रसोईघर में रोजमर्रा के काम के दौरान प्याज के सूखे छिलके आम तौर पर कचरे का हिस्सा बनकर डस्टबिन में फेंक दिए जाते हैं। बागवानी के शौकीनों के लिए यही बेकार समझे जाने वाले छिलके गमलों और पौधों के लिए बेहद उपयोगी जैविक खाद बन सकते हैं। सोशल मीडिया पेज अनोखे आंगन से जुड़ी निरुपमा शुक्ला ने इन छिलकों का इस्तेमाल करके घर पर ही पौधों के लिए बेहतरीन लिक्विड फर्टिलाइजर तैयार करने का बेहद सरल तरीका सामने रखा है। इस प्रक्रिया में किसी भारी-भरकम खर्च या जटिल तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि घर में मौजूद बुनियादी चीजों से ही यह पोषण युक्त घोल तैयार हो जाता है।
इस घरेलू खाद को बनाने के लिए केवल प्याज के सूखे छिलके, साधारण पानी और तीन से चार दिनों का धैर्य चाहिए। हालांकि, घर पर तैयार की गई किसी भी तरह की खाद को पौधों में डालते समय उसकी मात्रा, तनुकरण और उपयोग के सही नियमों को समझना बेहद आवश्यक है ताकि पौधों को नुकसान न पहुंचे।
प्याज के छिलकों से तरल खाद बनाने की आसान विधि
इस घरेलू प्रक्रिया की शुरुआत प्याज के सूखे छिलकों को फेंकने के बजाय किसी साफ डिब्बे, बाल्टी या गहरे बर्तन में जमा करने से होती है। जब आपके पास पर्याप्त मात्रा में छिलके जमा हो जाएं, तो उन्हें एक बर्तन में डालकर ऊपर से इतना सादा पानी भर दें कि सारे छिलके पानी में पूरी तरह डूब जाएं। इसके उपरांत उस बर्तन को किसी ढक्कन से अच्छी तरह ढककर धूप से दूर किसी छायादार स्थान पर रख देना चाहिए।
विधि के मुताबिक इस पूरे मिश्रण को करीब 3 से 4 दिनों तक भीगने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस समयावधि के दौरान पानी का रंग धीरे-धीरे बदलकर गहरा लाल या भूरा हो जाता है, जिसका अर्थ है कि छिलकों के पोषक तत्व पानी में घुल चुके हैं। निर्धारित समय पूरा होने पर इस मिश्रण को किसी बारीक छन्नी या साफ सूती कपड़े की मदद से छान लेना चाहिए, जिससे छिलके अलग हो जाएं और नीचे शुद्ध तरल घोल बच जाए। छन्नी में बचे हुए ठोस छिलकों को भी फेंकने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें कम्पोस्ट बिन या खाद के गड्ढे में डाला जा सकता है।
पौधों में इस घोल को डालने का सही तरीका
घर में तैयार किए गए किसी भी पोषक घोल को सीधे पौधों में उंडेलना हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि अलग-अलग पौधों की सहनशक्ति भिन्न होती है। छाने गए मूल अर्क को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय उसमें पानी मिलाकर हल्का किया जाता है। साझा किए गए सुझाव के मुताबिक इस तैयार गाढ़े घोल में लगभग 10 गुना सादा पानी मिलाना जरूरी है। अच्छी तरह पतला करने के बाद ही इसे गमलों की मिट्टी में तने से थोड़ी दूरी बनाकर जड़ों के आसपास डालना चाहिए।
यदि आप पहली बार इस जैविक घोल का उपयोग कर रहे हैं, तो एक साथ सभी गमलों में डालने के बजाय किसी एक पौधे या उसके छोटे हिस्से पर थोड़ी मात्रा डालकर परीक्षण करना चाहिए। पौधे पर इसके असर को देखने और समझने के बाद ही बाकी पौधों पर इसका नियमित प्रयोग शुरू करें। बहुत ज्यादा सांद्रता या अत्यधिक मात्रा में लिक्विड खाद देने से मिट्टी की उर्वरता और पौधे की सेहत पर विपरीत असर पड़ सकता है।
पत्तियों पर छिड़काव और सावधानियां
इस पतले घोल को साफ स्प्रे बोतल में भरकर पौधों की पत्तियों पर सीधे छिड़कने की सलाह भी दी जाती है। पत्तियों पर किसी भी तरल का छिड़काव करते समय दिन के समय का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। तेज और कड़ी धूप के दौरान पत्तियों पर छिड़काव करने से बचना चाहिए और इसके लिए सुबह या देर शाम का समय चुनना सबसे सुरक्षित रहता है। पत्तियों पर बड़े पैमाने पर छिड़काव करने से पहले कुछ चुनिंदा पत्तियों पर थोड़ा सा छिड़ककर जांच कर लेना समझदारी भरा कदम है।
प्याज के छिलकों में पौधों के विकास के लिए जरूरी खनिज तत्व पाए जाते हैं, इसी कारण घरेलू गार्डनिंग में इसका प्रयोग किया जाता है। फिर भी यह समझना जरूरी है कि यह तरल खाद किसी गंभीर फंगल इन्फेक्शन या कीड़ों के भारी प्रकोप का अचूक इलाज नहीं है। यदि पौधे में कोई गंभीर बीमारी या कीट लग गए हैं, तो केवल इस घोल पर निर्भर रहने के बजाय समस्या के वास्तविक कारण की पहचान कर उचित कदम उठाने चाहिए।
इस्तेमाल का अंतराल और जरूरी बातें
निरुपमा शुक्ला द्वारा साझा किए गए तरीके के अनुसार इस लिक्विड खाद को पौधों में करीब 8 से 10 दिनों के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। इसके बावजूद हर पौधे की जरूरत एक समान नहीं होती और किसी एक नियम को सभी पौधों पर आंख मूंदकर लागू नहीं किया जाना चाहिए। गमले का आकार, पौधे की प्रजाति, मिट्टी की गुणवत्ता, मौजूदा मौसम और पहले से दी जा रही खादों की मात्रा को ध्यान में रखकर ही इसके इस्तेमाल का फैसला करना चाहिए।



















