घरेलू नुस्खों और सोशल मीडिया ब्यूटी ट्रेंड्स में चमकती त्वचा के लिए चावल के पानी और ठंडक भरी ताज़गी के लिए गुलाब जल को टोनर के रूप में इस्तेमाल करने की खूब सलाह दी जाती है। इंटरनेट पर इन दोनों को जादुई टोनर बताकर पेश किया जाता है, मगर हकीकत यह है कि हर इंसान की त्वचा की बनावट और ज़रूरतें एक जैसी नहीं होतीं। भारत जैसे विविधता भरे देश में जहां अत्यधिक गर्मी, भारी उमस, कड़ाके की ठंड और लगातार एयर कंडीशनिंग में रहने की वजह से त्वचा लगातार तनाव में रहती है, वहां किसी भी घरेलू नुस्खे को बिना सोचे-समझे आजमाना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में असली सवाल सिर्फ यह तय करना नहीं है कि इन दोनों में से कौन सा बेहतर है, बल्कि यह समझना भी है कि क्या किसी भी स्किनकेयर रूटीन में टोनर की वास्तव में कोई अनिवार्य ज़रूरत होती भी है।
चावल का पानी: टोनर के तौर पर इसके फायदे और जुड़ी सावधानियां
चावल को भिगोकर, धोने के बाद या फिर उबालकर तैयार किए जाने वाले पानी में स्टार्च के साथ-साथ चावल में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं। जब इसे चेहरे पर लगाया जाता है, तो स्टार्च के असर से त्वचा कुछ समय के लिए बेहद मुलायम, चिकनी और कसी हुई महसूस हो सकती है। यही कारण है कि कई आधुनिक कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के फॉर्मूलेशन में भी चावल से निकाले गए तत्वों का खूब इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, व्यावसायिक लैब में वैज्ञानिक तरीके से बनाए गए कॉस्मेटिक उत्पादों और रसोई में तैयार किए गए चावल के पानी के बीच एक बहुत बड़ा अंतर होता है।
घर में बनाए गए चावल के पानी में किसी भी तरह का नियंत्रित प्रिजर्वेटिव सिस्टम नहीं होता, जो बैक्टीरिया और फंगस को पनपने से रोक सके। जब आप इसे कई दिनों तक फ्रिज या कमरे के तापमान पर स्टोर करके रखते हैं, बार-बार उंगलियों से छूते हैं या फिर ज्यादा असरदार बनाने के चक्कर में जानबूझकर फर्मेंट होने के लिए छोड़ देते हैं, तो इसमें गंभीर अस्वच्छता और सूक्ष्मजीवों के पनपने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, हर बार चावल की किस्म, पानी की मात्रा और धोने का तरीका अलग होने के कारण इसकी रासायनिक संरचना कभी एक जैसी स्थिर नहीं रह पाती।
इसी वजह से चावल के पानी को जिद्दी मुंहासों, चेहरे के खुले पोर्स या गहरे पिगमेंटेशन का पक्का इलाज मान लेना पूरी तरह गलत है। सच्चाई यह है कि दुनिया का कोई भी टोनर त्वचा के खुले पोर्स को हमेशा के लिए बंद नहीं कर सकता। वहीं चेहरे पर काफी समय से मौजूद गहरे दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन को ठीक करने के लिए विशेष डर्मेटोलॉजिकल स्किनकेयर या फिर सीधे स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर की सलाह की दरकार होती है।
गुलाब जल का इस्तेमाल: ठंडक का एहसास बनाम छिपे हुए तत्व
गुलाब जल को सदियों से इसके सुखद अहसास और फौरी ठंडक के लिए पसंद किया जाता रहा है। चेहरे पर छिड़कते ही यह त्वचा को एक ताज़ा और हल्का हाइड्रेटेड अनुभव देता है। सही तरीके से तैयार किया गया कॉस्मेटिक गुलाब जल त्वचा को सुकून पहुंचाने में मददगार हो सकता है, लेकिन बाज़ार से इसे खरीदते समय प्रोडक्ट के पीछे दिए गए इंग्रीडिएंट लेबल को ध्यान से पढ़ना बेहद ज़रूरी होता है।
