मेघालय विधानसभा में संख्या बल बढ़ने के बाद कोनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली कैबिनेट में फेरबदल को लेकर बातचीत तेज हो गई है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के आठ विधायकों के पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर सत्ता संतुलन बदल चुका है। सात दशक पुराने समीकरणों और हालिया बदलावों के बीच, 60 सदस्यीय सदन में महज 2 सीटों वाली भाजपा अब 10 विधायकों की ताकत के साथ सरकार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की मांग कर रही है।
सत्तारूढ़ गठबंधन में बदला सीटों का गणित
यूडीपी के आठ विधायकों ने 23 सितंबर को भाजपा का दामन थामा था। इस अचानक हुए राजनीतिक घटनाक्रम के कारण यूडीपी के पास सदन में अब केवल 4 विधायक ही बचे हैं। इस बदलाव ने मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) की अंदरूनी साझेदारी पर सीधा असर डाला है। विधायकों की संख्या में हुए इस बड़े इजाफे के बाद भाजपा तीन मंत्रालय और एक उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर रही है, ताकि सरकार में उसकी राजनीतिक हैसियत साफ दिखाई दे सके।
भाजपा मेघालय के प्रवक्ता मारियाहोम खरकरंग ने इस बीच संकेत दिया है कि आने वाले समय में अन्य वरिष्ठ नेता भी भाजपा का रुख कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) में किसी भी तरह की टूट कराने की योजना से साफ इनकार किया है। इस पूरे फेरबदल के लिए जरूरी कागजी औपचारिकताएं विधानसभा सचिवालय को सौंपी जा चुकी हैं और आठों विधायकों के विलय की प्रक्रिया की विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जांच जारी है।
महत्वपूर्ण मंत्रालयों और उपमुख्यमंत्री पद पर नजर
मंत्रिमंडल में बड़ी जिम्मेदारी को लेकर जिन प्रमुख नामों की चर्चा चल रही है, उनमें लखमेन रिम्बुई सबसे आगे हैं। समझा जाता है कि वह उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी चाह रहे हैं। इसके अलावा नोंगपोह के विधायक मेरलबॉर्न सिएम के गृह मंत्रालय और किर्मेन शायला के शहरी मामलों के मंत्रालय पर नजर रखने की चर्चाएं हैं।
वर्तमान में ये सभी विभाग एमडीए सरकार के वरिष्ठ चेहरों के पास हैं। आधिकारिक पोर्टफोलियो आवंटन के अनुसार, मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा खुद वित्त मंत्रालय संभाल रहे हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग के पास गृह (पुलिस) विभाग है और दूसरे उपमुख्यमंत्री स्नियावभालंग धर शहरी मामलों के प्रभारी हैं। इन अहम विभागों के मौजूदा मंत्रियों से हटने या तिनसोंग की जगह किसी अन्य को लाने की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यूडीपी अध्यक्ष की कैबिनेट में स्थिति पर संशय
चर्चा का एक अन्य केंद्र यूडीपी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह का कैबिनेट में भविष्य भी है। राजनीतिक हलकों में लिंगदोह को लेकर बदलाव की संभावना पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है, जबकि बाकी मांगों पर अभी आम सहमति बनना बाकी है। लिंगदोह इस समय ऊर्जा, कपड़ा, जल संसाधन और कराधान जैसे महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 के कैबिनेट फेरबदल के दौरान मेटबाह लिंगदोह और लखमेन रिम्बुई दोनों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था, जबकि उस समय पॉल लिंगदोह और किर्मेन शायला को बाहर का रास्ता दिखाया गया था। दूसरी तरफ, यूडीपी के महासचिव टिटोस्टारवेल चाइने ने लिंगदोह या रिम्बुई को कैबिनेट से हटाए जाने की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंत्रिमंडल में किसी भी तरह के फेरबदल का अंतिम अधिकार केवल मुख्यमंत्री के पास सुरक्षित है।



















