सुबह के नाश्ते या दोपहर के भोजन में जब रोजमर्रा के साधारण व्यंजनों से हटकर कुछ अलग और चटपटा खाने का विचार बने, तो रसोई में मौजूद विविध खाद्य सामग्रियों का यह खास मेल एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है। घरों में अक्सर कई प्रकार की दालें, अलग-अलग अनाज के आटे और ताजी हरी सब्जियां रखी होती हैं। इन सभी को आपस में मिलाकर एक अनोखा व्यंजन बनाया जा सकता है, जिसे ढोकला बाटी कहा जाता है। इसमें छप्पन किस्म के घटकों का समावेश कर एक समृद्ध स्वाद रचा जाता है, जो बाहर से बेहद कुरकुरा और भीतर से एकदम मुलायम बनता है। यह पारंपरिक बाटी जैसा आभास देता है, पर अपनी पौष्टिकता और तीखेपन के कारण सामान्य बाटी से बिल्कुल जुदा पहचान रखता है।
दालों और चावल का दरदरा आधार तैयार करने की विधि
इस व्यंजन को बनाने की शुरुआत इसके मुख्य आधार से होती है। इसके लिए मूंग की दाल, चने की दाल, मसूर, उड़द, मोठ का मोगर, मूंग मोगर, साबुत काली उड़द और चावल को स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है। इन सभी अनाजों व दालों को लगभग तीन घंटे तक पानी में भिगोकर छोड़ दें ताकि वे पर्याप्त रूप से फूल जाएं। निर्धारित समय बीतने पर सारा अतिरिक्त पानी निथार लें। इसके पश्चात सिलबट्टे या मिक्सी में इन भीगी दालों को हल्का दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि इसका बारीक लेप नहीं बनाना है, क्योंकि हल्का मोटापन ही सिकने के बाद बाटी को एक लाजवाब बनावट और कुरकुरापन प्रदान करता है।
विविध अनाजों के आटों का संतुलित मिश्रण
दालों का मिश्रण तैयार हो जाने के बाद एक खुले मुंह के बड़े बर्तन अथवा परात में करीब डेढ़ कप मोटा पिसा गेहूं का आटा निकालें। इस मुख्य आधार में बेसन, सूजी, बाजरा, मक्की, रागी, चना मिक्स, ज्वार, सिंघाड़ा और राजगिरा के आटे मिलाए जाते हैं। गेहूं के आटे को सबसे प्रमुख घटक रखा जाता है और शेष आटों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में शामिल किया जाता है ताकि मिश्रण बंध सके। यदि किसी घर में इनमें से कुछ विशेष अनाज मौजूद न हों, तो चिंता की कोई बात नहीं है। जो भी अनाज या दलहन रसोई में सुलभ हों, उनके साथ भी यह तैयारी की जा सकती है। इससे स्वाद में थोड़ा फर्क जरूर दिखेगा, लेकिन व्यंजन का मूल रूप और बनाने की प्रक्रिया सरल बनी रहेगी।
सुगंधित मसालों और जड़ी-बूटियों का तड़का
सूखे आटों के मिश्रण में अब भारतीय मसालों की समृद्ध सुगंध जोड़ी जाती है। इसमें अजवाइन, साबुत जीरा, दरदरा कुटा धनिया, काली मिर्च, सौंफ, पिसी हुई लौंग, सूखी कसूरी मेथी और सूखा पुदीना मिलाया जाता है। अतिरिक्त स्वाद और खस्तापन लाने के लिए हाथ से मसली हुई मूंग दाल की मंगौड़ी या वड़ी भी डाली जा सकती है। इसके उपरांत तीखी लाल मिर्च का चूर्ण, गरम मसाला, थोड़ी हल्दी और सुगंधित हींग डालें। अंदरूनी बनावट को हल्का रखने हेतु चुटकी भर बेकिंग सोडा तथा पापड़ खार का सीमित इस्तेमाल करें। अंत में सफेद तिल, काले तिल, थोड़ी सी चीनी, गुलाबी नमक और सामान्य खाने वाला नमक स्वादानुसार मिलाएं। मसालों के इस अनुपात को घर के सदस्यों की पसंद के अनुसार घटाया या बढ़ाया जा सकता है।
