त्वचा की रंगत निखारने और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने की चाह में अक्सर लोग तरह-तरह के स्किनकेयर उत्पादों का सहारा लेते हैं। महंगे सौंदर्य प्रसाधन खरीद लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनका सुरक्षित और सही ढंग से प्रयोग करना सबसे ज्यादा मायने रखता है। डेड स्किन सेल्स को हटाने और त्वचा की बनावट को कोमल बनाने के लिए आजकल AHA यानी अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड और BHA यानी बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड जैसे सक्रिय तत्वों का चलन काफी बढ़ गया है। शुरुआत करने वाले लोगों के सामने अक्सर यह दुविधा रहती है कि उनकी त्वचा की प्रकृति के अनुरूप कौन सा एसिड बेहतर रहेगा, इसे सप्ताह में कितनी मर्तबा लगाना चाहिए और किन अन्य सामग्रियों के साथ इनका मेल नुकसानदेह साबित हो सकता है।
बिना सोचे-समझे या जल्दबाजी में चेहरे को एक्सफोलिएट करने से त्वचा की प्राकृतिक परत को नुकसान पहुंच सकता है। इसके परिणामस्वरूप चेहरे पर खिंचाव, रूखापन, खुजली, तेज जलन और लालिमा जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सौंदर्य दिनचर्या में इन रासायनिक तत्वों को जगह देने से पहले इनके काम करने के तरीके और जरूरी सावधानियों को अच्छी तरह समझ लेना बेहद आवश्यक है।
AHA और BHA के काम करने के तरीके में क्या अंतर है
यद्यपि AHA और BHA दोनों ही रासायनिक एक्सफोलिएंट की श्रेणी में आते हैं, लेकिन त्वचा पर दोनों का असर और कार्यप्रणाली बिल्कुल अलग होती है। AHA वर्ग में मुख्य रूप से ग्लाइकोलिक एसिड और लैक्टिक एसिड जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो पानी में घुलनशील होते हैं। इनका मुख्य काम त्वचा की सबसे ऊपरी सतह पर जमी मृत कोशिकाओं को हटाना होता है, जिससे खुरदरी त्वचा चिकनी और चमकदार दिखने लगती है। यह सूखी या सामान्य त्वचा वाले लोगों के लिए काफी मुफीद माने जाते हैं।
दूसरी ओर, BHA के तहत आने वाला सैलिसिलिक एसिड तेल में घुलनशील यानी ऑयल सॉल्युबल होता है। अपनी इसी खूबी के कारण यह त्वचा के रोमछिद्रों की गहराई तक पहुंच जाता है। वहां जमा अतिरिक्त सीबम, तैलीय मैल और गंदगी को घोलकर बाहर निकालने में यह बेहद असरदार होता है। यही वजह है कि मुहांसों, ब्लैकहेड्स और अत्यधिक तैलीय त्वचा से जूझ रहे लोगों के लिए BHA आधारित उत्पादों की सिफारिश की जाती है। फिर भी, केवल अपनी त्वचा का प्रकार देखकर उत्पाद चुन लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अपनी त्वचा की संवेदनशीलता और पहले से चल रहे स्किनकेयर रूटीन की स्थिति को परखना भी उतना ही जरूरी है।
पैच टेस्ट और शुरुआत करने का सही तरीका
यदि कोई व्यक्ति पहली बार AHA या BHA का उपयोग करने जा रहा है, तो उसे कभी भी उत्पाद को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने की गलती नहीं करनी चाहिए। सबसे पहले पैच टेस्ट करना एक सुरक्षित कदम होता है। इसके लिए उत्पाद की थोड़ी सी मात्रा कान के पीछे के हिस्से पर या हाथ की कोहनी के पास लगाकर त्वचा की प्रतिक्रिया देखनी चाहिए। यदि उस हिस्से पर असहनीय जलन, तेज खुजली, दाने या असामान्य लालिमा नजर आए, तो इसका मतलब है कि यह उत्पाद आपकी त्वचा के अनुकूल नहीं है और इसे चेहरे पर बिल्कुल न लगाएं। जिन लोगों की त्वचा अत्यधिक संवेदनशील है, उन्हें ऐसे उत्पाद अपनाने से पहले किसी त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
