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नन्हे बच्चों के हिंसक बर्ताव को कैसे संभालें माता पिता, थेरेपिस्ट प्रनव ने दिए शांत रहने और सीमा तय करने के सुझावट्रेंड्स
30 सित॰ 2026, 11:48 pm (54 मिनट पहले)· 0

नन्हे बच्चों के हिंसक बर्ताव को कैसे संभालें माता पिता, थेरेपिस्ट प्रनव ने दिए शांत रहने और सीमा तय करने के सुझाव

जब छोटे बच्चे जिद्द या नाराजगी में हाथ उठाने या काटने लगते हैं, तो तुरंत डांटने या वापस मारने के बजाय शांत रहकर उनकी भावनाओं को शब्दों में ढालना सिखाना चाहिए। सर्टिफाइड चाइल्ड थेरेपिस्ट और पेरेंटिंग काउंसलर प्रनव के अनुसार घर का माहौल और सुरक्षित विकल्प बच्चों की इस आदत को स्थायी रूप से सुधारने में मददगार साबित होते हैं।

अक्सर देखा जाता है कि छोटे बच्चे जब किसी बात पर अड़ जाते हैं या उनकी बात नहीं मानी जाती, तो वे अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए अचानक शारीरिक बल का प्रयोग करने लगते हैं। ऐसे मौकों पर माता-पिता अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं कि बच्चे के इस आक्रामक बर्ताव पर क्या प्रतिक्रिया दें। कई बार बच्चे बहुत ज्यादा चिढ़कर मां-बाप, अपने भाई-बहनों या परिवार के किसी अन्य सदस्य पर हाथ उठा देते हैं। कुछ मामलों में यह आदत बढ़कर दांत से काटने या दूसरों के बाल खींचने तक पहुंच जाती है। अपने बच्चे को ऐसा करते देख अभिभावकों का चिंतित होना पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन गुस्से में आकर तुरंत उसे झिड़क देना या पलटकर मारना इस परेशानी का सही और स्थायी समाधान नहीं माना जाता।

शारीरिक आक्रामकता के पीछे छुपी वजहों को समझना

कम उम्र में बच्चों के पास अपनी जटिल भावनाओं को सही शब्दों में बयां करने के लिए पर्याप्त शब्दावली नहीं होती है। जब वे भीतर से असहाय, निराश या अत्यधिक क्रोधित महसूस करते हैं, तो वे अपनी बात समझाने में नाकाम रहने पर शारीरिक तौर पर आक्रामक हो जाते हैं। सर्टिफाइड चाइल्ड थेरेपिस्ट और पेरेंटिंग काउंसलर प्रनव ने ऐसे नाजुक हालात को संभालने के लिए कुछ बुनियादी और व्यावहारिक सुझाव साझा किए हैं। इन तरीकों को अपनाकर अभिभावक बच्चे के हिंसक रुख को शांत कर सकते हैं और उसके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

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तुरंत तीखी प्रतिक्रिया देने से बचें अभिभावक

बच्चे की मारने या नोचने की आदत में बदलाव लाने के लिए सबसे पहले माता-पिता को खुद अपनी प्रतिक्रिया पर नियंत्रण रखना पड़ता है। जब बच्चा अत्यधिक उत्तेजित हो, उस वक्त उसे फौरन शांत करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद यदि स्थिति बिगड़ने पर बड़े भी तेज आवाज में डांटने लगेंगे या चिल्लाने लगेंगे, तो बच्चा इस नकारात्मक व्यवहार को बार-बार दोहराने की आदत बना सकता है। ऐसी परिस्थिति में बड़ों को सबसे पहले अपनी सांसों पर काबू पाकर शांत रहने की सख्त जरूरत होती है।

यदि बच्चा क्रोध के वशीभूत होकर हाथ चलाता है या काटने के लिए दौड़ता है, तो उसी पल उस पर चीखने से बचना चाहिए। बच्चे को यह भांपने का थोड़ा मौका देना चाहिए कि वह असल में क्या कर रहा है। यदि आवश्यक प्रतीत हो, तो उस क्षण बच्चे से थोड़ी शारीरिक दूरी बना लें। दूरी बनाने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप उसकी गलती या दुर्व्यवहार को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका सीधा उद्देश्य माहौल की गर्माहट को कम करना और स्थिति को शांत करना है। जब बच्चा थोड़ा सामान्य मानसिक स्थिति में आ जाए, तब उसके किए बर्ताव पर आराम से बातचीत करना अधिक फलदायी साबित होता है।

जवाब में मारना समस्या को हल करने के बजाय बढ़ा देता है

अगर बच्चे ने खीझ में आकर किसी पर हाथ उठा दिया है, तो सजा के रूप में माता-पिता का उसे थप्पड़ मार देना या पीटना समस्या को सुलझाने के बजाय और उलझा देता है। पलटकर मारने से बच्चे के दिमाग में यह गलत संदेश जाता है कि गुस्सा जाहिर करने के लिए किसी को मारना एक मान्य तरीका है। यदि परिवार के बड़े सदस्य भी तनाव या गुस्से में हाथ उठाने का सहारा लेते हैं, तो नन्हे बच्चे उसी व्यवहार की आसानी से नकल करने लगते हैं।

