त्योहारों और उपवास के दिनों में खानपान की शुद्धता को लेकर हर कोई सतर्क रहता है। फलाहारी व्यंजनों को तैयार करने में मूंगफली के तेल का व्यापक इस्तेमाल होता है। बाजार में कई ब्रांड्स के तेल उपलब्ध हैं, लेकिन मिलावट के संदेह के कारण घर पर तैयार शुद्ध तेल की बात ही अलग होती है। यदि आपके पास अच्छी गुणवत्ता वाली मूंगफली उपलब्ध है, तो बिना किसी बड़ी मशीन या ऑयल प्रेस के भी शुद्ध तेल निकाला जा सकता है। यह काम साधारण रसोई उपकरणों की मदद से आसानी से पूरा किया जा सकता है।
तेल निकालने के लिए आवश्यक सामग्री और तैयारी
घर में तेल तैयार करने के लिए मुख्य रूप से अच्छी गुणवत्ता की कच्ची मूंगफली की आवश्यकता होती है। इसके अलावा एक मिक्सर ग्राइंडर, थोड़ा गर्म पानी और छानने के लिए साफ सूती या मलमल का कपड़ा चाहिए। मूंगफली का चयन करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि दाने पूरी तरह ताजे हों। उनमें किसी प्रकार की सीलन, बासीपन अथवा अप्रिय गंध नहीं होनी चाहिए। इस्तेमाल करने से पूर्व दानों को अच्छी तरह जांच लें ताकि कोई खराब दाना मिश्रण में न मिले।
मूंगफली को सही तरीके से भूनने की प्रक्रिया
शुरुआत करने के लिए लगभग 500 ग्राम छिलके वाली कच्ची मूंगफली लें। इसे एक भारी तले वाली कड़ाही में डालें। गैस की आंच को मध्यम से धीमी रखें और लगातार चलाते हुए दानों को भूनें। जब छिलका सुनहरा होने लगे और रगड़ने पर आसानी से अलग होने लगे, तब आंच बंद कर दें। मूंगफली को ज्यादा गहरा भूरा न होने दें, क्योंकि अधिक भूनने से तेल में जलने की गंध आ सकती है। वहीं दूसरी ओर, कम भूनने पर तेल में कच्चेपन की महक रह जाती है। भूनने के बाद दानों को पूरी तरह ठंडा होने दें।
मिक्सर में तैयार करें गाढ़ा पेस्ट
जब मूंगफली के दाने ठंडे हो जाएं, तो उन्हें एक कपड़े में रखकर हल्के हाथों से रगड़ें ताकि सारे छिलके आसानी से अलग हो जाएं। साफ किए गए दानों को मिक्सर के जार में डालें। मिक्सर चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मिक्सर को लगातार तेज गति में चलाने के बजाय पल्स मोड में चलाएं और थोड़े-थोड़े अंतराल पर रोककर पीसें। धीरे-धीरे दानों का चूरा बनने लगेगा और फिर वह गाढ़े पेस्ट का रूप ले लेगा। जब पेस्ट की सतह पर चमक नजर आने लगे, तो यह संकेत है कि दानों से प्राकृतिक तेल निकलना शुरू हो चुका है।
हाथों से गूंधकर और छानकर निकालें तेल
तैयार पेस्ट को किसी चौड़ी प्लेट अथवा परात में निकाल लें। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा करके गर्म पानी छिड़कें और हाथों से अच्छी तरह गूंधना शुरू करें। एक साथ अधिक पानी बिल्कुल न डालें। थोड़ी मात्रा में पानी डालकर पेस्ट को लगातार दबाते और मसलते रहें। कुछ देर तक लगातार गूंधने के बाद तेल पेस्ट से अलग होकर बाहर निकलने लगेगा। दिखने वाले तेल को एक बर्तन में इकट्ठा करते जाएं। बचे हुए ठोस हिस्से को मलमल के कपड़े में बांधकर जोर से निचोड़ें, जिससे बचा हुआ तेल भी पूरी तरह बाहर आ जाएगा।
तेल का सुरक्षित भंडारण और इस्तेमाल
निकाले गए तेल को तुरंत उपयोग करने के बजाय पहले अच्छी तरह छान लेना चाहिए। इसे एक साफ और सूखे कांच के जार में भरकर रखें। शुरुआत में तेल थोड़ा धुंधला दिखाई दे सकता है। इसे कुछ घंटों के लिए बिना हिलाए किसी शांत जगह पर रख दें, जिससे तेल में मौजूद बारीक कण तली में बैठ जाएंगे। इसके बाद ऊपर के साफ तेल को मलमल के कपड़े से दोबारा छानकर अलग कर लें। इस तेल को हमेशा साफ, ठंडी और सूखी जगह पर ही रखें। यदि लंबे समय बाद इसमें किसी तरह की अजीब गंध, स्वाद में बदलाव या फफूंदी नजर आए, तो इसका सेवन न करें।
बची हुई खली का रसोई में बेहतर उपयोग
तेल निकालने के बाद जो ठोस मूंगफली की खली बचती है, उसे फेंकने की जरूरत नहीं है। यह प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इस खली को सामान्य आटे में मिलाकर स्वादिष्ट और पौष्टिक पराठे बनाए जा सकते हैं, जिससे पराठों में मूंगफली का बेहतरीन स्वाद आता है। इसके अलावा, इस खली में भुने हुए तिल और गुड़ का पाउडर मिलाकर स्वादिष्ट लड्डू भी तैयार किए जा सकते हैं। किसी भी व्यंजन में इस्तेमाल करने से पहले खली की ताजगी और महक की जांच अवश्य कर लें।



















