गर्मियों का मौसम आते ही घरों में एयर कंडीशनर यानी एसी का इस्तेमाल काफी बढ़ जाता है और इसके साथ ही यूनिट के ड्रेन पाइप से लगातार पानी टपकता रहता है। ज्यादातर घरों में इस पानी को व्यर्थ समझकर नाली में बहा दिया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गार्डनिंग के शौकीन लोग इस पानी का उपयोग कर सकते हैं? असल में एसी से निकलने वाला यह कंडेनसेट वाटर पौधों की सिंचाई के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। चूंकि यह पानी हवा में मौजूद नमी के संघनन यानी कंडेंसेशन की प्रक्रिया से तैयार होता है, इसलिए इसमें सामान्य नल के पानी की तुलना में घुले हुए खनिजों की मात्रा काफी कम पाई जाती है।
हालांकि, इस पानी का उपयोग करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इसे हर पौधे पर बिना सोचे-समझे डालना नुकसानदायक साबित हो सकता है। एसी की समय पर सफाई, पानी को इकट्ठा करने का सही तरीका और आपके बगीचे में लगे पौधों की प्रजाति इस मामले में बहुत मायने रखती है। विशेष तौर पर खाने योग्य सब्जियां और जड़ी-बूटियों के गमलों में पानी डालते समय थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ताकि किसी भी तरह की गंदगी या बैक्टीरिया पौधों तक न पहुंच सकें।
जब एयर कंडीशनर कमरे की गर्म और उमस भरी हवा को खींचकर उसे ठंडा करता है, तो हवा में मौजूद नमी पानी की छोटी-छोटी बूंदों में तब्दील हो जाती है। यही नमी ड्रेन पाइप के जरिए बाहर निकलती है जिसे तकनीकी रूप से कंडेनसेट वाटर कहा जाता है। चूंकि यह पानी सीधे नगर निगम की वाटर सप्लाई या बोरवेल से नहीं आता, इसलिए इसमें कैल्शियम और अन्य कठोर खनिज नहीं होते हैं जो आमतौर पर नल के पानी में घुले होते हैं। इसी खूबी की वजह से ऐसे पौधे जिन्हें हार्ड वाटर बिल्कुल पसंद नहीं होता, उनके लिए यह पानी बहुत उपयोगी साबित होता है।
इसके बावजूद, एसी के इस पानी को पूरी तरह शुद्ध या पीने योग्य नहीं माना जाना चाहिए। एयर कंडीशनर की कूलिंग कॉइल्स, ड्रेन ट्रे या फिर निकासी पाइप में धूल के कण, कालिख और हानिकारक सूक्ष्मजीव जमा हो सकते हैं। यदि इस पानी से किसी प्रकार की दुर्गंध आ रही है, उसका रंग बदला हुआ प्रतीत होता है या फिर आपके एसी की लंबे समय से सर्विसिंग नहीं हुई है, तो इसे अपने घरेलू पौधों में डालने से बचना ही समझदारी होगी।
किन पौधों के लिए सुरक्षित है एसी का पानी
यदि आप एसी के पानी को पूरी तरह साफ बर्तन या कंटेनर में इकट्ठा करते हैं, तो इसका इस्तेमाल गुलाब, गेंदा, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और विभिन्न प्रकार के सजावटी पौधों में आसानी से किया जा सकता है। खासतौर पर ऐसे इंडोर प्लांट्स जिनकी पत्तियों या मिट्टी पर कठोर पानी जमने की वजह से सफेद परत या दाग बन जाते हैं, उनके लिए कम खनिज वाला यह पानी बहुत फायदेमंद होता है। हालांकि, केवल इस पानी से किसी भी पौधे को संपूर्ण पोषण नहीं मिल सकता है। पौधों की सेहत के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम और अन्य जरूरी पोषक तत्व मिट्टी और प्राकृतिक खाद से मिलने बेहद जरूरी हैं, इसलिए वाटरिंग के दौरान मिट्टी की उर्वरता को नजरअंदाज न करें।
सब्जियों और खाने योग्य पौधों के लिए बरतों सावधानी
यदि आपके गार्डन में टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया, तुलसी या अन्य कोई भी खाने योग्य फसलें लगी हुई हैं, तो एसी का पानी इस्तेमाल करते समय अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। यदि एसी की ड्रेन लाइन या पानी जमा करने वाला पात्र अंदर से साफ नहीं है, तो उसमें अवांछित गंदगी और खतरनाक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। ऐसे में खाद्य फसलों के लिए हमेशा भरोसेमंद और पूरी तरह साफ पानी का ही चयन करना बेहतर होता है। यदि आप फिर भी इस पानी का उपयोग करना चाहते हैं, तो स्रोत की स्वच्छता के प्रति पूरी तरह आश्वस्त होना अनिवार्य है।
पानी का दोबारा इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखने योग्य बातें
एसी के पानी को हमेशा एक स्वच्छ बर्तन में ही इकट्ठा करें और उस कंटेनर की नियमित रूप से धुलाई करते रहें ताकि उसमें काई या गंदगी न जमे। इस पानी को खुले बर्तन में कई दिनों तक स्टोर करके रखने से बचें क्योंकि इससे मच्छर पैदा हो सकते हैं। सजावटी पौधों में हमेशा पानी को सीधे मिट्टी की जड़ों के पास डालें और खाद्य पौधों के खाने योग्य पत्तों या फलों पर पानी के छींटे पड़ने से रोकें। यदि घरेलू पानी के पुनर्चक्रण की बात की जाए, तो शॉवर या वॉशिंग मशीन से निकलने वाला ग्रेवॉटर भी कुछ खास परिस्थितियों में काम आ सकता है, लेकिन उसमें डिटर्जेंट और साबुन के अंश होने के कारण वह एसी के पानी की तुलना में कहीं अधिक जोखिम भरा होता है और उससे विशेष सावधानी की जरूरत होती है।



















