एक ही हफ्ते में तीन नाम, एक ही सवाल
370 रुपये की एक प्लेट बिरयानी, हिमांशु जांगड़ा, प्रणित मोरे और सेजल पवार — पिछले कुछ दिनों से रील्स, यूट्यूब वीडियोज़, न्यूज़ वेबसाइट्स और हर सोशल मीडिया फीड पर बस यही नाम घूम रहे हैं। अगर इन तीनों किरदारों से आपका अब तक वास्ता नहीं पड़ा है, तो मान लीजिए कि आप काफ़ी सुकून भरी ज़िंदगी जी रहे हैं। फिर भी, ट्रेंडिंग से कटना ठीक नहीं, इसलिए पूरा माजरा यहां सिलसिलेवार समझ लीजिए — और साथ में वह सवाल भी, जो इन तीनों किस्सों के पीछे छिपा है।
हिमांशु जांगड़ा और 370 रुपये का 'हिसाब'
कहानी की शुरुआत गुरुग्राम के रहने वाले एक युवक हिमांशु जांगड़ा से होती है। वह किसी लड़की के साथ बाहर गया — डेट थी या महज़ एक मीट-अप, यह तो वही जाने। वहां उसने लड़की को 370 रुपये की चिकन बिरयानी खिलाई और फिर इसके 'बदले' में लड़की से कुछ उम्मीदें पालने लगा। उसके मन में यह गुमान था कि अपनी जेब से 370 रुपये ख़र्च कर देने भर से उसे लड़की पर कोई हक़ मिल गया है। लड़की ने दो टूक मना कर दिया, और बस इतने से ही भाई साहब का ego आहत हो गया।
इसके बाद उसने यही 'क़िस्सा' प्रणित मोरे के कॉमेडी शो में मंच पर खड़े होकर, हंसते हुए सुनाया। दर्शकों ने भी इस भद्दे मज़ाक का खूब लुत्फ़ उठाया — बैकग्राउंड में लड़के-लड़कियों की हंसी तक साफ़ सुनी जा सकती है। लेकिन जनता को यह बेतुकापन रत्ती भर भी हज़म नहीं हुआ। पहली नज़र में यह बात इतनी आम लगती है कि नज़रअंदाज़ कर दी जाए — आख़िर कितने ही लड़के किसी लड़की के साथ कॉफी पीने भी इसी मंशा से जाते हैं। पर मामला यहीं नहीं रुका। हिमांशु के कुछ और वीडियो सामने आए, जिनमें से एक में वह बता रहा था कि उसके घर में महिलाओं को 'बेल्ट ट्रीटमेंट' दिया जाता था। आज की पीढ़ी का यह लड़का अगर अपने घर के मर्दों की इन्हीं ग़लतियों को आगे बढ़ाने में गर्व महसूस करता है, तो पढ़ाई-लिखाई, अच्छी नौकरी और एक्सपोज़र का फ़ायदा ही क्या? अब हिमांशु ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट कर दिया है और उसकी नौकरी भी जा चुकी है। पर डर इस बात का है कि इस सोच वाला वह अकेला नहीं है — हमारे आसपास न जाने ऐसे कितने ही होंगे।
सेजल पवार और शवों पर हंसी का सौदा
दुनिया अभी हिमांशु की सोच पर ही उलझी हुई थी कि मुंबई के KEM हॉस्पिटल से MBBS कर रहीं सेजल पवार का एक वीडियो वायरल हो गया। उन्होंने भी किसी कॉमेडी शो में हॉस्पिटल के काम से जुड़े कुछ बेहद घटिया वाकये साझा किए थे। सेजल ने मंच से बताया कि मेडिकल रिसर्च के लिए दान किए गए पुरुषों के शवों के प्राइवेट पार्ट्स के साइज़ का किस तरह मज़ाक उड़ाया जाता है। इस Instagram वीडियो ने सिर्फ़ डॉक्टरों को ही नहीं, आम लोगों को भी ग़ुस्से से भर दिया।
नतीजा यह हुआ कि हॉस्पिटल प्रशासन ने जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए एक कमेटी गठित कर दी। वायरल होने का एक और चेहरा भी सामने आया — इसी विवाद के बीच सेजल पवार के फॉलोअर्स बढ़कर 2 लाख से ज़्यादा हो गए। लोगों ने उनका 12वीं और NEET का रिज़ल्ट तक खोज निकाला। आख़िरकार सेजल ने सार्वजनिक माफ़ी मांगी और अपना अकाउंट प्राइवेट कर लिया। सच यह है कि एक फ़्यूचर डॉक्टर के लिए ऐसी बात मज़ाक की श्रेणी में आती ही नहीं।
दो मामले, ज़मीन-आसमान का फ़र्क — पर दोनों ग़लत
हिमांशु जांगड़ा, सेजल पवार और प्रणित मोरे — तीनों ने भद्दे मज़ाक करते वक़्त किसी सीमा का लिहाज़ नहीं रखा। हालांकि दोनों किस्सों में बड़ा फ़र्क है: सेजल ने जो कहा, वह असंवेदनशील ज़रूर था, पर हिमांशु ने तो एक लड़की के साथ की गई ज़बरदस्ती का सार्वजनिक बखान किया — मानो 370 रुपये की बिरयानी खिला देने भर से उसे कुछ भी करने का लाइसेंस मिल गया हो। ये दोनों मामले अलग हैं, पर दोनों ही ग़लत हैं।
अब ज़रा ख़ुद को उस ऑडियंस की जगह रखकर देखिए, जो हिमांशु के इस 'मज़ाक' पर तालियां और ठहाके लगा रही थी। मान लीजिए आप ऑफिस के बाद किसी टीममेट के साथ लंच, डिनर या कॉफी पर जाती हैं, बिल वह चुकाता है और फिर उसी 'हक़' के नाम पर आपसे बदतमीज़ी करने लगे — क्या तब आप हंस पाएंगी?
