त्रिपुरा में होने वाले आगामी ग्रामीण समिति चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और टिपरा मोथा के संस्थापक प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के साथ एक अहम बैठक की। लगभग 90 मिनट तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय जनता पार्टी के पूर्वोत्तर समन्वयक संबीत पात्रा भी शामिल रहे।
गठजोड़ और सीटों के समीकरण पर चर्चा
यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई है जब स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी और टिपरा मोथा के बीच आपसी तालमेल बिठाने और एक व्यापक समझ विकसित करने के प्रयास जारी हैं। इसके अलावा, यह बातचीत त्रिपुरा के स्वदेशी लोगों के राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक हितों से जुड़ी टिपरा मोथा की लंबे समय से चली आ रही मांगों के संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ त्रिपुरा के विकास, कल्याण और आपसी महत्व के विषयों पर एक बेहद सकारात्मक और सार्थक चर्चा की है।
त्रिपक्षीय समझौते और भूमि अधिकारों पर आश्वासन
बैठक से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री ने टिपरा मोथा के नेतृत्व को यह भरोसा दिलाया है कि त्रिपक्षीय समझौते को जल्द ही लागू किया जाएगा। इसके साथ ही, संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधानों के तहत स्थानीय निवासियों को भूमि अधिकार प्रदान किए जाने का भी आश्वासन दिया गया है।
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद और चुनाव का महत्व
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत आने वाली कुल 587 ग्रामीण समितियों के लिए आगामी 28 सितंबर को चुनाव तय किए गए हैं। यह स्वायत्त जिला परिषद त्रिपुरा के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के लगभग दो-थाइ हिस्से को कवर करती है और राज्य की एक बहुत बड़ी आदिवासी आबादी का घर है। यही कारण है कि स्थानीय जनजातीय राजनीति पर मजबूत पकड़ बनाए रखना दोनों ही प्रमुख दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
दस साल बाद हो रहे हैं ग्रामीण समिति चुनाव
उल्लेखनीय है कि ये ग्रामीण समिति चुनाव पूरे दस साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित किए जा रहे हैं। मूल रूप से इन चुनावों का आयोजन वर्ष 2022 में होना तय किया गया था, लेकिन कोविड-19 महामारी के प्रकोप और उसके बाद उत्पन्न हुए विभिन्न कानूनी गतिरोधों तथा अड़चनों के कारण इन्हें लगातार टाला जाता रहा है।



















