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ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला, पाकिस्तान के सिंध में भी खोजी जाएगी भगवान जगन्नाथ की जमीनओडिशा
9 सित॰ 2026, 9:02 pm (1 घंटे पहले)· 2

ओडिशा सरकार का बड़ा फैसला, पाकिस्तान के सिंध में भी खोजी जाएगी भगवान जगन्नाथ की जमीन

ओडिशा सरकार ने श्री जगन्नाथ मंदिर की संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए देश-विदेश में फैली जमीन की जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में भी मंदिर से जुड़ी भूमि मौजूद है।

ओडिशा सरकार ने भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी विशाल भूमि और अन्य संपत्तियों का ब्योरा खंगालने का एक व्यापक अभियान शुरू करने का एलान किया है। इस वृहद प्रक्रिया के तहत ओडिशा के अलावा देश के अन्य राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे भी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की संपत्तियों की पहचान की जाएगी और उनके आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि भगवान जगन्नाथ की कुल संपत्ति इतनी अधिक है कि उनके बैंक खातों में 1912 करोड़ रुपये जमा हैं और उनके पास इतनी जमीन है कि उस पर एक पूरा शहर बसाया जा सकता है।

कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन का बड़ा बयान

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने राजधानी में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के स्वामित्व वाली जमीनों, उन पर हुए अवैध कब्जों, मौजूदा भू-अभिलेखों और संपत्तियों के निपटान से जुड़े कानूनों की बारीकी से समीक्षा की गई। बैठक के दौरान चर्चा में यह बात सामने आई कि प्रशासन अब तक लगभग 36,000 एकड़ भूमि की शिनाख्त कर चुका है जो भगवान जगन्नाथ के नाम पर दर्ज है।

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चौथाई जमीन पर अवैध कब्जा

पहचान की गई कुल भूमि का लगभग 25 से 26 प्रतिशत हिस्सा वर्तमान में अतिक्रमण की चपेट में है। इसका सीधा अर्थ यह है कि मंदिर प्रशासन की एक चौथाई से अधिक जमीन पर अन्य लोगों का अवैध कब्जा बना हुआ है। सरकार अब इन सभी भूखंडों के दस्तावेजों का गहराई से परीक्षण करेगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन सी जमीन किस भौगोलिक स्थिति में है, उस पर किसका कब्जा चल रहा है और किन विशिष्ट मामलों में कानूनी कार्रवाई या बेदखली की आवश्यकता है।

पाकिस्तान के सिंध तक फैली हैं संपत्तियां

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे चौंकाने वाला पहलू वह जानकारी है जिसके अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी कुछ ऐतिहासिक जमीनें वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भी स्थित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त पड़ोसी देश पाकिस्तान के सिंध इलाके में भी मंदिर की जमीन होने के तथ्य सामने आए हैं। सरकार क्रमिक रूप से ऐसी सभी जमीनों की तलाश और पहचान का कार्य आगे बढ़ाएगी।

सुरक्षा और वित्तीय मजबूती की रणनीति

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल जमीन से अवैध कब्जा हटाना भर नहीं है, बल्कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक धरोहरों और संपत्तियों को कानूनी रूप से पूरी तरह सुरक्षित करना चाहता है। मंदिर की इन भूमियों को संरक्षित करने से भविष्य में मंदिर प्रशासन की आय में वृद्धि होगी और एक मजबूत कॉर्पस फंड का निर्माण किया जा सकेगा। इस कोष का उपयोग मंदिर के भावी विकास कार्यों और सुचारू प्रबंधन के लिए किया जाएगा।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर मामले में जबरन बेदखली की कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मंदिर की जमीन पर निवास कर रहा है और वह मौजूदा कानूनों के तहत अपनी स्थिति को नियमित कराने के लिए योग्य है, तो उसे नियमानुसार आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। इस प्रकार प्रशासन एक तरफ भूमि वापस लेने का अभियान चलाएगा तो दूसरी तरफ पात्र मामलों का समाधान कानूनी दायरे में रहकर करेगा।

