भारतीय रसोई में फूलगोभी से तैयार सूखी तरकारी को पराठे, फुल्के अथवा दाल-भात के संग बेहद चाव से परोसा जाता है। रसोई में इसे पकाते समय दो मुख्य चुनौतियां सबसे अधिक परेशान करती हैं। पहली दिक्कत फूलों के गहरे हिस्सों में बैठी महीन धूल-मिट्टी या कीटों को बाहर निकालना है, जबकि दूसरी समस्या पकाते वक्त गोभी का जरूरत से ज्यादा गलकर भरता बन जाना है। यदि शुरुआती तैयारी पर ध्यान दिया जाए, तो यह सब्जी न केवल दिखने में साबुत और सुंदर बनेगी बल्कि खाने में भी लाजवाब लगेगी।
गोभी की कटाई और छंटाई का तरीका
सब्जी पकाने की शुरुआत गोभी के बाहरी हरे पत्तों और कड़े निचले डंठल को काटकर अलग करने से करें। इसके बाद मध्यम माप के फूल अलग कर लें। जरूरत से ज्यादा बड़े आकार के टुकड़ों के अंदर कीटाणुओं की पहचान करना और उन्हें एक समान पकाना कठिन होता है। वहीं दूसरी तरफ, यदि टुकड़े बहुत बारीक काट दिए जाएं, तो वे भाप और आंच लगते ही बिखर जाते हैं। इसलिए सभी फूलों को एक बराबर अनुपात में काटना सबसे बढ़िया रहता है।
प्रत्येक टुकड़े को उलट-पुलट कर उसकी आंतरिक शाखाओं तथा डंठलों के जोड़ पर बारीकी से नजर डालें। अगर कोई हिस्सा सड़ा हुआ, दागदार या अत्यधिक क्षतिग्रस्त दिखे, तो चाकू से उसे फौरन काटकर फेंक दें। मात्र ऊपर से गोभी का दूधिया सफेद दिखना उसकी पूर्ण शुद्धता का प्रमाण नहीं होता है।
धूल और कीटों से छुटकारा पाने की तकनीक
कटे हुए फूलों को नल के साफ बहते पानी की धार में अच्छी तरह धो लेना चाहिए। यदि आपको छिपे हुए कीड़े होने की आशंका सता रही हो, तो नमकीन घोल तैयार करके उसमें गोभी को कुछ देर डुबोया जा सकता है। इलिनॉय एक्सटेंशन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक लगभग चार लीटर सादे पानी में चार छोटे चम्मच नमक घोलकर टुकड़ों को आधा घंटा भिगोने का सुझाव दिया गया है।
निर्धारित समय बीतने पर गोभी को पानी से निकालें, एक बार फिर गौर से देखें और ताजे शुद्ध जल से दोबारा धोएं। ध्यान रहे कि खाद्य सामग्री को धोने के लिए साबुन, सर्फ अथवा बर्तन मांजने वाले किसी भी रासायनिक डिटर्जेंट का उपयोग बिल्कुल न करें।
उबलते जल में हल्की भाप देकर ब्लांच करना
एक गहरे बर्तन में भरपूर पानी लें, जिसमें गोभी के टुकड़े आसानी से तैर सकें। किसी भी आकार की गोभी के लिए महज दो गिलास पानी पर्याप्त साबित नहीं होता। इस पानी में मामूली नमक और चौथाई छोटा चम्मच हल्दी पाउडर डालकर खौलने दें। जब उबाल आ जाए, तो गोभी डालें और तकरीबन तीन मिनट तक रखकर उसकी नरमी जांचें। फूलों के माप के मुताबिक यह समय थोड़ा घट या बढ़ सकता है।
गोभी को इस चरण पर पूरी तरह नहीं गलाना है, क्योंकि आगे चलकर इसे कड़ाही में मसालों के संग भी पकना है। पानी में हल्दी मिलाने से फूलों पर हल्का पीला रंग चढ़ जाता है, परंतु इसे पूर्ण रूप से जीवाणुनाशक या सफाई का अंतिम पैमाना न मानें। फूलों की शारीरिक जांच हमेशा जरूरी रहती है।
गर्म पानी से बाहर निकालना और सामग्री जुटाना
