अरावली और विंध्य की पहाड़ियों के बीच फैले जंगलों में जब खुली गाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, तो अचानक सामने आने वाली पीली-काली धारियां किसी भी पर्यटक के रोमांच को दोगुना कर देती हैं। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान अपने वन्यजीवों और ऐतिहासिक किले के संगम के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। अगर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ पहली बार इस प्राकृतिक अभयारण्य का रुख करने की सोच रहे हैं, तो यात्रा की शुरुआत से पहले कुछ मूलभूत तैयारियों को समझना बेहद जरूरी है। सही जानकारी और पूर्व योजना आपके इस वन्यजीव दौरे को यादगार बना सकती है।
यात्रा का आधार और पहुंचने के मुख्य रास्ते
सफारी का अनुभव लेने के लिए पर्यटकों का मुख्य पड़ाव सवाई माधोपुर शहर बनता है। यह मुख्य पर्यटन स्थल से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचने के साधन बेहद सुलभ हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए सवाई माधोपुर जंक्शन सबसे मुफीद स्टेशन है, जहां से स्थानीय कैब या ऑटो के जरिए रिजर्व क्षेत्र तक आसानी से जाया जा सकता है। सड़क मार्ग का चयन करने वाले लोग जयपुर से गाड़ियों के माध्यम से सीधे यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, जो यात्री हवाई मार्ग चुनते हैं, उनके लिए सांगानेर स्थित जयपुर हवाई अड्डा निकटतम विकल्प है, जहां उतरने के बाद आगे का सफर निजी या वाणिज्यिक वाहनों से पूरा किया जाता है।
ऑनलाइन परमिट और वाहनों के विकल्प
अभयारण्य के भीतर निजी कारों या साधारण वाहनों से जाने की इजाजत नहीं होती। वन क्षेत्र में प्रवेश के लिए अधिकृत गाड़ियों का इस्तेमाल ही अनिवार्य है। इसके लिए राजस्थान राज्य के वन विभाग द्वारा संचालित इंटरनेट पोर्टल पर जाकर पहले से परमिट हासिल करना होता है। गाड़ियों के मुख्य रूप से दो विकल्प मौजूद हैं। पहले विकल्प के तौर पर 6 यात्रियों की क्षमता वाली जिप्सी होती है, जबकि दूसरे विकल्प में 20 सीटों वाला कैंटर शामिल रहता है। विशेषकर सप्ताहांत और छुट्टियों के मौकों पर भीड़ अधिक होने के कारण परमिट की सीटें जल्दी भर जाती हैं, इसलिए वन विभाग की आधिकारिक डिजिटल प्रणाली के जरिए एडवांस बुकिंग कर लेना ही बुद्धिमानी है।
प्राकृतिक झीलें और जोन 3 का आकर्षण
अभयारण्य की खूबसूरती केवल मुख्य वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके भीतर मौजूद जलस्रोत वातावरण को और खूबसूरत बनाते हैं। रूट नंबर 3 पर यात्रा करने वाले पर्यटकों को पदम तालाब और राजबाग जैसी खूबसूरत झीलों के आसपास से गुजरने का मौका मिलता है। खुला इलाका होने की वजह से इन जलाशयों के आसपास जानवरों की मौजूदगी की संभावना बनी रहती है। हालांकि, जंगल के अंदर किसी विशिष्ट जीव का दिखाई देना पूरी तरह से वन्यजीवों की अपनी गतिविधियों और किस्मत पर निर्भर करता है। इसलिए धैर्य बनाए रखना किसी भी जंगल भ्रमण की पहली शर्त मानी जाती है।
मौसम, समय और रुकने की सलाह
अभयारण्य में सफारी का आयोजन दिन में दो पारियों में किया जाता है - एक सुबह के वक्त और दूसरी दोपहर बाद। इन पारियों का समय सूरज के निकलने और ढलने के हिसाब से बदलता रहता है। मुख्य पर्यटन चक्र अक्टूबर महीने से शुरू होकर जून तक संचालित होता है। यदि आप सितंबर के अंतिम दिनों में जाने की सोच रहे हैं, तो यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुख्य पार्क अक्टूबर में ही खुलता है। केवल एक बार गाड़ी में घूमने से यदि वन्यजीव न दिखें तो निराशा से बचने के लिए दो या तीन अलग-अलग पारियों की बुकिंग करना एक अच्छा विचार हो सकता है। नियम के मुताबिक गाइड के निर्देशों का पालन करना और वाहन से बाहर न उतरना बेहद आवश्यक है।
अनुमानित बजट और कुल लागत
इस यात्रा का कुल खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सा वाहन चुना है और ठहरने के लिए किस श्रेणी का होटल लिया है। सवाई माधोपुर तक की यात्रा, मध्यम स्तर का होटल, भोजन और सफारी का परमिट मिलाकर दो लोगों के लिए एक सामान्य ट्रिप का शुरुआती बजट ₹8,000 से ₹15,000 के आसपास आता है। अगर आप व्यक्तिगत जिप्सी बुक करते हैं या किसी लग्जरी रिसॉर्ट में ठहरते हैं, तो यह बजट बढ़ सकता है।



















