असम सीमा पर स्थित चुराईबाड़ी चेकपोस्ट के जरिए त्रिपुरा में प्रवेश करने वाले मालवाहक वाहनों की निगरानी के लिए राज्य सरकार उन्नत स्कैनर तकनीक लागू करने की योजना पर काम कर रही है। वित्त मंत्री प्रणजीत सिंह रॉय ने मंगलवार को इस तकनीकी पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य पुरानी मैनुअल जांच प्रक्रिया को हटाकर एक सुचारू डिजिटल व्यवस्था स्थापित करना है। वाहनों और उन पर लदे सामान की जांच को स्वचालित बनाकर राज्य प्रशासन का लक्ष्य अंतरराज्यीय सीमा पर लगने वाले ट्रैफिक जाम को खत्म करना और सुरक्षा निगरानी को अधिक मजबूत बनाना है।
मैनुअल जांच से राहत और त्वरित डिजिटल एंट्री
वर्तमान व्यवस्था के तहत दूसरे राज्यों से त्रिपुरा आने वाले सभी व्यावसायिक ट्रकों को चुराईबाड़ी सीमा बिंदु पर भौतिक और मैनुअल सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस मैनुअल प्रक्रिया में काफी समय लगता है, जिससे चेकपोस्ट पर ट्रकों की लंबी कतारें लग जाती हैं और वाणिज्यिक वाहन चालकों तथा ट्रांसपोर्टरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित स्कैनर प्रणाली लागू होने के बाद वाहनों को बिना किसी लंबी रुकावट या कागजी कार्रवाई के सीमा से निकलने की अनुमति दी जाएगी, जिससे उनका डेटा डिजिटल रूप से दर्ज हो सकेगा।
इस नई योजना के अंतर्गत जैसे ही वाहन चेकपोस्ट से गुजरेंगे, ऑटोमेटेड स्कैनर मशीनें वाहन का पंजीकरण नंबर, उस पर लदे सामान का पूरा विवरण और ड्राइवर का नाम व पता जैसी महत्वपूर्ण जानकारी स्वतः एकत्र कर लेंगी। यह सारा डेटा तुरंत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अगरतला स्थित राज्य सरकार के मुख्यालय में भेज दिया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था से सरकारी अधिकारी बिना वाहनों की आवाजाही को बाधित किए उनके आगमन की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत और अवैध तस्करी पर लगाम
लॉजिस्टिक्स को गति देने के अलावा इस स्कैनर तकनीक के इस्तेमाल से प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। वित्त मंत्री प्रणजीत सिंह रॉय ने स्पष्ट किया कि रियल टाइम डेटा संग्रह की मदद से राज्य प्रशासन त्रिपुरा में प्रवेश करने वाले हर व्यावसायिक वाहन का सटीक रिकॉर्ड रख सकेगा। यह उच्च स्तरीय डिजिटल निगरानी सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करेगी और नशीले पदार्थों तथा अवैध सामग्रियों की तस्करी रोकने में पुलिस व जांच एजेंसियों की मदद करेगी।
वित्त मंत्री ने बताया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद से पारंपरिक चेकपोस्ट के कामकाज के तरीकों में बुनियादी बदलाव आया है। पहले जहां चेकपोस्ट का मुख्य ध्यान कर वसूली से जुड़े कागजी दस्तावेजों की जांच पर रहता था, वहीं अब जीएसटी लागू होने के बाद डिजिटल पारदर्शिता और माल की निर्बाध आवाजाही को प्राथमिकता दी जाती है। इन बदलावों के आलोक में त्रिपुरा सरकार अंतरराज्यीय माल ढुलाई को अधिक सुव्यवस्थित और कुशल बनाने के लिए तकनीक आधारित समाधानों को अपना रही है।
नेक्स्टजेन एचआरएमएस और प्रशासनिक सुधार
वित्त मंत्री ने यह घोषणा अगरतला स्थित प्रज्ञा भवन में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान की, जहां नेक्स्टजेन एचआरएमएस (NextGen HRMS) के चार नए मॉड्यूल लॉन्च किए गए। राज्य के वित्त विभाग द्वारा विकसित नेक्स्टजेन एचआरएमएस एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी कर्मचारियों के पूरे सेवा काल के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का कार्य करता है।
यह प्लेटफॉर्म कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा पुस्तिका के रखरखाव, छुट्टी प्रबंधन, वेतन भुगतान, पेंशन और ट्रेजरी से जुड़े भुगतानों को एक ही डिजिटल पोर्टल पर लाता है। कर्मचारियों से जुड़ी सेवाओं को केंद्रीकृत और डिजिटल करने से सरकारी विभागों में कागजी कार्रवाई पर निर्भरता समाप्त हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आई है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व में ई-गवर्नेंस का विस्तार
प्रणजीत सिंह रॉय ने जोर देकर कहा कि ये सभी पहल त्रिपुरा को पूरी तरह से डिजिटल रूप से सक्षम राज्य बनाने की दिशा में जारी प्रयासों का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रशासन के सभी स्तरों पर ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। यह डिजिटल बदलाव त्रिपुरा विधानसभा से लेकर ग्रामीण स्तर की पंचायतों तक विस्तारित किया गया है।
वित्त मंत्री के अनुसार डिजिटल प्रणालियों के व्यापक इस्तेमाल से सरकारी कामकाज की गति में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। इन डिजिटल माध्यमों की बदौलत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता और कल्याणकारी लाभ बिना किसी देरी के अधिक पारदर्शी, सटीक और तीव्र गति से सीधे उन तक पहुंच रहे हैं।





