इसीलिए बच्चे को रोकते समय बड़ों का लहजा शांत मगर बेहद स्पष्ट और सख्त होना चाहिए। बच्चे को सीधे शब्दों में यह समझाना आवश्यक है कि किसी भी इंसान को शारीरिक चोट पहुंचाना कतई सही नहीं है। अनुशासन और सीमाएं तय करना निश्चित रूप से जरूरी है, मगर मारकर सीमाएं सिखाना कभी भी सही तरीका नहीं हो सकता।

गुस्सा निकालने के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक तरीके उपलब्ध कराएं

छोटे बच्चों के लिए अपनी बेचैनी, निराशा या मांग पूरी न होने से उपजे दुख को शब्दों में पिरोना एक कठिन काम होता है। ऐसे में उनका आक्रोश हाथ उठाने, घरेलू सामान पटकने या किसी को काटने के रूप में बाहर निकल आता है। ऐसे नाजुक वक्त में उसके गुस्से को दबाने के बजाय उसका ध्यान किसी हानिरहित गतिविधि की तरफ मोड़ा जाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर, बच्चे को दबाने के लिए कोई सॉफ्ट बॉल दी जा सकती है, किसी तकिए को जोर से पकड़ने या घर में मौजूद छोटे पंचिंग बैग पर मुक्के मारकर अपनी भड़ास निकालने की छूट दी जा सकती है। इस पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य यह है कि बच्चा किसी इंसान को आहत करने के बजाय अपनी आंतरिक बेचैनी को सुरक्षित साधनों के जरिए बाहर निकाल सके। हर बच्चे का स्वभाव एक जैसा नहीं होता, इसलिए जरूरी नहीं कि एक ही तरीका सभी पर काम करे। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चे की रुचि और स्वभाव को भांपते हुए उसके लिए सही विकल्प का चयन करें।

आक्रोश ठंडा पड़ने के बाद शुरू करें संवाद

जब बच्चे का गुस्सा पूरी तरह शांत हो जाए और वह सामान्य महसूस करने लगे, तब उससे बात करना सबसे ज्यादा असरदार होता है। उस वक्त बच्चे को यह बात बेहद सहजता से समझाई जा सकती है कि गुस्सा आना एक स्वाभाविक भावना है और उसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन गुस्से के बहाने किसी पर हाथ उठाना या चोट पहुंचाना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

पेरेंट्स बच्चे से बेहद सरल और सीधे शब्दों में अपनी बात रख सकते हैं, जैसे कि मैं पूरी तरह समझता हूं कि तुम्हें उस बात पर गुस्सा आ रहा था, लेकिन किसी को मारना बिल्कुल ठीक नहीं है। इसके तुरंत बाद उससे पूछना चाहिए कि आखिर किस बात ने उसे इतना परेशान या गुस्सा कर दिया था। धीरे-धीरे बच्चों को अपनी आंतरिक भावनाओं को नाम देना सिखाया जा सकता है, जैसे गुस्सा, दुख, निराशा अथवा असहजता। जब बच्चा इन अलग-अलग मनोभावों को पहचानने में सक्षम हो जाता है, तो वह हिंसक शारीरिक प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी शिकायत बोलकर बताने की आदत डालने लगता है।

घर का समग्र वातावरण निभाता है सबसे बड़ी भूमिका

बच्चे को केवल उसी समय नसीहत देना पर्याप्त नहीं होता जब वह किसी पर हाथ उठा रहा हो। माता-पिता को चाहिए कि वे रोजमर्रा के सामान्य पलों में भी बच्चे को अपनी बात खुलकर रखने का पूरा मौका और समय दें। जब भी बच्चा बिना किसी आक्रामकता या हाथ उठाए अपनी परेशानी शांति से साझा करे, तो बड़ों को उसकी बात बेहद ध्यान और सम्मान के साथ सुननी चाहिए, ताकि उसे यह विश्वास हो सके कि उसकी आवाज बिना चीखे भी सुनी जाती है।

सवाल-जवाब

जब बच्चा गुस्से में हाथ उठाए तो माता-पिता को तुरंत क्या करना चाहिए?
माता-पिता को सबसे पहले चिल्लाने या पलटकर मारने से बचना चाहिए और खुद शांत रहते हुए बच्चे से कुछ पलों के लिए थोड़ी दूरी बना लेनी चाहिए।
बच्चे के मारने पर उसे वापस मारना क्यों गलत माना जाता है?
पलटकर मारने से बच्चे को यह गलत संदेश मिलता है कि गुस्से में हिंसा करना सही है, जिससे वह भविष्य में उसी व्यवहार की नकल करने लगता है।
क्रोध के समय बच्चे का ध्यान किस प्रकार सुरक्षित गतिविधियों में लगाया जा सकता है?
उसे किसी दूसरे व्यक्ति को चोट पहुंचाने के बजाय सॉफ्ट बॉल दबाने, तकिया पकड़ने या छोटे पंचिंग बैग पर मारने का विकल्प दिया जा सकता है।
बच्चे के शांत होने के बाद उससे कैसे बात करनी चाहिए?
उसे प्यार से समझाएं कि गुस्सा आना स्वाभाविक है लेकिन मारना गलत है, और धीरे-धीरे उसे अपनी भावनाओं को शब्दों में कहना सिखाएं।
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