राजस्थान के दौसा शहर में ऐतिहासिक पहचान रखने वाले गांधी सर्किल से सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है. सार्वजनिक स्थल पर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक सामने दो युवतियों द्वारा बनाई गई एक रील इंटरनेट पर तेजी से फैल रही है. फुटेज में दोनों लड़कियां गांधी प्रतिमा से चिपककर विलाप करने का नाटक करती दिखाई दे रही हैं. इस दौरान वे ठेठ अंदाज में कहती नजर आ रही हैं कि अरे बापू तो कहा गयो. इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए जाने के बाद से यह क्लिप लगातार साझा की जा रही है और इंटरनेट यूजर्स के बीच आक्रोश का केंद्र बन गई है.
गांधी प्रतिमा के पास विलाप के अभिनय का पूरा दृश्य
वायरल फुटेज में देखा जा सकता है कि दोनों युवतियां योजनाबद्ध तरीके से गांधी प्रतिमा के पास पहुंचती हैं. प्रतिमा के बिल्कुल करीब जाकर वे उससे लिपट जाती हैं और जोर-जोर से रोने का दिखावा करने लगती हैं. उनके हाव-भाव और बोलने की शैली किसी बड़ी त्रासदी पर मातम मनाने जैसी गढ़ी गई है. वीडियो में सुनाई दे रहे संवाद अरे बापू तो कहा गयो से यह साफ झलकता है कि यह पूरा दृश्य केवल सोशल मीडिया पर व्यूज और ध्यान खींचने के लिए फिल्माया गया था. दौसा के प्रमुख गांधी सर्किल पर दिनदहाड़े इस तरह का वीडियो शूट किए जाने के कारण स्थानीय लोगों और इंटरनेट यूजर्स की नजर इस पर तुरंत टिक गई.
द नौटंकी सिस्टर्स अकाउंट से पोस्ट हुआ वीडियो
यह पूरी रील इंस्टाग्राम पर द नौटंकी सिस्टर्स नाम के यूजर अकाउंट से अपलोड की गई थी. इस हैंडल से शेयर होने के बाद ही यह वीडियो अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी प्रसारित होने लगा. वीडियो में नजर आ रही दोनों युवतियों की पहचान, उनके इस वीडियो को बनाने का वास्तविक उद्देश्य और शूटिंग की सटीक तारीख के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. यह भी साफ नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किसी मजाक का हिस्सा था या फिर किसी विशेष संदर्भ में इसे रिकॉर्ड किया गया था. फिलहाल बिना किसी पृष्ठभूमि के सामने आए इस वीडियो ने बड़े पैमाने पर लोगों को असहज कर दिया है.
कमेंट सेक्शन में फूटा यूजर्स का गुस्सा
रील के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रतिक्रियाओं की झड़ी लगा दी. ज्यादातर लोगों ने राष्ट्रपिता की प्रतिमा के साथ इस तरह का अमर्यादित मजाक करने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है. वीडियो के कमेंट बॉक्स में एक यूजर ने तीखा तंज कसते हुए टिप्पणी की, “जिंदा होता बापू तो तुमको देखकर मर जाता.”
वहीं एक अन्य यूजर ने युवतियों को नसीहत भरे अंदाज में लिखा, “मजाक नहीं करनी चाहिए, तुम इनके बारे में जानते होते तो यह वीडियो नहीं बनाते.” सोशल मीडिया पर कई लोगों का मानना है कि रचनात्मकता और मजाक की भी एक सीमा होनी चाहिए, विशेष रूप से जब बात राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक विभूतियों की प्रतिमाओं की हो. हालांकि कुछ लोग इसे महज युवाओं का एक बचकाना मजाक मानकर नजरअंदाज करने की बात भी कह रहे हैं.
पब्लिक स्पेस में रील कल्चर और मर्यादा की बहस
हाल के दिनों में स्मार्टफोन और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो प्लेटफॉर्म्स की पहुंच बढ़ने के साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर रील्स बनाने की होड़ मची हुई है. दौसा का यह मामला अकेला नहीं है, लेकिन इसने सार्वजनिक स्मारकों और ऐतिहासिक धरोहरों के सम्मान को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है. चंद लाइक्स और फॉलोअर्स जुटाने के लिए ऐतिहासिक प्रतिमाओं से लिपटकर ड्रामा करना कई हलकों में गैर-जिम्मेदाराना आचरण माना जा रहा है. दौसा के गांधी सर्किल पर हुई इस घटना के पीछे का पूरा घटनाक्रम अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, फिर भी इसने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया की आजादी की सीमा कहां खत्म होनी चाहिए.



