हल्का खौलने के बाद गोभी को तुरंत जालीदार छलनी में पलट दें। यदि टुकड़े खौलते पानी में पड़े रह गए, तो भीतर की गर्मी से वे और अधिक पककर नरम पड़ने लगेंगे। अतिरिक्त जल को अपने आप रिसकर बह जाने दें, जिससे कड़ाही का सूखा मसाला अनावश्यक रूप से गीला न पड़े। फूलों को हाथों से दबाकर या निचोड़कर सुखाने का प्रयास न करें, अन्यथा वे टूट जाएंगे।
जब तक गोभी से पानी निथरे, तब तक प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और हरा धनिया बारीक काट लें। एक सामान्य गोभी के हिसाब से दो बड़े चम्मच सरसों का तेल, चौथाई छोटा चम्मच साबुत जीरा, दो से तीन मध्यम प्याज और दो से तीन टमाटर का अनुपात मुफीद रहता है। सूखे मसालों में दो कटी हरी मिर्च, आधा छोटा चम्मच पिसी लाल मिर्च, आधा छोटा चम्मच पिसा धनिया तथा स्वादानुसार नमक अलग रख लें। यदि गोभी छोटी हो, तो प्याज-टमाटर की मात्रा घटा दें ताकि उनका तीखा-खट्टा स्वाद गोभी के मूल स्वाद को दबा न दे।
चौड़ी कड़ाही में मसाला भूनने का क्रम
एक चौड़े मुंह वाली कड़ाही में सरसों का तेल धुआं उठने तक गर्म करें और फिर उसमें जीरा चटकाएं। अब कटे प्याज डालकर मध्यम आंच पर कलछी से चलाते हुए भूनें। प्याज का रंग हल्का बादामी और बनावट कोमल होने तक पकाना चाहिए। कड़ाही जितनी खुली और चौड़ी होगी, गोभी के फूलों को उलटने-पलटने के लिए उतनी ही पर्याप्त जगह मिलेगी। प्याज को ज्यादा काला या कड़ा भूरा न करें।
प्याज भुनने के उपरांत कटी हरी मिर्च और टमाटर के टुकड़े कड़ाही में छोड़ें। साथ में धनिया पाउडर, पिसी लाल मिर्च, नाममात्र की हल्दी और आवश्यकतानुसार नमक मिला दें। धीमी से मध्यम आंच पर टमाटर के गलने तक मसाले को पकने दें। टमाटर को गोभी मिलाने से पहले ही पूरी तरह पका लेने से गोभी को बाद में देर तक चलाने की झंझट नहीं रहती। यदि मसाला कड़ाही के पेंदे पर चिपकता दिखे, तो केवल एक-दो छोटे चम्मच पानी छिड़क लें, क्योंकि हमें सूखी सब्जी तैयार करनी है।
गोभी मिलाने और दम देने की विधि
मसाला भुन जाने पर निथारे हुए गोभी के फूल कड़ाही में डाल दें। चौड़े सपाट चमचे से तली के मसाले को उठाते हुए धीरे-धीरे फूलों के ऊपर लपेटें। कड़ाही में कलछी को गोल-गोल तेजी से घुमाने के बजाय नीचे से ऊपर की ओर पलटें। ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर पकने दें और थोड़ी-थोड़ी देर में खोलकर जांचते रहें। आवश्यकता महसूस हो तो हल्का सा पानी छिड़क सकते हैं।
चूंकि गोभी पहले से उबली हुई है, इसलिए इसे देर तक ढंककर अनदेखा न छोड़ें। जब डंठल का भाग कांटे या चम्मच से सरलता से कटने लगे और फूल साबुत नजर आएं, तो समझें कि आंच बंद करने का वक्त आ गया है।
अंतिम स्पर्श और परोसने का ढंग
उतारने से पहले नमक का स्वाद अवश्य जांचें। ब्लांचिंग के समय भी पानी में नमक डाला गया था, इसलिए मसाले में नमक की मात्रा संयमित रखना ही समझदारी है। कड़ाही में नमी बची दिखे तो आंच तेज करके बिना ढक्कन के भाप उड़ा लें। अंत में चूल्हा बंद कर ऊपर से बारीक हरा धनिया बुरकें। धनिया डालने के बाद ज्यादा उलटफेर न करें और परोसते समय भी चपटे चम्मच का इस्तेमाल करें ताकि थाली में गोभी खिली-खिली पहुंचे।



















