरूरी है। दीवार में पानी का रिसाव, फर्श के पास नमी जमा होना या लंबे समय तक बंद और बिना हवा वाले कमरों का गीला माहौल फर्नीचर की लकड़ी के लिए सबसे बड़ा दुश्मन साबित होता है। इसलिए अपने कीमती फर्नीचर को हमेशा सूखी, साफ और हवादार जगह पर रखें और नियमित रूप से उसकी जांच करते रहें ताकि आपका फर्नीचर सालों-साल मजबूत, सुंदर और दीमक मुक्त बना रहे।



