कॉमेडियन और प्लेटफॉर्म भी बराबर के ज़िम्मेदार
यौन उत्पीड़न या ज़बरदस्ती जैसे गंभीर अपराध को मंच पर मज़ाक बनाकर परोसने का गुनाह सिर्फ़ उस इंसान का नहीं है, जिसकी सोच घटिया है। इसमें वह कॉमेडियन और वह प्लेटफॉर्म भी उतने ही भागीदार हैं, जो व्यूज़ और लाइक्स की भूख में ऐसी बातों को हवा देते हैं। लाइव शो में कमान होस्ट या कॉमेडियन के हाथ में होती है। किसी की मर्ज़ी के बिना शारीरिक संबंध जैसी बात पर तुरंत टोकने के बजाय उस पर हंसना, उसे 'कंटेंट' का नाम देना और फिर सोशल मीडिया पर वायरल कर देना — यह अपराधी मानसिकता को जायज़ ठहराने जैसा है। जब मनोरंजन के नाम पर सहमति के उल्लंघन को मज़ाक बना दिया जाता है, तो यह समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को चुपचाप ख़त्म करता है। इसलिए ऐसी हरकत को मौन सहमति देने वाला और उसे रील या वीडियो में भुनाने वाला हर शख़्स इस गुनाह में बराबर का जवाबदेह है।
कानूनी शिकंजा और महिला आयोग का संज्ञान
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कॉमेडियन प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और डॉ. सेजल पवार के ख़िलाफ़ नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर उन्हें समन जारी कर दिया है। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS, 2023) और IT एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उधर, हिमांशु जांगड़ा के '370 रुपये की बिरयानी के बदले शारीरिक सुख' वाले बयान पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने ख़ुद संज्ञान (Suo Motu) लिया है। विवाद बढ़ने के साथ ही आरोपियों को अपने करियर और सामाजिक छवि — दोनों स्तर पर भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है।
यह पहली बार नहीं हुआ
संस्थानों और समाज ने अपनी-अपनी तरफ़ से इन तीनों पर राय रखी और जो उन्हें सही लगा, वह एक्शन लिया। पर सवाल यह है कि क्या इसके बाद ऐसा दोबारा नहीं होगा? याद कीजिए फरवरी 2025 को — समय रैना के शो 'India's Got Latent' में रणवीर अल्लाहबादिया ने एक कंटेस्टेंट से उसके माता-पिता और उनके निजी जीवन को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अश्लील सवाल पूछ लिया था। उस शो में अपूर्वा मखीजा भी मौजूद थीं। इस भद्दे मज़ाक को बढ़ावा देने पर लोग भड़क उठे थे। अश्लीलता फैलाने के आरोप में असम (गुवाहाटी) और दिल्ली पुलिस में FIR दर्ज हुई, और शो का वह एपिसोड YouTube से हटाना पड़ा। इतना ही नहीं, इन इंफ्लुएंसर्स के हाथ से कई ब्रैंड डील्स भी छिन गईं।
आज वायरल, कल किसी को याद भी नहीं
यह सोशल मीडिया का दौर है, जहां ख़बरें और ऑडियो-वीडियो पल भर में वायरल हो जाते हैं। एक साल पहले लोग समय रैना, रणवीर अल्लाहबादिया और अपूर्वा मखीजा के ख़िलाफ़ मुहिम चला रहे थे; आज हिमांशु जांगड़ा, प्रणित मोरे और सेजल पवार उनके लिए 'कंटेंट' हैं; और कल किसी और का घेराव हो जाएगा। डिजिटल युग में कोई बात या इंसान जितनी तेज़ी से चर्चा में आता है, उतनी ही जल्दी रिप्लेस भी कर दिया जाता है। जो आज वायरल है, कल उसे कोई याद तक नहीं रखेगा — लोग आगे बढ़ जाएंगे और व्यूज़ व ट्रेंड के लिए कुछ नया ढूंढ लाएंगे। लेकिन समाज के एक हिस्से के तौर पर आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ ट्रेंड के साथ बहने तक सीमित नहीं है।
घर का 'अच्छा इंसान' बाहर कुछ और भी हो सकता है
एक बात पर ज़रूर ग़ौर कीजिए — जो शख़्स हमारे घर में या हमारे दायरे में बेहद शरीफ़ नज़र आता है, ज़रूरी नहीं कि बाहर भी वैसा ही हो। मुमकिन है कि वही इंसान चौखट के बाहर हिमांशु जांगड़ा या सेजल पवार जैसा चोला ओढ़ ले। कई बार हम किसी की सिर्फ़ अच्छाइयां ही देख पाते हैं, क्योंकि हमारे सामने वह वैसा ही पेश आता है। पर हो सकता है कि किसी और की ज़िंदगी के पन्नों में दर्ज वही चेहरा बिल्कुल अलग हो।