हरी सब्जियों और जड़ी-बूटियों का समावेश
मसालों के बाद ताजे हरे तत्वों की बारी आती है। मिश्रण में बारीक कटी हरी मिर्च, लाल मिर्च, स्प्रिंग अनियन, कटी हुई पालक, प्याज, पुदीने की ताजी पत्तियां, करी पत्ता, ताजे हरे मटर के दाने और हरा धनिया शामिल करें। इसके साथ ही अदरक और लहसुन का कुटा पेस्ट तथा लगभग दो बड़े चम्मच कुकिंग तेल का मोयन डालें। हरी पत्तियां और सब्जियां बाटी को भीतर से नमी, ताजगी और प्राकृतिक महक देती हैं। यदि यह व्यंजन बच्चों के लिए परोसा जा रहा हो, तो हरी और लाल मिर्च की मात्रा में कमी की जा सकती है ताकि तीखापन संतुलित रहे।
सख्त आटा गूंथना और मनचाहा आकार देना
अब पहले से पीसकर रखी गई दरदरी दालों को आटों और सब्जियों के इस सूखे मिश्रण में उड़ेल दें। सभी सामग्रियों को हाथों से आपस में भली-भांति एकसार करें। इसके बाद आवश्यकतानुसार बूंद-बूंद करके थोड़ा पानी छिड़कें और एक सख्त आटा गूंथकर तैयार करें। आटा गीला या बहुत ढीला नहीं होना चाहिए, अन्यथा बाटी का गोल आकार बिगड़ सकता है और वे अंदर से ठीक से नहीं सिकेंगी। तैयार गूंधे हुए आटे से नींबू के आकार की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें और हथेलियों के बीच दबाते हुए गोल बाटियां बनाएं। प्रत्येक लोई के मध्य भाग में अंगूठे या उंगली की सहायता से हल्का सा गड्ढा बना दें। ऐसा करने से आंच अंदर तक आसानी से पहुंचती है, बाटी भली-भांति पकती है और उसे पारंपरिक बाटी का सुंदर स्वरूप मिलता है।
सेंकने का तरीका और परोसने का अंदाज
आकार देने के उपरांत इन बाटियों को पकाने के कई सुविधाजनक तरीके अपनाए जा सकते हैं। इन्हें बाटी मेकर, पुराने घरेलू ओवन, एयर फ्रायर अथवा अप्पे वाले सांचे में आसानी से पकाया जा सकता है। धीमी अथवा मध्यम आंच पर बाटियों को चारों तरफ से पलटते हुए धीरे-धीरे सेकना चाहिए। जब उनका बाहरी आवरण हल्का बादामी और कुरकुरा हो जाए तथा सतह पर स्वाभाविक दरारें दिखने लगें, तब समझें कि बाटी भीतर तक पक चुकी है। अब इन्हें आंच से उतार लें। गर्मागर्म बाटी को बीच से हल्का दबाकर तोड़ें और शुद्ध देसी घी में अच्छी तरह डुबोएं। इसे तीखी लाल मिर्च वाली लहसुन की चटनी, ताजा दही अथवा पारंपरिक पंचमेल दाल के साथ परोसें। दालों और मसालों का यह अद्भुत संगम भोजन की थाली को एक शाही और अनोखा जायका देता है।
सामग्रियों के चयन में लचीलापन
इस व्यंजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अनेक सामग्रियों का प्रयोग होता है, परंतु सभी वस्तुओं का उपलब्ध होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी दाल अथवा विशेष अनाज के न होने पर उपलब्ध रसोई सामग्री से भी इसे बेहद स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। सामग्री के बदलाव से बाटी की सुगंध और बनावट में थोड़ा सा अंतर अवश्य आ सकता है, इसलिए नए सिरे से बनाते समय सभी चीजों का अनुपात संतुलित रखना ही सर्वोत्तम परिणाम देता है।



