भूमि निपटान नीति में संशोधन की तैयारी

कानून मंत्री ने जानकारी दी कि वर्ष 2003 में लागू की गई समान सेटलमेंट नीति में अब बदलाव किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। सरकार का आकलन है कि इस पुरानी प्रक्रिया में उचित संशोधन करने से जमीन से जुड़े मुकदमों और मामलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। इस संबंध में कई दौर की समीक्षा बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और नियमों में बदलाव का खाका तैयार किया जा रहा है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जो नागरिक कानूनी रूप से पात्र पाए जाएंगे, उन्हें निर्धारित नियमों के तहत अपनी भूमि नियमित करवाने की सुविधा मिलेगी। इसके विपरीत, जो लोग इस पात्रता के दायरे में नहीं आएंगे या जिनकी जमीन पर पूर्णतः अवैध कब्जा पाया जाएगा, उन भूखंडों को वापस मंदिर प्रशासन के सीधे नियंत्रण में ले लिया जाएगा।

बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता की ओर कदम

ओडिशा सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस महत्त्वाकांक्षी पहल के लागू होने से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की संपत्तियों का रखरखाव और प्रबंधन अधिक सुचारू हो सकेगा। जब अतिक्रमण वाली भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार हो जाएगा और कानूनी मामलों का निष्पादन हो जाएगा, तब मंदिर के पास अपनी संपत्ति का एक पारदर्शी और स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध होगा।

इसके अतिरिक्त, इन जमीनों से प्राप्त होने वाली संभावित आय का भी अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकेगा। सरकार का मूल लक्ष्य धार्मिक संपत्ति की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आने वाले समय के लिए उसके आर्थिक आधार को पूरी मजबूती देना है।

इस बीच, मंदिर के खजाने से जुड़े मामलों में पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का 1978 की सूची से पूरा मिलान भी हो चुका है जिसमें सभी बहुमूल्य सामान सुरक्षित पाए गए हैं।

सवाल-जवाब

भगवान जगन्नाथ के पास कुल कितनी जमीन की पहचान की जा चुकी है?
अब तक श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से जुड़ी लगभग 36,000 एकड़ जमीन की पहचान की जा चुकी है।
पहचान की गई जमीन में से कितने प्रतिशत हिस्से पर कब्जा है?
पहचान की गई कुल जमीन का लगभग 25 से 26 प्रतिशत हिस्सा अतिक्रमण के अधीन बताया जा रहा है।
भगवान जगन्नाथ की जमीन किस दूसरे देश में भी होने की बात कही गई है?
कानून मंत्री ने जानकारी दी है कि मंदिर से जुड़ी कुछ जमीन पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में भी मौजूद है।
ओडिशा सरकार किस पुरानी नीति में बदलाव करने जा रही है?
सरकार वर्ष 2003 में लागू की गई समान सेटलमेंट नीति में संशोधन करने की तैयारी कर रही है।
मंदिर के बैंक खातों में कितनी राशि जमा है?
भगवान जगन्नाथ के बैंक खातों में 1,912 करोड़ रुपये पड़े हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 मिनट पहले

यह खबर केवल भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जटिल कानूनी और कूटनीतिक चुनौती है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत तक फैली संपत्तियों को वापस लेना या उनकी सुध लेना बिना अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय कानूनी तंत्र के संभव नहीं होगा। वहीं, देश के भीतर 26 प्रतिशत अतिक्रमण को हटाना एक कड़ा प्रशासनिक और न्यायिक परीक्षण साबित होगा, जिसमें टाइटल सूट और बेदखली के मुकदमों की लंबी कतार लग सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 मिनट पहले

यह आर्थिक और कॉरपोरेट गवर्नेंस के दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम है। 1912 करोड़ रुपये की बैंक जमा और हजारों एकड़ जमीन का सही मुद्रीकरण और प्रबंधन मंदिर के वित्तीय कॉरपस फंड को अत्यधिक मजबूती दे सकता है। हालांकि, व्यावसायिक और अचल संपत्ति के मामलों में भूमि की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करना, और घरेलू अतिक्रमण के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से परे संपत्तियों के प्रबंधन में लंबी विधिक प्रक्रिया व प्रशासनिक लागत शामिल होगी, जिसका असर मंदिर की भविष्य की आय और आर्थिक परिसंपत्तियों के मूल्यांकन पर पड़ेगा।

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