ओडिशा सरकार ने भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी विशाल भूमि और अन्य संपत्तियों का ब्योरा खंगालने का एक व्यापक अभियान शुरू करने का एलान किया है। इस वृहद प्रक्रिया के तहत ओडिशा के अलावा देश के अन्य राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे भी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की संपत्तियों की पहचान की जाएगी और उनके आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि भगवान जगन्नाथ की कुल संपत्ति इतनी अधिक है कि उनके बैंक खातों में 1912 करोड़ रुपये जमा हैं और उनके पास इतनी जमीन है कि उस पर एक पूरा शहर बसाया जा सकता है।
कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन का बड़ा बयान
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने राजधानी में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के स्वामित्व वाली जमीनों, उन पर हुए अवैध कब्जों, मौजूदा भू-अभिलेखों और संपत्तियों के निपटान से जुड़े कानूनों की बारीकी से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान चर्चा में यह बात सामने आई कि प्रशासन अब तक लगभग 36,000 एकड़ भूमि की शिनाख्त कर चुका है जो भगवान जगन्नाथ के नाम पर दर्ज है।
चौथाई जमीन पर अवैध कब्जा
पहचान की गई कुल भूमि का लगभग 25 से 26 प्रतिशत हिस्सा वर्तमान में अतिक्रमण की चपेट में है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मंदिर प्रशासन की एक चौथाई से अधिक जमीन पर अन्य लोगों का अवैध कब्जा बना हुआ है। सरकार अब इन सभी भूखंडों के दस्तावेजों का गहराई से परीक्षण करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सी जमीन किस भौगोलिक स्थिति में है, उस पर किसका कब्जा चल रहा है और किन विशिष्ट मामलों में कानूनी कार्रवाई या बेदखली की आवश्यकता है।
पाकिस्तान के सिंध तक फैली हैं संपत्तियां
इस पूरी प्रक्रिया का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह जानकारी है जिसके अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक जमीनें वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी स्थित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त पड़ोसी देश पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी मंदिर की जमीन होने के तथ्य सामने आए हैं। सरकार क्रमिक रूप से ऐसी सभी जमीनों की तलाश और पहचान का कार्य आगे बढ़ाएगी।
सुरक्षा और वित्तीय मजबूती की रणनीति
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल जमीन से अवैध कब्जा हटाना भर नहीं है, बल्कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक धरोहरों और संपत्तियों को कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित करना चाहता है। मंदिर की इन भूमियों को संरक्षित करने से भविष्य में मंदिर प्रशासन की आय में वृद्धि होगी और एक मजबूत कॉर्पस फंड का निर्माण किया जा सकेगा। इस कोष का उपयोग मंदिर के भावी विकास कार्यों और सुचारू प्रबंधन के लिए किया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर मामले में जबरन बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मंदिर की जमीन पर निवास कर रहा है और वह मौजूदा कानूनों के तहत अपनी स्थिति को नियमित कराने के लिए योग्य है, तो उसे नियमानुसार आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार प्रशासन एक तरफ भूमि वापस लेने का अभियान चलाएगा तो दूसरी तरफ पात्र मामलों का समाधान कानूनी दायरे में रहकर करेगा।
भूमि निपटान नीति में संशोधन की तैयारी
कानून मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2003 में लागू की गई समान सेटलमेंट नीति में अब बदलाव किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सरकार का आकलन है कि इस पुरानी प्रक्रिया में उचित संशोधन करने से जमीन से जुड़े मुकदमों और मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। इस संबंध में कई दौर की समीक्षा बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और नियमों में बदलाव का खाका तैयार किया जा रहा है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जो नागरिक कानूनी रूप से पात्र पाए जाएंगे, उन्हें निर्धारित नियमों के तहत अपनी भूमि नियमित करवाने की सुविधा मिलेगी। इसके विपरीत, जो लोग इस पात्रता के दायरे में नहीं आएंगे या जिनकी जमीन पर पूर्णतः अवैध कब्जा पाया जाएगा, उन भूखंडों को वापस मंदिर प्रशासन के सीधे नियंत्रण में ले लिया जाएगा।
बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता की ओर कदम
ओडिशा सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस महत्त्वाकांक्षी पहल के लागू होने से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की संपत्तियों का रखरखाव और प्रबंधन अधिक सुचारू हो सकेगा। जब अतिक्रमण वाली भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा और कानूनी मामलों का निष्पादन हो जाएगा, तब मंदिर के पास अपनी संपत्ति का एक पारदर्शी और स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध होगा।
इसके अतिरिक्त, इन जमीनों से प्राप्त होने वाली संभावित आय का भी अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकेगा। सरकार का मूल लक्ष्य धार्मिक संपत्ति की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आने वाले समय के लिए उसके आर्थिक आधार को पूरी मजबूती देना है।
इस बीच, मंदिर के खजाने से जुड़े मामलों में पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का 1978 की सूची से पूरा मिलान भी हो चुका है जिसमें सभी बहुमूल्य सामान सुरक्षित पाए गए हैं।





