रासायनिक एक्सफोलिएंट्स को रोजाना चेहरे पर लगाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। नए उपयोगकर्ताओं के लिए शुरुआत में हफ्ते में सिर्फ एक या दो बार ही इसका उपयोग करना सबसे व्यावहारिक और सुरक्षित उपाय है। जब त्वचा इस उत्पाद की आदी हो जाए और कोई विपरीत प्रतिक्रिया न दिखे, तब आवश्यकता के अनुसार धीरे-धीरे इसके इस्तेमाल के दिनों को बढ़ाया जा सकता है। जरूरत से ज्यादा एक्सफोलिएशन करने से त्वचा की नमी छिन जाती है और वह लाल होकर संवेदनशील हो जाती है। चेहरे पर ज्यादा मात्रा में उत्पाद थोप देने से कभी बेहतर या तेज नतीजे नहीं मिलते।
किन एक्टिव तत्वों को साथ में लगाने से बचें
एक ही समय में एक साथ कई तीव्र सक्रिय तत्वों का उपयोग करने से त्वचा में गंभीर जलन और संवेदनशीलता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यदि चेहरे पर AHA या BHA लगाया जा रहा है, तो उसी रूटीन में रेटिनॉल जैसे शक्तिशाली तत्वों को शामिल करने से बचना चाहिए या बेहद सावधानी रखनी चाहिए। इसी प्रकार, विटामिन C और अन्य एक्टिव उत्पादों को भी त्वचा की बर्दाश्त करने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
शुरुआती दौर में अलग-अलग दिनों पर विभिन्न सक्रिय उत्पादों का इस्तेमाल करना सबसे आसान और सुरक्षित तरीका माना जाता है। उदाहरण के लिए, जिस दिन एक्सफोलिएंट लगाया जाए, उस दिन रेटिनॉल या विटामिन C से परहेज किया जा सकता है। ऐसा करने से यह समझना भी काफी सरल हो जाता है कि किस खास उत्पाद के कारण चेहरे पर कोई परेशानी या एलर्जी तो नहीं हो रही है।
मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन की अहम भूमिका
AHA या BHA लगाने के बाद त्वचा की नमी अस्थायी रूप से कम हो सकती है और सूखापन महसूस हो सकता है। इसलिए एक्सफोलिएशन की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद एक साधारण और गहरा पोषण देने वाला हाइड्रेटिंग मॉइस्चराइजर लगाना बहुत जरूरी होता है। मॉइस्चराइजर त्वचा की प्राकृतिक नमी को सील करने और उसे ठंडक व आराम पहुंचाने में मददगार साबित होता है।
इसके अलावा, दिन के समय धूप से बचाव के लिए सनस्क्रीन लगाना बिल्कुल भी न भूलें। रासायनिक एक्सफोलिएंट्स के इस्तेमाल के बाद त्वचा धूप के प्रति काफी नाजुक और संवेदनशील हो जाती है। ऐसे समय में कम से कम SPF 30 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना चाहिए ताकि हानिकारक पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा हो सके। धूप में लंबे समय तक रहने की स्थिति में सनस्क्रीन को दोबारा लगाना भी जरूरी हो सकता है। यदि उत्पाद के प्रयोग के बाद चेहरे पर लगातार सूजन, चुभन, खिंचाव या तेज लालिमा बनी रहे, तो उसका इस्तेमाल तुरंत रोक देना चाहिए। सिर्फ चमक पाने की होड़ में त्वचा को बार-बार रगड़ना या एक्सफोलिएट करना चेहरे की सेहत बिगाड़ सकता है।



















