त्रिपुरा सरकार ने बांग्लादेश के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य ने सीमा पर आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक समन्वय का इस्तेमाल करते हुए एक स्मार्ट बॉर्डर विकसित करने के लिए पायलट स्टडी शुरू कर दी है। इस योजना की शुरुआत फिलहाल सिपाहीजाला जिले से की गई है, जिसकी जानकारी खुद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को सार्वजनिक की।
सिपाहीजाला जिले से पायलट स्टडी की शुरुआत
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला के शलबागन स्थित सीमा सुरक्षा बल यानी BSF मुख्यालय में रोटरी क्लब ऑफ एस्पायरिंग अगरतला और BSF के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक रक्तदान शिविर में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि सिपाहीजाला जिले में स्मार्ट बॉर्डर पर पायलट स्टडी का काम शुरू हो चुका है, और इस जिले की 100 किलोमीटर से अधिक की सीमा बांग्लादेश से सटी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित अधिकारियों द्वारा पहले ही टेंडर जारी किया जा चुका है।
केंद्रीय गृह मंत्री की यात्रा के बाद उठाया गया कदम
यह पूरा प्रोजेक्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दौरे के बाद आगे बढ़ा है जो उन्होंने जून के महीने में त्रिपुरा में किया था। अपनी उस यात्रा के दौरान उन्होंने यह घोषणा की थी कि राज्य में स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा को लागू किया जाएगा, जिसमें स्थानीय प्रशासन, आधुनिक तकनीक और सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी को एक साथ जोड़ा जाएगा ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा और सुरक्षा के आंकड़े
आपको बता दें कि त्रिपुरा की सीमा कुल 856 किलोमीटर लंबी है जो बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है। इस पूरी लंबाई में से लगभग 80 प्रतिशत हिस्से पर पहले से ही फेंसिंग यानी कंटीले तारों की बाड़ लगाई जा चुकी है। हालांकि कुछ भौगोलिक और प्राकृतिक बाधाओं के कारण सीमा के कुछ हिस्सों में बाड़ लगाने का काम अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नदियां, कठिन और पथरीला इलाका तथा सीमा के दूसरी तरफ से आने वाली आपत्तियों की वजह से कुछ जगहों पर फेंसिंग का कार्य लंबित पड़ा हुआ है।
एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता
सीमा प्रबंधन के मामलों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा की सुरक्षा में लगी विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल होना बहुत जरूरी है। उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि चूंकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की रक्षा करने की मुख्य जिम्मेदारी BSF की होती है, इसलिए सीमा पर होने वाली हर एक गतिविधि या विकास की जानकारी सीधे राज्य सरकार तक नहीं पहुंच पाती है। यही कारण है कि उनकी सरकार कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जिला प्रशासनों के बीच आपसी संवाद को मजबूत करने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। उनका मानना है कि जैसे ही जमीनी स्तर की पुख्ता जानकारी राज्य सरकार तक पहुंचेगी, प्रशासन किसी भी चुनौती या सुरक्षा में मौजूद कमियों से बहुत कम समय में प्रभावी तरीके से निपट सकेगा।
अवैध गतिविधियों पर लगाम कसने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने अपने पिछले दौरे के समय भी इस बात पर विशेष बल दिया था कि सीमा को पूरी तरह अभेद्य बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों का मिलकर काम करना बेहद आवश्यक है। माणिक साहा के अनुसार, यदि सीमा प्रबंधन मजबूत होता है और एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सुचारू रूप से चलता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सीमा पर होने वाली मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर बहुत हद तक रोक लगाई जा सकेगी।



















