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भारत के इन पांच खास इलाकों में दिखाई देता है बारह साल में एक बार खिलने वाला दुर्लभ नीलाकुरिंजी फूलट्रेंड्स
1 सित॰ 2026, 4:05 pm (62 दिन पहले)· 3

भारत के इन पांच खास इलाकों में दिखाई देता है बारह साल में एक बार खिलने वाला दुर्लभ नीलाकुरिंजी फूल

भारत के पश्चिमी घाट और दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला नीलाकुरिंजी एक ऐसा दुर्लभ फूल है जो अपनी खूबसूरती और लंबे जीवन चक्र के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिक रूप से इसे स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना कहा जाता है और यह देश की चुनिंदा पांच जगहों पर खिलता है।

भारत की प्राकृतिक सुंदरता में फूलों का बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन कुछ वनस्पतियां अपनी अद्भुत बनावट और अनोखे जीवन चक्र की वजह से पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन जाती हैं। नीलाकुरिंजी एक ऐसा ही बेहद मशहूर फूल है जो जब खिलता है तो पश्चिमी घाट के बड़े हिस्सों को नीले और बैंगनी रंगों की एक खूबसूरत चादर से ढक देता है।

नीलाकुरिंजी का वैज्ञानिक परिचय और जीवन चक्र

इस अद्भुत पौधे को वैज्ञानिक भाषा में स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना कहा जाता है। यह अपने लंबे अंतराल पर एक साथ भारी मात्रा में फूल देने की खासियत के लिए जाना जाता है। इसकी सबसे प्रसिद्ध प्रजाति में लगभग हर बारह साल में एक बार बड़े पैमाने पर फूल खिलते हैं। हालांकि, इस समूह की अलग-अलग प्रजातियों और भौगोलिक स्थितियों के आधार पर इसके खिलने का चक्र भिन्न भी हो सकता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए इस नजारे को देखना एक बेहद खास अनुभव होता है।

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मुन्नार और एराविकुलम नेशनल पार्क

नीलाकुरिंजी का नाम आते ही सबसे पहले मुन्नार का जिक्र आता है। जब यह खूबसूरत फूल एराविकुलम नेशनल पार्क और उसके आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में खिलता है, तो पूरा भूभाग नीले और बैंगनी रंगों के आगोश में समा जाता है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह दृश्य किसी सपने जैसा होता है।

कोडाइकनाल की वादियां

तमिलनाडु का लोकप्रिय हिल स्टेशन कोडाइकनाल भी पश्चिमी घाट के भौगोलिक दायरे में ही स्थित है। इस क्षेत्र के ऊंचे इलाकों और प्राकृतिक घास के मैदानों में स्ट्रोबिलैन्थिस प्रजाति के पौधे बहुतायत में पाए जाते हैं। जब फूलों के खिलने का मौसम आता है, तो यहां के पहाड़ी रास्ते और घाटियां बेहद मनमोहक रूप ले लेती हैं।

नीलगिरी की पहाड़ियां

नीलगिरी का पूरा क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता और घने घास के मैदानों के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। पश्चिमी घाट की श्रृंखलाओं में मिलने वाली कई अनूठी वनस्पतियां इस क्षेत्र की शोभा बढ़ाती हैं। यहां के कुछ विशेष भागों में भी कुरिंजी प्रजाति के फूल देखने को मिल जाते हैं, हालांकि इनका सही समय पौधे की प्रजाति पर निर्भर करता है。

पलानी और अन्नामलाई की पहाड़ियां

पलानी की पहाड़ियां अपनी अनूठी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए जानी जाती हैं। पश्चिमी घाट का हिस्सा होने के कारण यह क्षेत्र कई दुर्लभ पादप प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा केरल और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित अन्नामलाई की पहाड़ियां अपने दुर्गम रास्तों और हरी-भरी वनस्पतियों के लिए पहचानी जाती हैं, जहां कुछ ऊंचाई वाले स्थानों पर इन खास फूलों के होने की मौजूदगी दर्ज की गई है।

सवाल-जवाब

नीलाकुरिंजी फूल कितनी बार खिलता है?
इसकी सबसे प्रसिद्ध प्रजाति में लगभग हर बारह साल में एक बार एक साथ फूल खिलते हैं।
नीलाकुरिंजी का वैज्ञानिक नाम क्या है?
इस पौधे को वैज्ञानिक रूप से स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना (Strobilanthes kunthiana) कहा जाता है।
यह फूल भारत में मुख्य रूप से कहाँ पाया जाता है?
यह मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के पहाड़ी इलाकों जैसे मुन्नार, कोडाइकनाल, नीलगिरी, पलानी और अन्नामलाई की पहाड़ियों में पाया जाता है।
मुन्नार में यह फूल कहाँ मुख्य रूप से दिखता है?
यह एराविकुलम नेशनल पार्क और उसके आसपास के ऊंचे इलाकों में खिलता है।
नीलाकुरिंजी के खिलने पर किस रंग की चादर बनती है?
इसके खिलने पर पूरा इलाका नीले और बैंगनी रंगों में डूब जाता है।
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