बाज़ार में मिलने वाले कई गुलाब जल उत्पादों में केवल डिस्टिल्ड वॉटर और गुलाब का सत्व ही नहीं होता, बल्कि उनमें अतिरिक्त आर्टिफ़िशियल खुशबू, अल्कोहल, रासायनिक प्रिजर्वेटिव या अन्य वानस्पतिक तत्व भी मिले होते हैं। इस तरह के खुशबूदार और केमिकल युक्त तत्व कई संवेदनशील लोगों की त्वचा पर तेज जलन, लालिमा या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। डिब्बे पर केवल “नेचुरल” या प्राकृतिक लिखा होने का मतलब कतई यह नहीं होता कि वह उत्पाद हर किसी की स्किन के लिए सुरक्षित ही होगा। खास तौर पर जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है या जिनका प्राकृतिक स्किन बैरियर पहले से डैमेज हो चुका है, उन्हें किसी भी तरह के नए गुलाब जल को चेहरे पर लगाने से पहले बेहद सतर्क रहना चाहिए।
भारतीय त्वचा और बदलते मौसम के लिए सही चुनाव कैसे करें
भारतीय त्वचा को किसी एक तय सांचे में नहीं ढाला जा सकता, क्योंकि इसमें ऑयली, ड्राई, कॉम्बिनेशन और सेंसिटिव जैसी सभी श्रेणियां बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। इसके साथ ही भारत का मौसम भी इलाके और महीने के हिसाब से तेजी से करवट लेता है। भारी गर्मी और चिपचिपी उमस के मौसम में चेहरे पर एक के बाद एक कई प्रोडक्ट्स की परतें चढ़ाने से ऑयली और एक्ने-प्रोन त्वचा के पोर्स बंद हो सकते हैं और चेहरा भारी लग सकता है। इसके उलट, सूखी सर्दियों के दौरान या फिर दफ्तरों में लंबे समय तक चलने वाले एयर कंडीशनर के बीच रहने से त्वचा की प्राकृतिक नमी तेजी से छिन जाती है और रूखापन बढ़ जाता है।
यही वजह है कि चावल के पानी या गुलाब जल में से किसी एक को भी आंख मूंदकर पूरी भारतीय त्वचा के लिए सबसे बेहतरीन करार देना सही नहीं है। यदि आप अपने चेहरे पर टोनर का इस्तेमाल करना ही चाहते हैं, तो एक सादा, अच्छी तरह लैब में टेस्ट किया गया और पूरी तरह फ्रेगरेंस-फ्री हाइड्रेटिंग टोनर चुनना कहीं अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद फैसला होता है। ऐसे प्रोडक्ट्स जिनमें ग्लिसरीन या पैंथेनॉल जैसे जाँचे-परखे इंग्रीडिएंट्स शामिल हों, त्वचा की नमी को बिना नुकसान पहुंचाए गहराई से बनाए रखने में ज्यादा कारगर साबित होते हैं।
क्या दैनिक स्किनकेयर में टोनर लगाना वाकई ज़रूरी है?
स्किनकेयर विशेषज्ञों के अनुसार, टोनर किसी भी रोज़मर्रा के स्किनकेयर रूटीन का अनिवार्य या अनिवार्य हिस्सा बिल्कुल नहीं है। यदि आप टोनर का इस्तेमाल नहीं भी करते हैं, तब भी आपकी त्वचा पूरी तरह स्वस्थ रह सकती है। अधिकांश लोगों के लिए एक सौम्य और जेंटल क्लींजर, त्वचा की ज़रूरत के मुताबिक एक अच्छा मॉइस्चराइज़र और दिन के समय धूप से बचाव के लिए एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन ही पर्याप्त होता है। यह बेसिक तीन-चरणीय रूटीन त्वचा को स्वस्थ, सुरक्षित और चमकदार बनाए रखने के लिए पूरी तरह सक्षम है।



















